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    <title>धाकड़ समाचार &amp; : ब्रेकिंग न्यूज़</title>
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    <description>धाकड़ समाचार &amp; : ब्रेकिंग न्यूज़</description>
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    <dc:rights>Copyright 2026 धाकड़ समाचार    &amp; All Rights Reserved.</dc:rights>
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        <title>वाराणसी में बारिश के चलते 12वीं तक के सभी स्कूल शनिवार को बंद</title>
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        <description><![CDATA[ वाराणसी। जिले में लगातार हो रही बारिश और मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए प्रशासन ने 26 सितंबर, शनिवार को कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी विद्यालयों में शिक्षण कार्य बंद रखने का आदेश जारी किया है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर जारी आदेश के तहत वाराणसी के परिषदीय, मान्यता प्राप्त और सहायता प्राप्त विद्यालयों में शनिवार को विद्यार्थियों के लिए शिक्षण कार्य नहीं होगा। इसके अलावा सीबीएसई, आईसीएसई और अन्य बोर्ड से संचालित विद्यालयों पर भी यह आदेश लागू रहेगा।
प्रशासन ने लगातार बारिश और मौसम की संभावित स्थिति को देखते हुए विद्यार्थियों की सुरक्षा के मद्देनजर यह फैसला लिया है। डीआईओएस वाराणसी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने विद्यालय बंद रखने की जानकारी दी है।
हालांकि, आदेश के अनुसार विद्यालयों में शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहेंगे। उन्हें विद्यालय पहुंचकर विभागीय, प्रशासनिक और अन्य आवश्यक कार्य करने होंगे।
सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और संबंधित अधिकारियों को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से मौसम की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
26 सितंबर को विद्यार्थियों के लिए कक्षा संचालन बंद रहेगा, जबकि शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी विद्यालय पहुंचकर अपने निर्धारित विभागीय कार्य करेंगे। ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 23:25:32 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>वाराणसी स्कूल बंद, वाराणसी बारिश, 26 सितंबर स्कूल बंद, स्कूल बंद आदेश, भारी बारिश, यूपी मौसम, जिलाधिकारी वाराणसी, डीआईओएस वाराणसी, बेसिक शिक्षा विभाग</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>दिल्ली के सत्य निकेतन में बहुमंजिला इमारत गिरी, राहत&amp;बचाव अभियान जारी</title>
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        <description><![CDATA[ नई दिल्ली, 7 सितंबर 2026। राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पुरानी बहुमंजिला इमारत के गिरने की घटना ने इलाके में चिंता बढ़ा दी। हादसा रविवार को हुआ, जिसके बाद पुलिस, दमकल विभाग और आपदा राहत दलों ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। इमारत में मुख्य रूप से छात्र और अन्य किरायेदार रह रहे थे। घटना के बाद आसपास के इलाके को सुरक्षा कारणों से घेर लिया गया और मलबे को हटाने का काम शुरू किया गया।
पुरानी इमारत में चल रहा था निर्माण कार्य
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह इमारत काफी पुरानी थी और हाल के समय में इसमें कुछ निर्माण या मरम्मत का काम भी हुआ था। अधिकारियों ने इमारत की स्थिति और वहां किए गए निर्माण कार्यों की जांच शुरू कर दी है। हादसे के संभावित कारणों में इमारत की पुरानी संरचना, निर्माण गतिविधियां और बारिश के कारण पैदा हुई परिस्थितियों को भी देखा जा रहा है।
दिल्ली में मानसून के दौरान पुरानी और कमजोर इमारतों को लेकर पहले से ही चिंता बनी रहती है। लगातार बारिश के कारण जमीन और इमारतों की संरचनाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऐसे में पुराने भवनों की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है।
बचाव दलों ने संभाला मोर्चा
इमारत गिरने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस और आपदा राहत दल मौके पर पहुंचे। बचावकर्मियों ने मलबे को सावधानी से हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश की। राहत अभियान के दौरान कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और जरूरत पड़ने पर घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।
घटना के बाद प्रशासन ने आसपास के भवनों और क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर भी निरीक्षण शुरू किया। अधिकारियों का प्रयास रहा कि राहत कार्य के दौरान किसी अन्य व्यक्ति को खतरा न हो।
प्रशासन ने जांच के दिए निर्देश
हादसे के बाद दिल्ली सरकार और स्थानीय प्रशासन की ओर से भवन सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है। घटना ने राजधानी में पुराने मकानों, पीजी और छात्रावासों की सुरक्षा जांच को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
दिल्ली में बड़ी संख्या में छात्र और नौकरीपेशा लोग पीजी तथा किराये के भवनों में रहते हैं। ऐसे भवनों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, संरचनात्मक मजबूती, आपातकालीन निकासी और अग्नि सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं का होना बेहद जरूरी है।
घटना के बाद भवन मालिक की भूमिका और निर्माण से जुड़े नियमों के पालन की भी जांच की जा रही है। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि भवन में किए गए निर्माण के दौरान निर्धारित नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
पुरानी इमारतों की सुरक्षा फिर चर्चा में
सत्य निकेतन की घटना ने दिल्ली में पुरानी इमारतों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस तेज कर दी है। राजधानी के कई इलाकों में दशकों पुराने भवन मौजूद हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे भवनों की समय-समय पर संरचनात्मक जांच जरूरी है।
खासकर छात्र और कामकाजी लोगों के रहने वाले पीजी तथा किराये के भवनों में सुरक्षा नियमों की नियमित जांच की आवश्यकता है। प्रशासन की ओर से भी भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भवनों का सुरक्षा ऑडिट और आवश्यक कार्रवाई किए जाने पर जोर दिया जा रहा है।
