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    <title>धाकड़ समाचार &amp; : राष्ट्रीय</title>
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    <description>धाकड़ समाचार &amp; : राष्ट्रीय</description>
    <dc:language>HI</dc:language>
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    <dc:rights>Copyright 2026 धाकड़ समाचार    &amp; All Rights Reserved.</dc:rights>
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        <title>पूर्वांचल में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट, बिजली विभाग ने जारी किए सुरक्षा निर्देश</title>
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        <description><![CDATA[ वाराणसी। पूर्वांचल में 26 सितंबर को खराब मौसम को लेकर बिजली विभाग ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, वाराणसी की ओर से 25 सितंबर की रात जारी सूचना के अनुसार छत्तीसगढ़ से उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा डिप्रेशन रात करीब 11 बजे सिंगरौली और सोनभद्र सीमा के पास पहुंचने की संभावना जताई गई है। इसके बाद इसके प्रयागराज के पश्चिमी हिस्से से होते हुए लखनऊ की ओर बढ़ने का अनुमान है।
मौसम की स्थिति को देखते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश में 26 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश और करीब 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। कुछ स्थानों पर हवा की गति 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
विभाग ने जोखिम के आधार पर जिलों को तीन श्रेणियों में बांटा है। कैटेगरी-1 में सोनभद्र, मिर्जापुर, प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर और प्रतापगढ़ को रखा गया है। इन जिलों में आज रात से 26 सितंबर दोपहर तक सबसे अधिक सतर्कता बरतने के निर्देश हैं।
कैटेगरी-2 में महराजगंज, सिद्धार्थनगर, कुशीनगर, गोरखपुर, देवरिया, बस्ती और संत कबीर नगर शामिल हैं। यहां 26 सितंबर शाम से 27 सितंबर सुबह तक भारी बारिश का जोखिम बताया गया है। वहीं कैटेगरी-3 में वाराणसी, चंदौली, भदोही, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ और बलिया को रखा गया है।
बिजली विभाग ने तेज हवा, पेड़ या बिजली के खंभे गिरने, तार टूटने अथवा स्पार्किंग की स्थिति में प्रभावित 11 केवी फीडर को तत्काल बंद करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि पूरे जिले की बिजली आपूर्ति बंद नहीं की जाएगी, बल्कि केवल प्रभावित फीडर को जरूरत के अनुसार बंद किया जाएगा।
विभाग ने बिजली बहाल करने से पहले पूरी लाइन की जांच करने, टूटे कंडक्टर, झुके खंभों और पेड़ों की शाखाओं को हटाने के निर्देश दिए हैं। अस्पताल, वॉटर वर्क्स और अन्य आवश्यक सेवाओं वाले फीडरों को केवल अंतिम विकल्प के रूप में बंद करने और प्राथमिकता के आधार पर बहाल करने को कहा गया है।
इसके अलावा बिजली विभाग की टीमों को अतिरिक्त खंभे, कंडक्टर, इंसुलेटर, ट्रांसफार्मर, आरी, कुल्हाड़ी और अन्य जरूरी उपकरण पहले से तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। उपभोक्ताओं से भी अपील की गई है कि तेज बारिश या आंधी के दौरान गिरे हुए बिजली के तारों को न छुएं और ऐसी स्थिति की सूचना 1912 पर दें। ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 23:20:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>मौसम चेतावनी, पूर्वांचल मौसम, भारी बारिश, तेज हवा, बिजली विभाग, वाराणसी, सोनभद्र, मिर्जापुर, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश मौसम, विद्युत सुरक्षा, 26 सितंबर मौसम</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>OneTag सुविधा शुरू, अब FASTag बदले बिना बदल सकेंगे जारीकर्ता बैंक</title>
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        <description><![CDATA[ FASTag भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों पर इलेक्ट्रॉनिक टोल भुगतान की व्यवस्था है। अब तक यदि किसी वाहन मालिक को FASTag का जारीकर्ता बैंक बदलना होता था, तो कई मामलों में नया FASTag लेना पड़ता था। OneTag सुविधा इस प्रक्रिया को अधिक पोर्टेबल बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
NHAI के अनुसार, OneTag के जरिए उपयोगकर्ता अपने वाहन पर पहले से लगे FASTag को बरकरार रखते हुए दूसरे जारीकर्ता के पास पोर्ट कर सकता है। यानी बैंक बदलने के लिए वाहन की विंडस्क्रीन पर लगा भौतिक FASTag बदलना जरूरी नहीं होगा। इससे FASTag प्रबंधन से जुड़ी प्रक्रिया सरल होने की उम्मीद है।
यह सुविधा Rajmargyatra ऐप के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। ऐप उपयोगकर्ता को FASTag पोर्टेबिलिटी की प्रक्रिया में मार्गदर्शन करता है। उपयोगकर्ता को उपलब्ध विकल्पों के अनुसार अपने वाहन और मौजूदा FASTag से संबंधित जानकारी देकर पोर्टेबिलिटी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
OneTag की खासियत यह है कि इसमें FASTag की भौतिक पहचान को बनाए रखते हुए जारीकर्ता बदलने की सुविधा दी गई है। इससे उन वाहन मालिकों के लिए प्रक्रिया आसान हो सकती है जो किसी दूसरे बैंक की FASTag सेवा का इस्तेमाल करना चाहते हैं, लेकिन वाहन पर लगा मौजूदा टैग हटाना नहीं चाहते।
NHAI ने Rajmargyatra ऐप में FASTag से जुड़ी अन्य सेवाएं भी उपलब्ध कराई हैं। इनमें FASTag Annual Pass, FASTag Local Pass और राष्ट्रीय राजमार्ग आपातकालीन हेल्पलाइन 1033 जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
OneTag सुविधा को FASTag व्यवस्था में उपयोगकर्ता की पसंद और पोर्टेबिलिटी बढ़ाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। हालांकि, बैंक बदलने की प्रक्रिया में संबंधित जारीकर्ता और ऐप द्वारा मांगी गई पात्रता, सत्यापन तथा KYC संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना होगा।
नई सुविधा के बाद FASTag उपयोगकर्ताओं को बैंक बदलने के लिए हर बार नया भौतिक टैग लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे टैग बदलने से जुड़ी प्रक्रिया और वाहन पर नए टैग लगाने की आवश्यकता कम हो सकती है। ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 15:18:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>OneTag, FASTag, NHAI, Rajmargyatra App, FASTag portability, टोल भुगतान, राष्ट्रीय राजमार्ग</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत के प्रत्यक्ष कर संग्रह में 13 प्रतिशत बढ़ोतरी, ₹12.12 लाख करोड़ पहुंचा आंकड़ा</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/भारत-के-प्रत्यक्ष-कर-संग्रह-में-13-प्रतिशत-बढ़ोतरी-1212-लाख-करोड़-पहुंचा-आंकड़ा</link>
