<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
     xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
     xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
     xmlns:admin="http://webns.net/mvcb/"
     xmlns:rdf="http://www.w3.org/1999/02/22-rdf-syntax-ns#"
     xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
     xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/">
<channel>
    <title>धाकड़ समाचार &amp; : अमेरिका</title>
    <link>https://dhakarsamachar.in/rss/category/America</link>
    <description>धाकड़ समाचार &amp; : अमेरिका</description>
    <dc:language>HI</dc:language>
    <dc:creator></dc:creator>
    <dc:rights>Copyright 2026 धाकड़ समाचार    &amp; All Rights Reserved.</dc:rights>
    <item>
        <title>चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 23 से 25 सितंबर तक अमेरिका दौरे पर</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/चीन-के-राष्ट्रपति-शी-जिनपिंग-23-से-25-सितंबर-तक-अमेरिका-दौरे-पर</link>
        <guid>https://dhakarsamachar.in/चीन-के-राष्ट्रपति-शी-जिनपिंग-23-से-25-सितंबर-तक-अमेरिका-दौरे-पर</guid>
        <description><![CDATA[ चीन और अमेरिका के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क को लेकर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 23 से 25 सितंबर 2026 तक अमेरिका की राजकीय यात्रा पर जाएंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने 21 सितंबर को यात्रा की घोषणा की। यह यात्रा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर आयोजित की जा रही है।
चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, यात्रा के दौरान शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के बीच चीन-अमेरिका संबंधों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर बातचीत होगी। इसके अलावा विश्व शांति और विकास से संबंधित विषयों पर भी दोनों नेताओं के बीच विचारों का आदान-प्रदान होगा।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि दोनों देशों के नेताओं की यह यात्रा और उच्चस्तरीय संपर्क चीन-अमेरिका संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है। मंत्रालय ने बातचीत और सहयोग को मजबूत करने तथा दोनों देशों के बीच मतभेदों को उचित तरीके से संभालने की बात कही है।
यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब चीन और अमेरिका के बीच व्यापार, तकनीक, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों को लेकर लगातार उच्चस्तरीय संवाद जारी है। दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं का वैश्विक बाजारों पर बड़ा प्रभाव है, इसलिए शीर्ष नेतृत्व की बैठक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान किन विशिष्ट मुद्दों पर समझौता या घोषणा होगी, यह बैठक के बाद स्पष्ट होगा। फिलहाल आधिकारिक तौर पर यात्रा का मुख्य एजेंडा दोनों देशों के संबंधों और व्यापक अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत बताया गया है।
इस यात्रा का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच सीधे संवाद का अवसर मिलेगा। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि चीन अमेरिका के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने तथा मतभेदों को सही तरीके से संभालने के लिए काम करना चाहता है। ]]></description>
        <enclosure url="http://dhakarsamachar.in/uploads/images/202609/image_870x580_6ab10217bffec.jpg" length="66010" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 15:38:39 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>शी जिनपिंग, अमेरिका दौरा, डोनाल्ड ट्रंप, चीन अमेरिका संबंध, US China, अंतरराष्ट्रीय समाचार</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत&amp;कनाडा व्यापार समझौते की वार्ता तेज, 2026 के अंत तक लक्ष्य</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/भारत-कनाडा-व्यापार-समझौते-की-वार्ता-तेज-2026-के-अंत-तक-लक्ष्य</link>
        <guid>https://dhakarsamachar.in/भारत-कनाडा-व्यापार-समझौते-की-वार्ता-तेज-2026-के-अंत-तक-लक्ष्य</guid>
        <description><![CDATA[ नई दिल्ली, 19 सितंबर 2026। भारत और कनाडा ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर चल रही बातचीत को आगे बढ़ाने और इसे तेज करने पर सहमति जताई है। दोनों देशों के वाणिज्य एवं व्यापार अधिकारियों के बीच हुई चर्चा में आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और व्यापारिक बाधाओं को कम करने के मुद्दों पर बातचीत हुई। दोनों पक्ष 2026 के अंत तक समझौते को पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
व्यापार वार्ता को गति देने पर जोर
भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के बीच हुई बैठक में CEPA वार्ता की प्रगति की समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने बातचीत को आगे बढ़ाने और लंबित मुद्दों पर काम तेज करने की प्रतिबद्धता जताई।
CEPA का उद्देश्य दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को आसान बनाना तथा निवेश और आर्थिक सहयोग के लिए अधिक अनुकूल परिस्थितियां तैयार करना है।
अगले चरण में वार्ता
उपलब्ध जानकारी के अनुसार भारतीय वार्ताकारों के अगले महीने कनाडा जाने की संभावना है। दोनों देशों के अधिकारी समझौते के अलग-अलग हिस्सों पर आगे चर्चा करेंगे।
भारत और कनाडा के बीच व्यापार संबंधों में ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, तकनीक और अन्य क्षेत्रों को लेकर सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है। दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को व्यापक बनाने के लिए इन क्षेत्रों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और औद्योगिक उत्पादन के लिए विभिन्न देशों के साथ दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी बढ़ा रहा है। कनाडा के पास ऊर्जा संसाधनों के साथ-साथ महत्वपूर्ण खनिजों के भी बड़े भंडार हैं।
सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और आधुनिक तकनीकी उद्योगों के विस्तार के साथ लिथियम, निकेल और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक मांग बढ़ी है। ऐसे में दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग व्यापार वार्ता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
निवेश के लिए भी अवसर
CEPA के जरिए केवल वस्तुओं के व्यापार को बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि सेवाओं और निवेश से जुड़े मुद्दों को भी संबोधित करने का प्रयास किया जा रहा है।
भारत की आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग और सेवा कंपनियों के लिए कनाडा एक महत्वपूर्ण बाजार है। वहीं कनाडाई कंपनियों के लिए भारत का बड़ा उपभोक्ता बाजार और तेजी से बढ़ता औद्योगिक आधार निवेश के अवसर प्रदान करता है।
2026 के अंत तक समझौते का लक्ष्य
दोनों देशों के बीच बातचीत का अगला महत्वपूर्ण लक्ष्य 2026 के अंत तक CEPA को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ना है। हालांकि किसी भी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से पहले विभिन्न क्षेत्रों में सहमति और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करना आवश्यक होगा।
भारत और कनाडा के अधिकारियों के बीच आगे होने वाली बैठकों से यह स्पष्ट होगा कि लंबित मुद्दों पर कितनी तेजी से सहमति बनती है। फिलहाल दोनों पक्षों ने वार्ता को आगे बढ़ाने और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। ]]></description>
        <enclosure url="http://dhakarsamachar.in/uploads/images/202609/image_870x580_6aaed2af506e9.jpg" length="77053" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 23:51:58 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>भारत कनाडा व्यापार, India Canada CEPA, CEPA 2026, भारत कनाडा समझौता, व्यापार वार्ता, आर्थिक संबंध</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>15 अगस्त 2026 को भारत&amp;अमेरिका व्यापार वार्ता और टैरिफ मुद्दे पर नई प्रगति सामने आई। दोनों देशों के बीच व्यापारिक समाधान को लेकर बातचीत जारी है।</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/india-us-trade-tariff-talks-15-august-2026</link>
        <guid>https://dhakarsamachar.in/india-us-trade-tariff-talks-15-august-2026</guid>
        <description><![CDATA[ नई दिल्ली, 15 अगस्त 2026: भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता को लेकर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, India&#039;s ​Tata Sons ‌Chairman N. ​Chandrasekaran ​has resigned ⁠but ​will ​complete his current ​term, ​a source ‌with ⁠direct knowledge of... 
Reuters