यह घटना दिल्ली में शहरी सुरक्षा और पुराने भवनों के रखरखाव से जुड़ी चुनौतियों को सामने लाती है। राहत अभियान के बाद प्रशासन की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इमारत गिरने की वास्तविक वजह क्या थी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन कदमों की जरूरत होगी। ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 10:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>दिल्ली इमारत हादसा, सत्य निकेतन, Delhi Building Collapse, दिल्ली न्यूज, भवन सुरक्षा, राहत बचाव अभियान</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>यूपी में बाढ़ का खतरा बढ़ा, गंगा&amp;यमुना समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ा</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/यूपी-में-बाढ़-का-खतरा-बढ़ा-गंगा-यमुना-समेत-कई-नदियों-का-जलस्तर-बढ़ा</link>
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        <description><![CDATA[ लखनऊ/वाराणसी, 29 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में लगातार बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले पानी के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। गंगा, यमुना और उनकी सहायक नदियों के आसपास के इलाकों में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
गंगा के जलस्तर पर प्रशासन की नजर
पूर्वी उत्तर प्रदेश में गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण नदी किनारे के कई इलाकों में चिंता बढ़ी है। वाराणसी, गाजीपुर, बलिया और आसपास के क्षेत्रों में प्रशासन लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहा है।
नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में निचले इलाकों में पानी पहुंचने का खतरा रहता है।
वाराणसी में बढ़ी निगरानी
वाराणसी में गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए घाटों और नदी के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। निचले घाटों पर गतिविधियों को लेकर प्रशासन और पुलिस की निगरानी जारी है।
नाव संचालन और नदी में जाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष सावधानी बरती जा रही है। लोगों से नदी के तेज बहाव वाले हिस्सों से दूर रहने की अपील की गई है।
ग्रामीण इलाकों में चिंता
गंगा और अन्य नदियों के किनारे बसे ग्रामीण क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने से लोगों की चिंता बढ़ी है। कुछ स्थानों पर खेतों में पानी पहुंचने से फसलों को नुकसान की आशंका है।
प्रशासन ने बाढ़ की स्थिति बनने पर लोगों को निकालने के लिए सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों की व्यवस्था तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।
यमुना और सहायक नदियों का भी असर
प्रदेश के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में यमुना तथा उसकी सहायक नदियों के जलस्तर पर भी निगरानी रखी जा रही है। लगातार बारिश होने पर नदियों में पानी और बढ़ सकता है।
नदी किनारे के संवेदनशील इलाकों में राजस्व, पुलिस और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को सतर्क रखा गया है।
राहत शिविर तैयार
जिला प्रशासन ने संभावित बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविरों की व्यवस्था तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। इन स्थानों पर पीने का पानी, भोजन, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामान उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है।
जरूरत पड़ने पर नावों और बचाव दलों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सकता है।
किसानों की बढ़ी मुश्किल
बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर का असर किसानों पर भी पड़ रहा है। खेतों में पानी जमा होने से खरीफ फसलों को नुकसान की संभावना है।
कृषि विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का आकलन किया जा रहा है। जलस्तर सामान्य होने के बाद फसल नुकसान का वास्तविक आकलन किया जाएगा।
लोगों से सावधानी बरतने की अपील
प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने को कहा है। लोगों को नदी, नाले और जलभराव वाले इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी गई है।
विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को नदी के किनारे न जाने देने की अपील की गई है।
प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर रख रहा
उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति फिलहाल अलग-अलग जिलों में अलग-अलग है। सभी क्षेत्रों में एक जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती तैयारियां तेज कर दी हैं।
आने वाले दिनों में बारिश और नदियों के जलस्तर के आधार पर स्थिति में बदलाव हो सकता है। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 16:30:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>यूपी बाढ़, गंगा जलस्तर, यमुना जलस्तर, वाराणसी बाढ़, उत्तर प्रदेश बारिश</media:keywords>
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    <item>
        <title>गुजरात में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात, कई इलाकों में राहत&amp;बचाव अभियान तेज</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/गुजरात-में-भारी-बारिश-से-बाढ़-जैसे-हालात-कई-इलाकों-में-राहत-बचाव-अभियान-तेज</link>
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        <description><![CDATA[ अहमदाबाद, 28 अगस्त 2026। गुजरात के कई हिस्सों में लगातार भारी बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। कुछ जिलों में निचले इलाकों में पानी भरने और नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण बाढ़ जैसी स्थिति बनी है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय किया है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई की जा रही है।
लगातार बारिश से बढ़ी परेशानी
राज्य के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से बारिश का दौर जारी है। तेज बारिश के कारण सड़कों पर पानी जमा हो गया और कई गांवों तथा शहरी इलाकों में जलनिकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया।
निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन की टीमें पानी निकालने और प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सहायता पहुंचाने में जुटी हैं।
नदियों और जलाशयों पर नजर