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        <description><![CDATA[ भारत के सरकारी राजस्व से जुड़ा एक महत्वपूर्ण आंकड़ा सामने आया है। 17 सितंबर 2026 तक देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 13 प्रतिशत बढ़कर ₹12.12 लाख करोड़ पहुंच गया। यह वृद्धि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में दर्ज की गई है। प्रत्यक्ष कर में मुख्य रूप से व्यक्तिगत आयकर और कॉर्पोरेट आयकर जैसे कर शामिल होते हैं।
आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह ₹14.32 लाख करोड़ से अधिक रहा। सकल संग्रह में रिफंड को घटाने से शुद्ध कर संग्रह का आंकड़ा प्राप्त होता है। इस साल रिफंड में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जिसके बावजूद शुद्ध संग्रह में दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की गई।
कर संग्रह में कॉर्पोरेट टैक्स के साथ-साथ सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT का भी योगदान रहा। शेयर बाजार में होने वाले निर्धारित लेनदेन पर STT लगाया जाता है और बाजार गतिविधियों के बढ़ने या घटने का असर इसके संग्रह पर पड़ सकता है।
प्रत्यक्ष कर संग्रह सरकार के वित्तीय प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे केंद्र सरकार को विभिन्न सार्वजनिक खर्चों और विकास से जुड़े कार्यक्रमों के लिए राजस्व उपलब्ध होता है। हालांकि कर संग्रह में वृद्धि को केवल एक कारण से जोड़ना उचित नहीं होता, क्योंकि इसमें आर्थिक गतिविधि, कर अनुपालन, कंपनियों के मुनाफे, व्यक्तिगत आय और बाजार से जुड़े लेनदेन सहित कई कारकों की भूमिका रहती है।
इसी अवधि में भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़े अन्य संकेतक भी चर्चा में रहे। Business Standard के अनुसार, सरकार के शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह में वृद्धि के साथ विदेशी मुद्रा भंडार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और अन्य आर्थिक संकेतकों में भी बदलाव दर्ज किए गए हैं।
प्रत्यक्ष कर संग्रह में बढ़ोतरी का एक पहलू करदाताओं की संख्या और अनुपालन से भी जुड़ा है। डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ आय और लेनदेन से संबंधित जानकारी के मिलान की क्षमता बढ़ी है। इससे कर प्रशासन को संभावित अंतर की पहचान करने और रिटर्न तथा भुगतान की निगरानी में मदद मिल सकती है।
हालांकि, कर संग्रह बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति या हर क्षेत्र पर कर समान रूप से बढ़ा है। कुल आंकड़ा पूरे देश के कर संग्रह को दर्शाता है और इसमें अलग-अलग प्रकार के करदाताओं तथा आर्थिक गतिविधियों का संयुक्त प्रभाव शामिल होता है।
आने वाले महीनों में प्रत्यक्ष कर संग्रह का रुझान सरकार की राजस्व स्थिति और वित्तीय योजना के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान कर संग्रह के अंतिम आंकड़े पूरे वर्ष के प्रदर्शन के बाद ही स्पष्ट होंगे। ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 00:17:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>प्रत्यक्ष कर संग्रह, Direct Tax Collection, भारत अर्थव्यवस्था, आयकर, कॉर्पोरेट टैक्स, सरकारी राजस्व, Tax Revenue</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>LPG सब्सिडी के लिए आधार बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण 1 अक्टूबर से अनिवार्य</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/lpg-सब्सिडी-के-लिए-आधार-बायोमेट्रिक-प्रमाणीकरण-1-अक्टूबर-से-अनिवार्य</link>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार ने घरेलू LPG सब्सिडी से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव की घोषणा की है। 1 अक्टूबर 2026 से सब्सिडी वाले घरेलू LPG रिफिल का लाभ लेने के लिए पात्र उपभोक्ताओं को आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण कराना होगा। इसकी जानकारी 19 सितंबर को सरकारी स्तर पर जारी की गई।
बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण का उद्देश्य लाभार्थी की पहचान को आधार रिकॉर्ड से सत्यापित करना है। इसके तहत पात्र उपभोक्ता की पहचान की पुष्टि होने के बाद ही संबंधित सब्सिडी लाभ की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सरकार की ओर से यह कदम सब्सिडी व्यवस्था में पहचान सत्यापन को मजबूत करने के तौर पर बताया गया है।
LPG देश के घरेलू ऊर्जा उपयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। बड़ी संख्या में परिवार खाना पकाने के लिए LPG सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सब्सिडी से जुड़े नियमों में बदलाव का सीधा असर उन उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है जो सरकारी सहायता के लिए पात्र हैं।
नई व्यवस्था में आधार प्रमाणीकरण की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उपभोक्ताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका आधार विवरण संबंधित LPG कनेक्शन और लाभार्थी रिकॉर्ड के साथ सही तरीके से जुड़ा हो। किसी तरह की जानकारी में अंतर होने पर सत्यापन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, नया नियम सब्सिडी वाले घरेलू LPG रिफिल पर लागू होगा। इसका अर्थ यह है कि सभी LPG उपभोक्ताओं को समान रूप से सब्सिडी लाभ नहीं मिलता और बायोमेट्रिक आवश्यकता का संबंध सब्सिडी प्राप्त करने की पात्रता से है।
यह बदलाव ऐसे समय में किया जा रहा है जब सरकार विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में आधार आधारित पहचान सत्यापन का इस्तेमाल बढ़ा रही है। आधार प्रमाणीकरण के जरिए लाभ को वास्तविक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने और रिकॉर्ड को अपडेट रखने की प्रक्रिया को मजबूत करने का प्रयास किया जाता है।
उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण तारीख 1 अक्टूबर 2026 है। जिन लोगों को घरेलू LPG पर सरकारी सब्सिडी मिलती है, उन्हें नए नियम के अनुसार बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की आवश्यकता को ध्यान में रखना होगा। संबंधित LPG वितरण व्यवस्था और सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 00:11:37 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>LPG Subsidy, Aadhaar Biometric Authentication, घरेलू गैस, LPG, आधार सत्यापन, भारत सरकार, गैस सब्सिडी</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>NTPC ने 413 करोड़ का बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट ठेका खत्म किया</title>