यह घटनाक्रम ऐसे समय आया है जब दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) को अंतिम रूप देने की दिशा में लगातार बातचीत कर रहे हैं। हाल के महीनों में टैरिफ, बाजार पहुंच, कृषि उत्पाद और औद्योगिक व्यापार जैसे मुद्दे वार्ता के केंद्र में रहे हैं। 
Reuters

क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?

भारत और अमेरिका एक-दूसरे के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं। किसी भी टैरिफ या व्यापार नीति में बदलाव का असर भारतीय निर्यातकों, उद्योगों और निवेशकों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच सहमति बनने से व्यापारिक अनिश्चितता कम हो सकती है। 
Reuters

किन क्षेत्रों पर पड़ सकता है असर?

संभावित व्यापारिक फैसलों का प्रभाव इन क्षेत्रों पर सबसे अधिक माना जा रहा है:

इंजीनियरिंग एवं मैन्युफैक्चरिंग

टेक्सटाइल और परिधान

ऑटो कंपोनेंट्स

कृषि एवं खाद्य उत्पाद

रसायन एवं औद्योगिक निर्यात

इन क्षेत्रों में अमेरिका भारत का महत्वपूर्ण निर्यात बाजार है, इसलिए टैरिफ से जुड़े निर्णय कारोबार के लिए अहम होंगे।

आगे क्या होगा?

फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और अंतिम निर्णय औपचारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में संयुक्त बयान या समझौते की दिशा में और प्रगति देखने को मिल सकती है। 
Reuters

निष्कर्ष

15 अगस्त 2026 की यह खबर भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वार्ता का मुख्य उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं को कम करना और दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है। अंतिम निर्णय आने तक उद्योग जगत और निवेशकों की नजर इस बातचीत पर बनी रहेगी। ]]></description>
        <enclosure url="http://dhakarsamachar.in/uploads/images/202608/image_870x580_6a70c0a5a7b72.jpg" length="357949" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 16:36:57 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>India US Trade 2026, US Tariff India, Trade Deal, India America Relations, Business News Hindi</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत ने अमेरिकी एथेनॉल आयात को लेकर साफ किया रुख, ट्रेड डील में कोई प्रतिबद्धता नहीं</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/india-us-ethanol-import-trade-deal-august-6-2026</link>
        <guid>https://dhakarsamachar.in/india-us-ethanol-import-trade-deal-august-6-2026</guid>
        <description><![CDATA[ नई दिल्ली, 6 अगस्त 2026: भारत सरकार ने अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ता में अमेरिकी एथेनॉल के बड़े पैमाने पर आयात को लेकर किसी भी तरह की प्रतिबद्धता से इनकार किया है। वाणिज्य मंत्रालय ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि भारत ने अमेरिका से ईंधन एथेनॉल के आयात के संबंध में कोई रियायत या प्रतिबद्धता नहीं दी है।

मंत्रालय का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। दोनों देश बाजार पहुंच बढ़ाने और व्यापार बाधाओं को कम करने के लिए समझौते पर चर्चा कर रहे हैं।

भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति

भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य पेट्रोलियम ईंधन के साथ घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाना है।

Reuters के अनुसार, भारत में पेट्रोल के साथ 20% एथेनॉल मिश्रण यानी E20 की नीति लागू है। मौजूदा सरकारी नियम स्थानीय स्तर पर उत्पादित एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाने की अनुमति देते हैं।

एथेनॉल ब्लेंडिंग से भारत को पेट्रोलियम आयात पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र से जुड़े कच्चे माल के उपयोग को भी बढ़ावा मिलता है।

अमेरिका से आयात को लेकर क्या कहा सरकार ने?

वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऐसी खबरें या सुझाव कि भारत अमेरिका से बड़े पैमाने पर ईंधन एथेनॉल आयात करने के लिए अपनी नीति बदलने जा रहा है, भ्रामक हैं।

इस बयान से यह साफ होता है कि भारत फिलहाल घरेलू उत्पादन और अपनी मौजूदा एथेनॉल ब्लेंडिंग व्यवस्था पर जोर दे रहा है।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में क्यों महत्वपूर्ण है मामला?

भारत और अमेरिका दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने के लिए एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। इसका उद्देश्य दोनों बाजारों में वस्तुओं की पहुंच बढ़ाना और कुछ व्यापारिक बाधाओं को कम करना है।

एथेनॉल का मुद्दा इस बातचीत में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका भी एथेनॉल का बड़ा उत्पादक है। यदि भारत बड़े पैमाने पर आयात की अनुमति देता, तो इसका घरेलू एथेनॉल उत्पादकों पर प्रभाव पड़ सकता था।

घरेलू उत्पादकों के लिए महत्व

भारत में एथेनॉल का उत्पादन कृषि आधारित कच्चे माल से होता है। ऐसे में घरेलू एथेनॉल उद्योग किसानों, चीनी उद्योग और अन्य कृषि आधारित क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है।

यदि विदेशी एथेनॉल का बड़े पैमाने पर आयात किया जाता है, तो घरेलू उत्पादकों को कीमत और बाजार हिस्सेदारी के स्तर पर प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। सरकार के मौजूदा बयान से संकेत मिलता है कि घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता दी जा रही है।

E20 नीति का उद्देश्य

E20 नीति के तहत पेट्रोल में 20% तक एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा गया है। इसका एक उद्देश्य पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा को कम करना है।

इसके अलावा एथेनॉल को वैकल्पिक ईंधन के रूप में बढ़ावा देने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को समर्थन देने की कोशिश की जा रही है।

अमेरिका के साथ समझौते की स्थिति

Reuters के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है। एक अमेरिकी अधिकारी ने जुलाई में कहा था कि दोनों देशों के बीच समझौता तीन से चार महीनों के भीतर हो सकता है। हालांकि अंतिम समझौते की शर्तें और समयसीमा अभी निश्चित नहीं हैं।

इसलिए एथेनॉल सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बातचीत आगे भी जारी रह सकती है।

निष्कर्ष

6 अगस्त 2026 को भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में अमेरिकी ईंधन एथेनॉल के बड़े पैमाने पर आयात को लेकर भारत ने कोई प्रतिबद्धता नहीं दी है। सरकार ने ऐसे किसी संभावित नीति बदलाव की खबरों को भ्रामक बताया है। भारत फिलहाल घरेलू रूप से उत्पादित एथेनॉल के इस्तेमाल और अपनी E20 ब्लेंडिंग नीति पर जोर दे रहा है। ]]></description>
        <enclosure url="http://dhakarsamachar.in/uploads/images/202608/image_870x580_6a70c0a5a7b72.jpg" length="357949" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 18:16:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>India US Trade Deal 2026, India Ethanol Import, US Ethanol India, India Trade News, Ethanol Blending, E20 Fuel India, India US Relations</media:keywords>
    </item>
    </channel>
</rss>