भारी बारिश के बाद राज्य की कई नदियों और जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ गया है। प्रशासन लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहा है ताकि संभावित बाढ़ की स्थिति में समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
कुछ क्षेत्रों में जलभराव के कारण सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। ऐसे स्थानों पर यातायात को नियंत्रित करने और वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
राहत शिविरों की व्यवस्था
जिन इलाकों में पानी बढ़ने के कारण लोगों को घरों से बाहर निकालना जरूरी हुआ, वहां अस्थायी राहत शिविरों की व्यवस्था की गई है। इन शिविरों में भोजन, पीने का पानी और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रशासन ने स्थानीय अधिकारियों को प्रभावित लोगों की जरूरतों का आकलन करने और आवश्यक सामान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
आपदा प्रतिक्रिया दल सक्रिय
बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन से जुड़े दलों को सक्रिय रखा गया है। जरूरत पड़ने पर लोगों को निकालने के लिए नावों और अन्य बचाव संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
बिजली व्यवस्था और संचार सेवाओं को भी लगातार निगरानी में रखा गया है। जहां पेड़ गिरने या जलभराव के कारण बिजली आपूर्ति बाधित हुई है, वहां मरम्मत टीमों को भेजा जा रहा है।
किसानों पर दोहरा असर
गुजरात में बारिश से किसानों को एक तरफ पानी की उपलब्धता का लाभ मिल सकता है, लेकिन अत्यधिक बारिश से फसलों को नुकसान का खतरा भी बढ़ गया है।
जिन खेतों में पानी लंबे समय तक जमा रहता है, वहां फसल खराब होने की आशंका रहती है। कृषि विभाग की ओर से किसानों को खेतों में जलनिकासी की व्यवस्था बनाए रखने और स्थानीय सलाह के अनुसार फसल प्रबंधन करने को कहा जा रहा है।
यातायात व्यवस्था प्रभावित
भारी बारिश का असर सड़क और रेल यातायात पर भी पड़ सकता है। कुछ मार्गों पर जलभराव के कारण वाहनों की गति कम हुई है। प्रशासन ने लोगों से मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए जरूरी होने पर ही यात्रा करने की अपील की है।
शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक पुलिस और नगर निकाय की टीमें जलभराव वाले प्रमुख स्थानों पर तैनात हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने गुजरात के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है। कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश होने पर स्थानीय स्तर पर स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
लोगों से अपील की गई है कि वे नदियों, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों के आसपास जाने से बचें। विशेष रूप से बच्चों को ऐसे स्थानों से दूर रखने की सलाह दी गई है।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
राज्य सरकार और जिला प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों के बीच समन्वय के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर राहत टीमों की तैनाती की गई है।
प्रशासन का मुख्य लक्ष्य बारिश के कारण होने वाले नुकसान को कम करना और जरूरत पड़ने पर लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है।
फिलहाल गुजरात के कई हिस्सों में बारिश का असर बना हुआ है। मौसम में सुधार आने तक राहत एवं बचाव एजेंसियों को सतर्क रखा गया है। ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 16:27:54 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>गुजरात बारिश, गुजरात बाढ़, भारी बारिश 2026, मौसम अलर्ट, राहत बचाव</media:keywords>
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    <item>
        <title>45 बिजली संयंत्रों में कोयले का स्टॉक गंभीर स्तर पर, मानसून से आपूर्ति प्रभावित</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/45-बिजली-संयंत्रों-में-कोयले-का-स्टॉक-गंभीर-स्तर-पर-मानसून-से-आपूर्ति-प्रभावित</link>
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        <description><![CDATA[ नई दिल्ली, 27 अगस्त 2026। देश के बिजली क्षेत्र के सामने कोयले की आपूर्ति को लेकर नई चुनौती सामने आई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 25 अगस्त तक देश के 45 कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार गंभीर रूप से कम हो गया था। जुलाई के अंत में ऐसे संयंत्रों की संख्या 31 थी। यानी करीब एक महीने के भीतर कम स्टॉक वाले बिजली संयंत्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
भारी बारिश से कोयला आपूर्ति प्रभावित
कोयले के स्टॉक में कमी का सबसे बड़ा कारण देश के प्रमुख कोयला उत्पादक राज्यों में हुई भारी बारिश को माना जा रहा है। ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में मानसून की तेज गतिविधियों के कारण खनन और कोयले के परिवहन पर असर पड़ा है।
लगातार बारिश के कारण कई खदानों में काम प्रभावित हुआ है। इसके अलावा खदानों से बिजली संयंत्रों तक कोयला पहुंचाने के लिए इस्तेमाल होने वाली परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। इससे बिजली संयंत्रों को उनकी जरूरत के मुताबिक कोयला मिलने में देरी हो रही है।
40 संयंत्र घरेलू कोयले पर निर्भर
गंभीर स्टॉक वाले 45 बिजली संयंत्रों में से 40 संयंत्र घरेलू स्तर पर उपलब्ध कराए जाने वाले कोयले पर निर्भर हैं। इसका मतलब है कि समस्या केवल आयातित कोयले की उपलब्धता से जुड़ी नहीं है, बल्कि घरेलू उत्पादन और परिवहन व्यवस्था भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश के बिजली संयंत्रों में उपलब्ध कोयले का कुल स्टॉक जुलाई के मुकाबले करीब 19 प्रतिशत कम हुआ है। मौजूदा स्टॉक लगभग 30.95 मिलियन टन बताया गया है, जो करीब 10 दिनों की बिजली उत्पादन जरूरत के बराबर है। एक महीने पहले यह स्टॉक लगभग 12 दिनों के संचालन के लिए पर्याप्त था।
बिजली की मांग भी बनी हुई है चुनौती
कोयले की आपूर्ति में कमी ऐसे समय सामने आई है जब बिजली की मांग पर भी दबाव बना हुआ है। मौसम संबंधी परिस्थितियों और कुछ क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक गर्मी के कारण लोगों द्वारा कूलिंग उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा है।
रात के समय भी बिजली की मांग ऊंची रहने से बिजली उत्पादन कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। यदि कोयले की आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित रहती है, तो बिजली संयंत्रों के लिए पर्याप्त ईंधन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