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        <description><![CDATA[ सरकारी बिजली कंपनी NTPC ने महाराष्ट्र के मौदा सुपर थर्मल पावर स्टेशन में प्रस्तावित 400 MWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) परियोजना को लेकर बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने G R Infraprojects Ltd को दिया गया ₹413.37 करोड़ का अनुबंध समाप्त कर दिया है। यह अनुबंध मार्च 2026 में दिया गया था और परियोजना को निर्धारित समय के भीतर पूरा किया जाना था।
NTPC के अनुसार, परियोजना की कुछ महत्वपूर्ण गतिविधियों में लगातार देरी हुई। कंपनी ने ठेकेदार के साथ कई स्तरों पर बातचीत के बाद सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश भी दिए थे। हालांकि, NTPC के मुताबिक अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और परियोजना की प्रगति निर्धारित आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं रही। इसके बाद कंपनी ने अनुबंध समाप्त करने का निर्णय लिया।
अनुबंध समाप्त होने के बाद NTPC ने लगभग ₹91 करोड़ की उपलब्ध परफॉर्मेंस और अन्य प्रतिभूतियां अनुबंध की शर्तों के तहत भुनाने की जानकारी दी है। साथ ही परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। कंपनी का उद्देश्य नए ठेकेदार का चयन कर परियोजना को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना है।
मौदा BESS परियोजना का उद्देश्य बिजली ग्रिड में ऊर्जा भंडारण की क्षमता बढ़ाना है। बैटरी स्टोरेज सिस्टम ऐसी बिजली को बाद में इस्तेमाल करने में मदद कर सकता है जो उत्पादन के समय तुरंत ग्रिड में खपत नहीं होती। विशेष रूप से सौर और पवन ऊर्जा जैसी बदलती उत्पादन वाली नवीकरणीय ऊर्जा के साथ बड़े पैमाने पर स्टोरेज सिस्टम ग्रिड संचालन में उपयोगी हो सकते हैं।
भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ने के साथ ऊर्जा भंडारण की आवश्यकता भी बढ़ रही है। ऐसे में बड़े बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच संतुलन बनाने में भूमिका निभा सकते हैं। मौदा परियोजना भी इसी व्यापक ऊर्जा भंडारण ढांचे का हिस्सा थी।
दूसरी ओर, G R Infraprojects ने सितंबर में अपने एक खुलासे में NTPC के BESS अनुबंध से जुड़े संविदात्मक मुद्दों और अन्य परिस्थितियों का उल्लेख किया था तथा विवाद समाधान प्रक्रिया का सहारा लेने की बात कही थी। दोनों पक्षों के बीच अनुबंध को लेकर अलग-अलग दावे हैं, जबकि NTPC ने परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए पुनः निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है। ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 00:09:00 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>NTPC, Mouda BESS, Battery Energy Storage System, महाराष्ट्र, ऊर्जा भंडारण, बिजली परियोजना, ग्रिड स्टोरेज</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82%, खाद्य कीमतों ने बढ़ाया दबाव</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/अगस्त-में-खुदरा-महंगाई-बढ़कर-482-खाद्य-कीमतों-ने-बढ़ाया-दबाव</link>
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        <description><![CDATA[ नई दिल्ली, 14 सितंबर 2026। भारत में खुदरा महंगाई अगस्त 2026 में बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई। जुलाई में यह 4.45 प्रतिशत थी। केंद्र सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अगस्त का CPI आंकड़ा नए आधार वर्ष 2024 वाली श्रृंखला में अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। अगस्त का आंकड़ा फिलहाल अनंतिम (Provisional) है।
खाद्य महंगाई भी बढ़ी
महंगाई बढ़ने में खाद्य वस्तुओं की कीमतों की अहम भूमिका रही। अगस्त में खाद्य महंगाई 5.95 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में यह 5.52 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 6.13 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 5.64 प्रतिशत दर्ज की गई।
खाद्य टोकरी में कुछ प्रमुख वस्तुओं की कीमतों में सालाना आधार पर तेज वृद्धि दर्ज की गई। प्याज की महंगाई दर अगस्त में 48.27 प्रतिशत और लहसुन की 43.60 प्रतिशत रही। अदरक की महंगाई दर 73.82 प्रतिशत रही, हालांकि जुलाई के 83.57 प्रतिशत की तुलना में इसमें कमी आई।
ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा महंगाई
आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई 5.23 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.31 प्रतिशत दर्ज की गई। जुलाई में ग्रामीण और शहरी महंगाई क्रमशः 4.84 प्रतिशत और 3.96 प्रतिशत थी।
इससे पता चलता है कि अगस्त में कीमतों में बढ़ोतरी का असर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रहा, लेकिन ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए महंगाई दर अधिक रही।
लगातार तीसरे महीने बढ़ी CPI
हालिया आंकड़ों में खुदरा महंगाई में लगातार बढ़ोतरी का रुझान दिखाई दे रहा है। मई 2026 में CPI महंगाई 3.93 प्रतिशत थी, जो जून में 4.38 प्रतिशत, जुलाई में 4.45 प्रतिशत और अगस्त में 4.82 प्रतिशत हो गई।
इस अवधि में खाद्य कीमतों में बदलाव महंगाई के प्रमुख कारकों में रहा। इसके अलावा परिवहन, शिक्षा और अन्य सेवाओं से जुड़े खर्चों में भी सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की गई।
किन क्षेत्रों में बढ़ीं कीमतें
अगस्त के आंकड़ों के अनुसार व्यक्तिगत देखभाल, सामाजिक सुरक्षा और विविध वस्तुओं एवं सेवाओं की श्रेणी में महंगाई 15.17 प्रतिशत रही। रेस्तरां और आवास सेवाओं की श्रेणी में यह 8.38 प्रतिशत दर्ज की गई।
परिवहन से जुड़ी महंगाई 4.60 प्रतिशत और शिक्षा सेवाओं की महंगाई 3.73 प्रतिशत रही। कपड़े और जूते-चप्पल की श्रेणी में महंगाई 3.56 प्रतिशत दर्ज की गई।
आगे के आंकड़ों पर रहेगी नजर
महंगाई के आंकड़े घरेलू खर्च और आर्थिक नीतियों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। आने वाले महीनों में खाद्य कीमतों, ऊर्जा लागत और अन्य वस्तुओं की कीमतों में होने वाले बदलाव पर नजर रहेगी।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2026 के CPI आंकड़े अक्टूबर में जारी किए जाएंगे। इससे यह पता चलेगा कि अगस्त में दर्ज बढ़ोतरी आगे भी जारी रहती है या कीमतों का दबाव कम होता है। ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 23:45:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>खुदरा महंगाई 2026, CPI Inflation August 2026, भारत महंगाई, खाद्य महंगाई, अगस्त CPI, आर्थिक समाचार</media:keywords>