एनटीपीसी को भी कम मिल रही कोयला आपूर्ति
देश की सबसे बड़ी ताप विद्युत उत्पादक कंपनियों में शामिल एनटीपीसी को भी जरूरत के मुकाबले कम कोयला रेक मिलने की स्थिति सामने आई है। कोयला रेक के माध्यम से खदानों से बिजली संयंत्रों तक बड़ी मात्रा में कोयला पहुंचाया जाता है।
परिवहन व्यवस्था में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर बिजली संयंत्रों के स्टॉक पर पड़ता है। यही वजह है कि बिजली मंत्रालय की ओर से संयंत्रों और संबंधित एजेंसियों को स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
कुछ संयंत्रों का रखरखाव टालने की सलाह
कोयले की उपलब्धता सामान्य होने तक कुछ बिजली संयंत्रों को निर्धारित रखरखाव कार्य को आगे बढ़ाने की सलाह दी गई है। सामान्य परिस्थितियों में बिजली संयंत्रों का रखरखाव आवश्यक होता है, लेकिन बिजली की मांग और ईंधन आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ कार्यों को उचित समय तक टालना जरूरी हो सकता है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपलब्ध बिजली उत्पादन क्षमता का अधिकतम उपयोग किया जा सके और बिजली की मांग बढ़ने की स्थिति में उत्पादन प्रभावित न हो।
बिजली व्यवस्था पर क्या होगा असर?
फिलहाल कोयले की कमी का मतलब यह नहीं है कि देश में तुरंत बिजली संकट पैदा हो गया है। बिजली व्यवस्था कई स्रोतों पर निर्भर करती है, जिनमें कोयला, गैस, जल विद्युत, परमाणु ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा शामिल हैं।
हालांकि, भारत की बिजली उत्पादन व्यवस्था में कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए लंबे समय तक कोयले की आपूर्ति बाधित रहने पर बिजली उत्पादन क्षमता पर दबाव बढ़ सकता है।
सरकार के सामने चुनौती यह है कि मानसून के दौरान खनन और परिवहन में आने वाली बाधाओं के बावजूद बिजली संयंत्रों में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा जाए।
आगे की स्थिति पर नजर
अधिकारियों की प्राथमिकता कोयले की खदानों से बिजली संयंत्रों तक आपूर्ति को सामान्य करना है। बारिश की तीव्रता कम होने और परिवहन व्यवस्था में सुधार आने पर कोयले की आपूर्ति में भी सुधार की उम्मीद की जा रही है।
फिलहाल बिजली मंत्रालय और संबंधित एजेंसियां संयंत्रों के कोयला स्टॉक, बिजली की मांग और रोजाना होने वाली आपूर्ति पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में मानसून की स्थिति यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी कि कोयले का स्टॉक कितनी तेजी से सामान्य स्तर पर लौटता है। ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 11:15:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>कोयला संकट, बिजली संयंत्र, भारत बिजली समाचार, कोयला स्टॉक, मानसून, बिजली उत्पादन</media:keywords>
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        <title>चौबेपुर में भीषण सड़क हादसा: अनियंत्रित कार ने विश्राम कर रहे कांवड़ियों को कुचला, एक की मौत, तीन गंभीर</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/chaubepur-road-accident-kanwariya-death</link>
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        <description><![CDATA[ चौबेपुर, वाराणसी। चौबेपुर थाना क्षेत्र में सोमवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। मार्कंडेय महादेव मंदिर में जलाभिषेक के लिए पैदल जा रहे कांवड़ियों के जत्थे को तेज रफ्तार अनियंत्रित कार ने सड़क किनारे विश्राम के दौरान टक्कर मार दी। हादसे में चार कांवड़िए गंभीर रूप से घायल हो गए। उपचार के दौरान एक श्रद्धालु की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य का इलाज जारी है।
विश्राम के दौरान कार ने मारी टक्कर
जानकारी के अनुसार, कांवड़ियों का जत्था कैथी स्थित प्रसिद्ध मार्कंडेय महादेव मंदिर में जलाभिषेक के लिए पैदल जा रहा था। सोमवार सुबह चौबेपुर स्थित एक निजी अस्पताल के पास कांवड़िए सड़क किनारे बैठकर कुछ देर विश्राम कर रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर उनकी ओर आ गई और चार कांवड़ियों को जोरदार टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी तेज थी कि सभी घायल सड़क पर दूर जा गिरे। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने में मदद की।
अस्पताल में एक कांवड़िए की मौत
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और एंबुलेंस की मदद से सभी घायलों को पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने विनीत तिवारी (25), पुत्र विनोद तिवारी, निवासी काल भैरव, वाराणसी को मृत घोषित कर दिया।
तीन घायलों का इलाज जारी
हादसे में आशीष चौधरी, रितेश पासी और सागर घायल हुए हैं। डॉक्टरों द्वारा उनका उपचार किया जा रहा है। गंभीर स्थिति को देखते हुए कुछ घायलों को बेहतर उपचार के लिए बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है।
पुलिस ने शुरू की जांच
एसीपी सारनाथ ने बताया कि पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर लिया है। हादसे में एक श्रद्धालु की मृत्यु हुई है, जबकि तीन घायलों का उपचार कराया जा रहा है। दुर्घटना के जिम्मेदार वाहन के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 07:14:58 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>चौबेपुर सड़क हादसा, वाराणसी सड़क दुर्घटना, कांवड़िया हादसा, मार्कंडेय महादेव, चौबेपुर दुर्घटना</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>IMD का भारी बारिश अलर्ट, 21 अगस्त तक कई राज्यों में तेज़ वर्षा की चेतावनी</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/imd-heavy-rain-alert-august-2026</link>
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        <description><![CDATA[ भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 17 से 21 अगस्त 2026 के बीच देश के कई हिस्सों में व्यापक और तेज़ वर्षा की चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार पूर्वी भारत, हिमालयी क्षेत्र, उत्तर-पूर्व, मध्य भारत और पश्चिमी तटीय राज्यों में लगातार बारिश होने की संभावना हैसबसे अधिक प्रभाव उत्तर ओडिशा और गंगीय पश्चिम बंगाल में देखने को मिल सकता है, जहाँ कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा बिहार, झारखंड, असम, मेघालय, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी कई जिलों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किए गए हैं।