    </item>
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        <title>भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा, Applied Materials करेगी 5 अरब डॉलर का निवेश</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/भारत-में-सेमीकंडक्टर-क्षेत्र-को-बड़ा-बढ़ावा-applied-materials-करेगी-5-अरब-डॉलर-का-निवेश</link>
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        <description><![CDATA[ नई दिल्ली, 17 सितंबर 2026। अमेरिकी सेमीकंडक्टर उपकरण कंपनी Applied Materials ने भारत में अगले 10 वर्षों के दौरान करीब 5 अरब डॉलर निवेश करने की घोषणा की है। कंपनी ने यह ऐलान SEMICON India 2026 के दौरान किया। प्रस्तावित निवेश का फोकस भारत में रिसर्च एंड डेवलपमेंट, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के विस्तार और तकनीकी प्रतिभाओं को विकसित करने पर रहेगा।
140 एकड़ का रिसर्च पार्क प्रस्तावित
कंपनी की योजना भारत में लगभग 140 एकड़ का उन्नत सेमीकंडक्टर रिसर्च पार्क विकसित करने की है। इसमें क्लीनरूम सुविधाएं, इंजीनियरिंग और रिसर्च से जुड़ी सुविधाएं तथा कंपनियों, सप्लायर्स और अन्य संस्थानों के साथ सहयोग के लिए व्यवस्था की जाएगी।
यह पार्क भारत में सेमीकंडक्टर तकनीक के अनुसंधान और उत्पाद विकास को बढ़ाने के उद्देश्य से प्रस्तावित किया गया है। कंपनी ने बताया कि भारत में पहले से मौजूद उसकी इंजीनियरिंग क्षमताओं को भी इस विस्तार से आगे बढ़ाया जाएगा।
सप्लाई चेन क्षमता 10 गुना बढ़ाने का लक्ष्य
Applied Materials ने वर्ष 2035 तक भारत में अपनी सप्लाई चेन क्षमता को 10 गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत भारतीय कंपनियों को वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन से जोड़ने और विदेशी सप्लायर्स को भारत में अपनी गतिविधियां बढ़ाने के अवसर देने की योजना है।
कंपनी के मुताबिक भारत में उसका मौजूदा संचालन पहले से ही हजारों कर्मचारियों को रोजगार देता है। प्रस्तावित योजना में रिसर्च और डेवलपमेंट से जुड़े कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने तथा विश्वविद्यालयों के साथ प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों को विस्तार देने पर भी जोर रहेगा।
SEMICON India में कई निवेश प्रस्ताव
SEMICON India 2026 में सिर्फ Applied Materials ने ही निवेश की घोषणा नहीं की। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री के अनुसार, Semicon 2.0 के तहत करीब 11 से 12 अरब डॉलर के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं।
इन प्रस्तावों में सेमीकंडक्टर उपकरण, सामग्री, गैस, रसायन और सब्सट्रेट जैसे क्षेत्रों से जुड़े निवेश शामिल हैं। इन प्रस्तावों में से कई को अगले दो से तीन वर्षों में आगे बढ़ाने की बात कही गई है, हालांकि कंपनियों की अंतिम मंजूरी अलग-अलग प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी।
भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण पर बढ़ता जोर
सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल मोबाइल फोन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक वाहन, संचार उपकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े सिस्टम समेत कई तकनीकी उत्पादों में होता है। दुनियाभर में AI और कंप्यूटिंग की मांग बढ़ने के साथ चिप और उससे जुड़ी सप्लाई चेन का महत्व भी बढ़ा है।
भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र को विकसित करने के लिए सरकार और निजी कंपनियों की ओर से निवेश योजनाएं सामने आ रही हैं। Applied Materials का नया निवेश मुख्य रूप से उपकरण, रिसर्च, सप्लाई चेन और प्रतिभा विकास से जुड़ा है। कंपनी खुद मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर बनाने वाली चिप कंपनी नहीं, बल्कि चिप निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की प्रमुख निर्माता है।
आगे की दिशा
भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विस्तार के साथ स्थानीय सप्लायर्स, इंजीनियरिंग कंपनियों और तकनीकी संस्थानों के लिए नए अवसर बनने की संभावना है। हालांकि प्रस्तावित निवेश का बड़ा हिस्सा आने वाले वर्षों में लागू होना है, इसलिए इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन परियोजनाओं के आगे बढ़ने के बाद ही किया जा सकेगा।
Applied Materials की घोषणा भारत में सेमीकंडक्टर से जुड़े अनुसंधान, सप्लाई चेन और कौशल विकास को लेकर चल रही गतिविधियों में एक महत्वपूर्ण नया निवेश प्रस्ताव है। ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 23:43:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>Applied Materials India, सेमीकंडक्टर निवेश, SEMICON India 2026, भारत चिप निर्माण, semiconductor research park, India semiconductor</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>उत्तर प्रदेश में महिलाओं की डेयरी से बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था, चार लाख महिलाएं जुड़ीं</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/उत्तर-प्रदेश-में-महिलाओं-की-डेयरी-से-बदली-ग्रामीण-अर्थव्यवस्था-चार-लाख-महिलाएं-जुड़ीं</link>
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        <description><![CDATA[ लखनऊ, 8 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश में महिलाओं की भागीदारी से डेयरी क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। राज्य के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को दूध उत्पादन और उसके संगठित कारोबार से जोड़ने की पहल का असर अब बड़े स्तर पर दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े आंकड़ों के अनुसार करीब 31 जिलों की चार लाख महिलाएं महिला-नेतृत्व वाले डेयरी नेटवर्क का हिस्सा बन चुकी हैं। यह नेटवर्क प्रतिदिन लगभग 12.5 लाख लीटर दूध एकत्र कर रहा है। महिलाओं को मिला रोजगार का नया माध्यम
ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी का काम लंबे समय से परिवारों की आय का हिस्सा रहा है, लेकिन अब इसे महिलाओं के लिए व्यवस्थित रोजगार और उद्यमिता के अवसर के रूप में विकसित किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण आजीविका कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को दूध उत्पादन, संग्रह और बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
इस पहल से महिलाओं को घर के आसपास ही आय का साधन उपलब्ध हो रहा है। इससे उन्हें परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ अपने स्तर पर वित्तीय निर्णय लेने में भी मदद मिल रही है।