IMD ने लोगों को नदी किनारे रहने वाले इलाकों में सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की है। लगातार बारिश के कारण निचले क्षेत्रों में जलभराव, सड़क यातायात प्रभावित होने तथा रेल सेवाओं में देरी की संभावना जताई गई है।

कृषि क्षेत्र के लिए यह बारिश मिश्रित प्रभाव ला सकती है। धान और खरीफ फसलों के लिए पर्याप्त वर्षा लाभदायक होगी, लेकिन अत्यधिक बारिश से जलभराव और फसल क्षति का खतरा भी बढ़ सकता है। किसानों को खेतों की जल निकासी की उचित व्यवस्था करने की सलाह दी गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र और मजबूत मानसूनी ट्रफ के कारण अगले कुछ दिनों तक वर्षा की तीव्रता बनी रह सकती है। मौसम विभाग स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है और आवश्यकता पड़ने पर नए अलर्ट जारी करेगा। ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 20:41:35 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>IMD Rain Alert, Monsoon 2026, Heavy Rain India, Odisha Rain</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत के खाद्य सुरक्षा नियामक ने Diageo को Whisky Labeling पर चेतावनी दी, ‘American Oak Casks’ दावा बताया भ्रामक</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/india-fssai-diageo-whisky-american-oak-casks-claim-august-8-2026</link>
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        <description><![CDATA[ नई दिल्ली, 8 अगस्त 2026: भारत के खाद्य सुरक्षा नियामक ने शराब बनाने वाली प्रमुख कंपनी Diageo को उसकी whisky की labeling को लेकर चेतावनी दी है। नियामक ने कंपनी के उस दावे पर आपत्ति जताई है जिसमें whisky को “matured in American oak casks” यानी अमेरिकी ओक के पीपों में परिपक्व किया गया बताया गया था। नियामक के अनुसार, यह दावा उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति के बारे में भ्रमित कर सकता है।

यह मामला भारत में खाद्य और पेय पदार्थों की labeling तथा उपभोक्ताओं को दी जाने वाली जानकारी की सटीकता से जुड़ा है। नियामक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पैकेजिंग पर किसी उत्पाद के बारे में ऐसे दावे न किए जाएं जो उपभोक्ता को गलत धारणा दे सकते हैं।

क्या है पूरा मामला?

Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के खाद्य सुरक्षा नियामक ने Diageo की whisky labeling की जांच के बाद कंपनी को चेतावनी दी। विवाद whisky के उस description को लेकर है जिसमें American oak casks में maturation का दावा किया गया था।

ऐसे दावे whisky की गुणवत्ता, स्वाद और उत्पादन प्रक्रिया को लेकर उपभोक्ताओं की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए नियामक labeling में इस्तेमाल होने वाले शब्दों और दावों को लेकर काफी सतर्क रहता है।

Labeling क्यों महत्वपूर्ण है?

किसी भी packaged product पर दी गई जानकारी उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण होती है। उत्पाद की सामग्री, निर्माण प्रक्रिया, मात्रा और अन्य विशेषताओं से जुड़ी जानकारी ग्राहक के खरीदारी के फैसले को प्रभावित कर सकती है।

यदि किसी उत्पाद के बारे में ऐसा दावा किया जाता है जो वास्तविक उत्पादन प्रक्रिया से पूरी तरह मेल नहीं खाता, तो उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं। इसी वजह से food safety authorities कंपनियों के labeling claims की निगरानी करते हैं।

Diageo के लिए क्या मायने रखता है?

Diageo वैश्विक स्तर पर बड़ी beverage companies में शामिल है और भारत में भी इसके कई लोकप्रिय alcoholic beverage brands मौजूद हैं। ऐसे में नियामक की चेतावनी कंपनी के लिए labeling practices की समीक्षा करने का संकेत हो सकती है।

कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके उत्पादों पर इस्तेमाल किए जाने वाले descriptions और marketing claims भारतीय नियमों के अनुरूप हों।

उपभोक्ताओं पर संभावित प्रभाव

इस मामले का सीधा संबंध consumer information से है। उपभोक्ता किसी whisky या अन्य beverage को खरीदते समय packaging पर लिखी जानकारी के आधार पर उत्पाद की विशेषताओं का अनुमान लगाते हैं।

यदि labeling में इस्तेमाल किया गया कोई दावा भ्रामक पाया जाता है, तो नियामक कार्रवाई का उद्देश्य ऐसी जानकारी को अधिक स्पष्ट और सटीक बनाना होता है।

भारत में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था

भारत में खाद्य और पेय उत्पादों की सुरक्षा तथा labeling को नियंत्रित करने के लिए Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

नियामक समय-समय पर विभिन्न packaged food और beverage products की labeling, ingredients तथा advertising claims की जांच करता है।