73 हजार से अधिक महिलाएं बनीं &#039;लखपति दीदी&#039;
डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का एक महत्वपूर्ण परिणाम यह है कि 73 हजार से अधिक महिलाएं &#039;लखपति दीदी&#039; की श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। इसका मतलब है कि इन महिलाओं ने अपनी आजीविका गतिविधियों के जरिए सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक की आय हासिल करने की दिशा में सफलता पाई है।  डेयरी को संगठित तरीके से बढ़ावा देने से महिलाओं के लिए केवल दूध बेचने तक सीमित अवसर नहीं रह जाते। पशुपालन, दूध संग्रह, स्थानीय बिक्री और संबंधित गतिविधियों में भी आर्थिक अवसर पैदा होते हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा फायदा
डेयरी क्षेत्र की मजबूती का असर केवल महिलाओं की आय तक सीमित नहीं रहता। इससे पशुपालन, चारा, दूध संग्रह, परिवहन और स्थानीय बाजार से जुड़े कई लोगों को भी फायदा मिलता है।
ग्रामीण परिवारों के लिए नियमित दूध उत्पादन आय का अपेक्षाकृत स्थिर स्रोत बन सकता है। इससे खेती पर निर्भरता कम करने और परिवार की कुल आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
स्वयं सहायता समूहों की अहम भूमिका
महिलाओं को डेयरी से जोड़ने में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका महत्वपूर्ण है। समूह के माध्यम से महिलाएं एक-दूसरे से जुड़कर संसाधनों और अनुभवों को साझा करती हैं। इससे छोटे स्तर पर शुरू की गई गतिविधियों को बड़े नेटवर्क से जोड़ने में आसानी होती है।
सरकार की ग्रामीण आजीविका योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को केवल सहायता देना नहीं बल्कि उन्हें स्थायी आय के साधनों से जोड़ना है। डेयरी क्षेत्र में यह मॉडल तेजी से विस्तार करता दिखाई दे रहा है।
आगे और विस्तार की उम्मीद
उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े दूध उत्पादक राज्यों में शामिल है। ऐसे में डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिल सकती है। आने वाले समय में बेहतर पशुपालन तकनीक, दूध की गुणवत्ता, बाजार तक पहुंच और प्रशिक्षण जैसी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाता है तो महिलाओं की आय में और वृद्धि की संभावना है।
महिलाओं के नेतृत्व में विकसित हो रहा यह डेयरी नेटवर्क उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता का नया मॉडल तैयार कर रहा है। चार लाख महिलाओं की भागीदारी और प्रतिदिन 12.5 लाख लीटर दूध संग्रह का आंकड़ा बताता है कि डेयरी अब केवल पारंपरिक पशुपालन नहीं रह गया है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए संगठित आर्थिक गतिविधि का रूप ले रहा है। ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 12:27:00 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>उत्तर प्रदेश डेयरी, महिला सशक्तिकरण, लखपति दीदी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला डेयरी नेटवर्क</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 740.80 अरब डॉलर पर पहुंचा</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/भारत-का-विदेशी-मुद्रा-भंडार-रिकॉर्ड-74080-अरब-डॉलर-पर-पहुंचा</link>
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        <description><![CDATA[ नई दिल्ली, 4 सितंबर 2026 | भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 28 अगस्त 2026 को समाप्त सप्ताह में बढ़कर रिकॉर्ड 740.80 अरब डॉलर पहुंच गया। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, यह लगातार नौवां सप्ताह है जब देश के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी बढ़ोतरी
एक सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 11.47 अरब डॉलर की वृद्धि हुई। इस बढ़ोतरी के बाद भारत का कुल भंडार 740.80 अरब डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां करीब 600.67 अरब डॉलर, जबकि देश का स्वर्ण भंडार करीब 116.41 अरब डॉलर रहा।NRI जमा और डॉलर की आवक बनी प्रमुख वजह
भंडार में इस मजबूत वृद्धि के पीछे विदेशी मुद्रा की बढ़ी हुई आवक को प्रमुख कारण माना जा रहा है। जून में शुरू की गई विशेष योजनाओं के तहत विदेशी मुद्रा जमा और विदेशों से होने वाली उधारी को बढ़ावा मिला। इन योजनाओं के माध्यम से बड़ी मात्रा में डॉलर भारत में आए, जिससे बैंकिंग प्रणाली और देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिली।रुपये को मिल सकता है सहारा
विदेशी मुद्रा भंडार का रिकॉर्ड स्तर भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बड़े विदेशी मुद्रा भंडार से जरूरत पड़ने पर भारतीय रिजर्व बैंक को रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने और बाहरी आर्थिक दबावों से निपटने में मदद मिल सकती है। इस दौरान रुपये में भी डॉलर के मुकाबले लगभग 0.3% की मजबूती दर्ज की गई। ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 20:10:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>भारत विदेशी मुद्रा भंडार, Forex Reserves India, RBI, 740.80 अरब डॉलर, रुपये की मजबूती, भारतीय अर्थव्यवस्था</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>प्रधानमंत्री मोदी ने की नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा की समीक्षा</title>
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        <description><![CDATA[ नई दिल्ली, 29 अगस्त 2026। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बीच भारत सरकार ने वहां फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और राहत कार्यों की स्थिति की समीक्षा तेज कर दी है। नेपाल के प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक, पर्यटक और तीर्थयात्री मौजूद थे, जिसके कारण भारत के लिए उनकी सुरक्षित निकासी और परिजनों तक सही जानकारी पहुंचाना प्राथमिकता बन गया है।
भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने पर जोर
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई इलाकों में संपर्क व्यवस्था प्रभावित हुई है। सड़कें क्षतिग्रस्त होने और कुछ क्षेत्रों में मोबाइल तथा इंटरनेट सेवाओं में बाधा के कारण लोगों से संपर्क करने में परेशानी आ रही है।
भारत सरकार ने नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिकों की स्थिति की जानकारी जुटाने के लिए नेपाली प्रशासन और भारतीय मिशन के साथ समन्वय बढ़ाया है। जिन लोगों का संपर्क अपने परिवारों से टूट गया है, उनकी जानकारी अलग-अलग माध्यमों से जुटाई जा रही है।