उद्योग के लिए संदेश

यह मामला beverage industry की अन्य कंपनियों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। कंपनियों को अपने products की packaging और advertising में इस्तेमाल होने वाले claims की regulatory compliance सुनिश्चित करनी होती है।

विशेष रूप से premium products में इस्तेमाल होने वाले production-method और origin से जुड़े claims उपभोक्ताओं के खरीदारी निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं।

निष्कर्ष

8 अगस्त 2026 को सामने आई Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के खाद्य सुरक्षा नियामक ने Diageo को उसकी whisky के “matured in American oak casks” दावे को लेकर चेतावनी दी। नियामक ने इस दावे को भ्रामक माना और मामला product labeling की सटीकता से जुड़ा है। यह घटना भारत में consumer information और food-and-beverage labeling standards के महत्व को सामने लाती है। ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 17:59:31 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>Diageo India, Whisky Labeling India, FSSAI News 2026, American Oak Casks, Food Safety India, Alcohol Industry India, Business News Hindi</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत ने अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ WTO में दर्ज कराई शिकायत, व्यापार विवाद हुआ गहरा</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/india-files-wto-complaint-against-us-tariffs-august-2026</link>
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        <description><![CDATA[ नई दिल्ली/जिनेवा, 4 अगस्त 2026: भारत ने अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए अतिरिक्त आयात शुल्क (Tariffs) के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (WTO) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। भारत का आरोप है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए ये शुल्क WTO के नियमों के अनुरूप नहीं हैं और इनसे भारतीय निर्यातकों को नुकसान हो सकता है। (reuters.com)

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर बातचीत भी जारी है। भारत का कहना है कि वह अपने व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए WTO के कानूनी ढांचे का उपयोग कर रहा है।

क्या है पूरा मामला?

अमेरिका ने हाल ही में कुछ भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने की घोषणा की थी। भारत का कहना है कि ये शुल्क WTO के Most Favoured Nation (MFN) और अन्य व्यापारिक सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं।

इसी आधार पर भारत ने WTO के विवाद निपटान तंत्र (Dispute Settlement Mechanism) के तहत औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। (reuters.com)

WTO में शिकायत दर्ज होने के बाद क्या होगा?

WTO की प्रक्रिया के अनुसार सबसे पहले दोनों देशों के बीच Consultation यानी औपचारिक बातचीत होगी। यदि इस चरण में समाधान नहीं निकलता, तो मामला WTO के विवाद निपटान पैनल (Dispute Panel) के पास जा सकता है।

पूरी प्रक्रिया में कई महीने या कभी-कभी एक वर्ष से अधिक समय भी लग सकता है।

किन क्षेत्रों पर पड़ सकता है असर?

यदि अमेरिका के अतिरिक्त टैरिफ लागू रहते हैं, तो भारत के कुछ प्रमुख निर्यात क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है, जिनमें शामिल हैं—

इंजीनियरिंग उत्पाद
ऑटो कंपोनेंट्स
रसायन
टेक्सटाइल
कुछ कृषि उत्पाद

हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम टैरिफ किस स्तर पर लागू होते हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता का क्या परिणाम निकलता है।

भारत का पक्ष

भारत का कहना है कि वह मुक्त और नियम-आधारित वैश्विक व्यापार व्यवस्था का समर्थन करता है। सरकार का मानना है कि किसी भी व्यापारिक विवाद का समाधान WTO के नियमों के अनुसार होना चाहिए।

भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि WTO में शिकायत दर्ज करने का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता बंद हो गई है। दोनों प्रक्रियाएं समानांतर चल सकती हैं।

अमेरिका की प्रतिक्रिया

Reuters के अनुसार, अमेरिका का कहना है कि उसके द्वारा उठाए गए कदम घरेलू व्यापार नीति और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप हैं। हालांकि मामले पर अंतिम निर्णय WTO की प्रक्रिया के तहत ही होगा। (reuters.com)

भारत-अमेरिका व्यापार संबंध

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार लगातार बढ़ रहा है।

इसी कारण व्यापारिक विवादों का समाधान दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि दीर्घकाल में दोनों देश व्यापारिक सहयोग बढ़ाना चाहते हैं, इसलिए बातचीत जारी रहने की संभावना है।