तीर्थयात्रियों पर विशेष ध्यान
नेपाल में भारतीय नागरिकों की संख्या अधिक होने का एक कारण धार्मिक और पर्यटन यात्राएं भी हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा, पशुपतिनाथ मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले कई भारतीय नागरिक नेपाल के रास्ते से आते-जाते हैं।
आपदा के दौरान ऐसे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर परिवारों में चिंता बढ़ गई। सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद भारतीय नागरिकों को स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।
राहत और बचाव अभियान जारी
नेपाल में नेपाली सेना, पुलिस और स्थानीय राहत दल प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटे हुए हैं। कई स्थानों पर सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत दलों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है।
जहां सड़क मार्ग से पहुंचना संभव नहीं है, वहां वैकल्पिक माध्यमों से लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। भोजन, पानी, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान प्रभावित लोगों तक पहुंचाना राहत अभियान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
भारत की ओर से लगातार समन्वय
भारत और नेपाल के बीच भौगोलिक और सामाजिक संबंधों को देखते हुए दोनों देशों के अधिकारियों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है। भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ नेपाल के राहत प्रयासों में भी सहयोग कर रहा है।
आपदा के बाद भारत की ओर से राहत सामग्री उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए हैं। जरूरत के अनुसार आगे भी सहायता भेजे जाने की संभावना है।
परिवारों को सही जानकारी देने की चुनौती
ऐसी आपदा के दौरान सोशल मीडिया पर कई तरह की अपुष्ट सूचनाएं तेजी से फैलती हैं। इससे प्रभावित लोगों के परिवारों में चिंता और बढ़ सकती है।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक माध्यमों से प्राप्त जानकारी पर भरोसा करें। लापता लोगों के बारे में सही जानकारी जुटाने में समय लग सकता है, क्योंकि कई प्रभावित क्षेत्र अभी भी राहत टीमों की पहुंच से बाहर हैं।
सीमा क्षेत्रों में भी निगरानी
नेपाल से सटे भारतीय राज्यों में भी प्रशासन को सतर्क किया गया है। सीमा क्षेत्रों में आने-जाने वाले लोगों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। नेपाल से भारत लौटने वाले भारतीय नागरिकों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए संबंधित एजेंसियां समन्वय कर रही हैं।
सीमा पर प्राकृतिक आपदा के कारण यातायात और आवागमन प्रभावित होने की स्थिति में लोगों को वैकल्पिक रास्तों और सुरक्षित मार्गों की जानकारी उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है।
आपदा ने बढ़ाई क्षेत्रीय तैयारी की जरूरत
नेपाल की हालिया प्राकृतिक आपदा ने हिमालयी क्षेत्र में आपदा प्रबंधन की चुनौतियों को एक बार फिर सामने ला दिया है। पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़, भूस्खलन और तेज बारिश के कारण लोगों को सुरक्षित निकालना मैदानी इलाकों की तुलना में काफी कठिन होता है।
भारत और नेपाल दोनों के लिए भविष्य में सीमा पार आपदा चेतावनी और सूचना साझा करने की व्यवस्था को और मजबूत करना उपयोगी हो सकता है।
आगे भी जारी रहेगा राहत अभियान
फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जिन लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है, उनकी जानकारी जुटाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
भारत सरकार की प्राथमिकता अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के साथ-साथ नेपाल के राहत प्रयासों में आवश्यक सहयोग देना है। स्थिति सामान्य होने तक दोनों देशों के अधिकारियों के बीच समन्वय जारी रहने की उम्मीद है। ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 16:25:25 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>नेपाल बाढ़, भारतीय नागरिक, पीएम मोदी, नेपाल में भारतीय, राहत बचाव, भारतीय तीर्थयात्री</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत में डिजिटल भुगतान का नया रिकॉर्ड, UPI लेनदेन में लगातार तेजी</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/भारत-में-डिजिटल-भुगतान-का-नया-रिकॉर्ड-upi-लेनदेन-में-लगातार-तेजी</link>
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        <description><![CDATA[ नई दिल्ली, 28 अगस्त 2026। भारत में डिजिटल भुगतान का विस्तार लगातार जारी है और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) देश के डिजिटल लेनदेन का सबसे प्रमुख माध्यम बना हुआ है। अगस्त महीने में भी UPI के जरिए होने वाले भुगतान में मजबूत गतिविधि देखने को मिली है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबार तक, QR कोड और मोबाइल आधारित भुगतान का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।
छोटे भुगतान से लेकर बड़े कारोबार तक UPI का विस्तार
UPI की शुरुआत के बाद भारत में डिजिटल भुगतान के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां नकद भुगतान रोजमर्रा की खरीदारी का मुख्य माध्यम था, वहीं अब चाय की दुकान, सब्जी विक्रेता, किराना स्टोर, पेट्रोल पंप और बड़े शॉपिंग सेंटर तक UPI भुगतान स्वीकार कर रहे हैं।
मोबाइल फोन और इंटरनेट की उपलब्धता बढ़ने के साथ डिजिटल भुगतान ग्रामीण और छोटे शहरों तक भी तेजी से पहुंचा है। अब ग्राहक बैंक खाते से सीधे दूसरे व्यक्ति या व्यापारी को कुछ ही सेकंड में पैसे भेज सकता है।
QR कोड बना सबसे आसान माध्यम
UPI के विस्तार में QR कोड की बड़ी भूमिका रही है। व्यापारी को केवल QR कोड प्रदर्शित करना होता है और ग्राहक अपने मोबाइल से उसे स्कैन करके भुगतान कर सकता है।
इस व्यवस्था ने छोटे व्यापारियों के लिए डिजिटल भुगतान को काफी आसान बनाया है। उन्हें अलग से कार्ड मशीन रखने की जरूरत नहीं पड़ती और ग्राहक भी नकदी रखने की आवश्यकता कम महसूस करता है।
बैंकिंग व्यवस्था में भी बदलाव
UPI के बढ़ते इस्तेमाल से बैंकिंग सेवाओं में भी बदलाव आया है। ग्राहक अब पैसे भेजने, बिल भुगतान करने, मोबाइल रिचार्ज और ऑनलाइन खरीदारी जैसे काम सीधे मोबाइल ऐप के माध्यम से कर सकता है।
इससे बैंक शाखाओं पर छोटे-छोटे लेनदेन का दबाव कम करने में भी मदद मिली है। डिजिटल भुगतान के कारण लेनदेन का रिकॉर्ड भी इलेक्ट्रॉनिक रूप में उपलब्ध रहता है।
छोटे कारोबारियों को फायदा