निष्कर्ष

4 अगस्त 2026 को भारत ने अमेरिका के अतिरिक्त टैरिफ के खिलाफ WTO में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। भारत का कहना है कि ये शुल्क वैश्विक व्यापार नियमों के अनुरूप नहीं हैं। अब WTO के विवाद निपटान तंत्र के तहत दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत होगी। यदि समाधान नहीं निकलता, तो मामला WTO पैनल तक पहुंच सकता है। ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 17:28:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>India WTO Complaint, US Tariffs, WTO News 2026, India US Trade, Donald Trump Tariffs, Global Trade News, Business News Hindi</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत ने PoK में हुए चुनावों को किया खारिज, विदेश मंत्रालय ने दोहराया अपना रुख</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/india-rejects-pok-elections-mea-statement-2026</link>
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        <description><![CDATA[ नई दिल्ली: भारत सरकार ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में कराए गए हालिया चुनावों को पूरी तरह अवैध और अस्वीकार्य बताते हुए स्पष्ट किया है कि इन चुनावों का कोई कानूनी या संवैधानिक महत्व नहीं है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न एवं अविभाज्य अंग हैं तथा पाकिस्तान द्वारा कब्जे वाले क्षेत्रों में कराई जाने वाली किसी भी राजनीतिक प्रक्रिया से भारत की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आएगा.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पाकिस्तान को ऐसे कदम उठाने के बजाय उन क्षेत्रों पर अपना अवैध कब्जा समाप्त करना चाहिए। भारत ने दोहराया कि पाकिस्तान द्वारा आयोजित चुनाव केवल दिखावटी राजनीतिक प्रक्रिया हैं और उनका उद्देश्य अवैध कब्जे को वैधता देने का प्रयास करना है।

सरकार ने कहा कि भारत का रुख वर्षों से स्पष्ट और लगातार एक जैसा रहा है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में होने वाले चुनाव, प्रशासनिक बदलाव या किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि भारत की संप्रभुता को प्रभावित नहीं कर सकती। मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस विषय पर भारत की स्थिति को समझने की अपील की।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत हर बार PoK से जुड़े मामलों पर अपना विरोध दर्ज कराता रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसका आधिकारिक रुख स्पष्ट बना रहे। उनका कहना है कि ऐसे बयान केवल कूटनीतिक प्रतिक्रिया नहीं बल्कि भारत की दीर्घकालिक विदेश नीति का हिस्सा हैं।

इस मुद्दे पर पाकिस्तान की ओर से अभी तक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव के कारण इस बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीमा पार आतंकवाद, नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा और कश्मीर से जुड़े मुद्दे पहले से ही भारत-पाकिस्तान संबंधों के प्रमुख विषय रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले समय में भी यदि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में इसी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियां होती हैं तो भारत की प्रतिक्रिया इसी प्रकार सख्त रहने की संभावना है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर से संबंधित सभी मुद्दे भारत का आंतरिक विषय हैं और पाकिस्तान को इस मामले में हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है।

भारत सरकार ने एक बार फिर दोहराया कि उसका उद्देश्य क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना है, लेकिन इसके लिए पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई करनी होगी और भारत के आंतरिक मामलों में दखल देना बंद करना होगा। सरकार का कहना है कि देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

Key Highlights
भारत ने PoK में हुए चुनावों को पूरी तरह अवैध बताया।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा हैं।
पाकिस्तान पर अवैध कब्जा समाप्त करने की अपील।
चुनावों से भारत के आधिकारिक रुख में कोई बदलाव नहीं।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अपना रुख दोहराया। ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 18:10:29 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में कराए गए चुनावों को पूरी तरह अवैध बताते हुए उन्हें खारिज किया। जानिए विदेश मंत्रालय ने क्या कहा।</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>मौसम विभाग का अलर्ट, कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना, किसानों को सतर्क रहने की सलाह</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/imd-heavy-rain-alert-many-states-monsoon-weather-update</link>
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        <description><![CDATA[ नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय होने के कारण मौसम विभाग (IMD) ने भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग के अनुसार, मानसूनी हवाओं की सक्रियता और कुछ क्षेत्रों में बने मौसमी सिस्टम के कारण बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। पहाड़ी इलाकों के साथ-साथ मैदानी राज्यों में भी बारिश का असर देखने को मिल सकता है।

मौसम विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतें और बिना जरूरत के जलभराव वाले इलाकों में जाने से बचें। प्रशासन को भी संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

बारिश का असर खेती पर भी पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम की जानकारी लेकर ही खेतों में काम करें और जलभराव वाली स्थिति से बचाव के लिए जरूरी कदम उठाएं।

देश के कई राज्यों में अच्छी बारिश से जहां जलस्रोतों को फायदा मिल सकता है, वहीं ज्यादा बारिश होने पर बाढ़ और जलभराव जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। स्थानीय प्रशासन ने आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं।

मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर नए अलर्ट जारी किए जा सकते हैं। ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 09:23:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>मौसम विभाग ने कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना जताई है। मानसून की सक्रियता को देखते हुए लोगों और किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।</media:keywords>
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