डिजिटल भुगतान से छोटे कारोबारियों को भी कई फायदे मिलते हैं। भुगतान सीधे बैंक खाते में पहुंचने से नकदी संभालने की जरूरत कम होती है। इससे रोजाना के कारोबार का हिसाब रखना भी आसान हो सकता है।
कई छोटे दुकानदार अब ग्राहकों को UPI के जरिए भुगतान करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। खासकर ऐसे स्थानों पर जहां छोटे मूल्य के भुगतान अधिक होते हैं, वहां UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ी पहुंच
UPI का इस्तेमाल केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहा है। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्टफोन और इंटरनेट की पहुंच बढ़ने के साथ डिजिटल भुगतान का उपयोग भी बढ़ा है।
सरकार और बैंकिंग संस्थानों की ओर से डिजिटल वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के प्रयासों से भी लोगों को मोबाइल भुगतान के बारे में जानकारी मिली है।
हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल जागरूकता और साइबर सुरक्षा जैसी चुनौतियां मौजूद हैं। इन क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान के विस्तार के लिए विश्वसनीय नेटवर्क और जागरूकता दोनों जरूरी हैं।
साइबर सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता
डिजिटल भुगतान के बढ़ने के साथ साइबर धोखाधड़ी से बचाव भी महत्वपूर्ण हो गया है। विशेषज्ञ लगातार लोगों को सलाह देते हैं कि UPI PIN किसी के साथ साझा न करें और किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयर या संदिग्ध लिंक का इस्तेमाल न करें।
यह समझना जरूरी है कि UPI PIN पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि भुगतान को अधिकृत करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति द्वारा PIN मांगने पर उसे साझा नहीं करना चाहिए।
बैंक और भुगतान कंपनियां भी लगातार सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और संदिग्ध लेनदेन की पहचान करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं।
भारत के डिजिटल अर्थतंत्र के लिए महत्वपूर्ण
UPI का विस्तार भारत के डिजिटल अर्थतंत्र की मजबूती का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। डिजिटल भुगतान से कारोबार के लेनदेन अधिक व्यवस्थित हो सकते हैं और औपचारिक वित्तीय व्यवस्था में लोगों की भागीदारी बढ़ सकती है।
इसके अलावा UPI की सफलता ने भारत को वैश्विक डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में स्थापित किया है। कई अन्य देशों में भी भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली में रुचि दिखाई गई है।
आगे और बढ़ने की संभावना
आने वाले समय में UPI का इस्तेमाल केवल घरेलू भुगतान तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। सीमा पार भुगतान, छोटे कारोबारियों के लिए नए डिजिटल वित्तीय उत्पाद और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर UPI जैसी प्रणालियों के विस्तार से डिजिटल भुगतान का दायरा और बढ़ सकता है।
हालांकि इसके साथ साइबर सुरक्षा, डेटा सुरक्षा और डिजिटल साक्षरता पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।
भारत में UPI का बढ़ता इस्तेमाल यह दिखाता है कि डिजिटल भुगतान अब केवल शहरी और तकनीकी उपयोगकर्ताओं तक सीमित नहीं है। रोजमर्रा के छोटे-बड़े लेनदेन में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है और यह देश की वित्तीय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव बन चुका है। ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 14:22:49 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>UPI, डिजिटल भुगतान, भारत डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन पेमेंट, QR भुगतान, डिजिटल इंडिया</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने बनाया नया रिकॉर्ड, 729.33 अरब डॉलर के पार</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/भारत-के-विदेशी-मुद्रा-भंडार-ने-बनाया-नया-रिकॉर्ड-72933-अरब-डॉलर-के-पार</link>
        <guid>https://dhakarsamachar.in/भारत-के-विदेशी-मुद्रा-भंडार-ने-बनाया-नया-रिकॉर्ड-72933-अरब-डॉलर-के-पार</guid>
        <description><![CDATA[ नई दिल्ली, 28 अगस्त 2026। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 21 अगस्त को समाप्त सप्ताह में बढ़कर 729.33 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, एक सप्ताह में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 12.42 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। यह भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।एक सप्ताह में 12.42 अरब डॉलर की बढ़ोतरी
आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक 21 अगस्त को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में 12.42 अरब डॉलर की वृद्धि हुई। इससे कुल भंडार 729.33 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
इस बढ़ोतरी में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों का सबसे बड़ा योगदान रहा। सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में लगभग 9.5 अरब डॉलर की वृद्धि हुई। इसके अलावा सोने के भंडार के मूल्य में भी करीब 2.8 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। विदेशी मुद्रा भंडार में क्या-क्या शामिल है?
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार केवल अमेरिकी डॉलर के रूप में रखा पैसा नहीं होता। इसमें विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, सोना, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत की विशेष आहरण अधिकार यानी SDR और रिजर्व ट्रांच पोजिशन भी शामिल होती हैं।
21 अगस्त तक भारत के कुल भंडार में करीब 591.3 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, 114.2 अरब डॉलर का सोना, 18.9 अरब डॉलर के SDR और लगभग 4.9 अरब डॉलर की IMF रिजर्व ट्रांच पोजिशन शामिल थी।विदेशी निवेश और एनआरआई जमा से मिला सहारा
विदेशी मुद्रा भंडार में इस तेज बढ़ोतरी के पीछे विदेशी पूंजी प्रवाह को प्रमुख कारणों में माना जा रहा है। जून में आरबीआई ने विदेशों से होने वाली उधारी और विदेशी मुद्रा जमा से जुड़े कुछ नियमों में बदलाव किए थे। इसके तहत कुछ विदेशी मुद्रा लेनदेन और हेजिंग सुविधाओं को अधिक आकर्षक बनाया गया था।
इन उपायों के बाद देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ा। रिपोर्ट के अनुसार 5 जून से 21 अगस्त के बीच आरबीआई से जुड़े इन प्रोत्साहनों के माध्यम से करीब 73 अरब डॉलर का प्रवाह हुआ, जिसमें लगभग 65 अरब डॉलर एनआरआई जमा से आया।रुपये और अर्थव्यवस्था के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रिकॉर्ड?
विदेशी मुद्रा भंडार किसी देश की बाहरी आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण संकेतक होता है। पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार होने से देश को आयात भुगतान, वैश्विक आर्थिक संकट और मुद्रा बाजार में अचानक आने वाले दबावों से निपटने में मदद मिलती है।
भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए यह भंडार विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनरी और कई अन्य आवश्यक वस्तुओं के आयात के लिए विदेशी मुद्रा की जरूरत होती है। मजबूत भंडार होने से अंतरराष्ट्रीय भुगतान क्षमता बेहतर बनी रहती है।
इसके अलावा जब वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ती है और किसी देश की मुद्रा पर दबाव आता है, तब केंद्रीय बैंक के पास बाजार में हस्तक्षेप करने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा उपलब्ध रहती है।
आरबीआई ने एक सुविधा समय से पहले बंद की
विदेशी मुद्रा के बड़े प्रवाह को देखते हुए आरबीआई ने अपनी एक विदेशी मुद्रा जमा संबंधी हेजिंग सुविधा को निर्धारित समय से करीब एक महीने पहले बंद करने का फैसला किया। इसका कारण यह बताया गया कि इस सुविधा के जरिए अपेक्षा से काफी अधिक विदेशी मुद्रा देश में आ गई थी। इससे संकेत मिलता है कि विदेशी पूंजी का प्रवाह इतना मजबूत रहा कि केंद्रीय बैंक को संबंधित सुविधा को निर्धारित अवधि से पहले ही समाप्त करना पड़ा।
सोने के भंडार का भी बढ़ा योगदान
विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का योगदान भी लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है। 21 अगस्त तक भारत के स्वर्ण भंडार का मूल्य करीब 114.2 अरब डॉलर बताया गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में बदलाव का असर भी भारत के स्वर्ण भंडार के डॉलर मूल्य पर पड़ता है। इसलिए सोने के मूल्य में बढ़ोतरी होने पर कुल विदेशी मुद्रा भंडार में भी वृद्धि दिखाई दे सकती है।
बाहरी क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत
अर्थशास्त्रियों के अनुसार विदेशी मुद्रा भंडार का रिकॉर्ड स्तर भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे देश की आयात भुगतान क्षमता मजबूत होती है और वैश्विक निवेशकों के बीच भी भारत की वित्तीय स्थिरता को लेकर भरोसा बढ़ सकता है।
हालांकि, विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि का अर्थ यह नहीं है कि अर्थव्यवस्था की सभी चुनौतियां समाप्त हो गई हैं। वैश्विक व्यापार, तेल की कीमतें, विदेशी निवेश, रुपये की विनिमय दर और अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियां आगे भी भारत के बाहरी क्षेत्र को प्रभावित करती रहेंगी।
फिलहाल 729.33 अरब डॉलर का रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार भारत के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक उपलब्धि है। लगातार बढ़ता भंडार देश को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए अतिरिक्त वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 04:59:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>भारत विदेशी मुद्रा भंडार, RBI, Forex Reserves, 729.33 अरब डॉलर, भारतीय अर्थव्यवस्था, विदेशी मुद्रा</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत ने कच्ची चीनी के 10 लाख टन शुल्क&amp;मुक्त आयात को दी मंजूरी</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/भारत-ने-कच्ची-चीनी-के-10-लाख-टन-शुल्क-मुक्त-आयात-को-दी-मंजूरी</link>
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        <description><![CDATA[ नई दिल्ली, 20 अगस्त 2026। केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी सूचना के अनुसार यह फैसला उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों से राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है।

बढ़ती कीमतों के बीच सरकार का फैसलादेश में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के आसपास पहुंचने के बाद सरकार ने बाजार में आपूर्ति बढ़ाने का निर्णय लिया है। सरकार को उम्मीद है कि शुल्क-मुक्त आयात से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा।

त्योहारी मांग को देखते हुए कदम

आने वाले महीनों में त्योहारों के कारण चीनी की मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे समय में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना सरकार और चीनी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है। आयात की अनुमति से घरेलू आपूर्ति में कमी को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

इससे पहले सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी के स्टॉक पर भी सीमा लगाई थी। इन दोनों कदमों का उद्देश्य जमाखोरीको रोकना और बाजार में नियमित आपूर्ति बनाए रखना है।

उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद

सरकार के इस फैसले के बाद बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। यदि आयातित चीनी समय पर घरेलू बाजार में पहुंचती है, तो आने वाले समय में कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 15:51:48 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>चीनी आयात, कच्ची चीनी, चीनी के दाम, केंद्र सरकार, महंगाई, भारत समाचार</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>रुपये में निर्यात भुगतान पर भारत का बड़ा फैसला</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/रुपये-में-निर्यात-भुगतान-पर-भारत-का-बड़ा-फैसला</link>
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        <description><![CDATA[ भारत ने रुपये में निर्यात भुगतान को लेकर नियमों में दी बड़ी राहत

नई दिल्ली, 20 अगस्त 2026। भारत सरकार ने रुपये में होने वाले निर्यात भुगतानों को लेकर व्यापार नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नए बदलाव के तहत रुपये में प्राप्त निर्यात भुगतान को विदेशी मुद्रा में प्राप्त भुगतान के बराबर माना जाएगा, जिससे निर्यातकों को व्यापार नीति से मिलने वाले लाभों का फायदा उठाने में आसानी होगी।

रुपये के अंतरराष्ट्रीय इस्तेमाल को बढ़ावा देने की कोशिश

सरकार का यह कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारतीय रुपये की भूमिका बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब निर्यातकों को विदेशी मुद्रा के बजाय रुपये में भुगतान स्वीकार करने पर भी व्यापार से जुड़े प्रोत्साहनों में समानता मिलेगी। इससे भारत के व्यापारिक साझेदारों के साथ रुपये में लेन-देन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

विदेशी मुद्रा पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम

भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुपये के इस्तेमाल को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। नए नियमों से निर्यातकों और विदेशी व्यापार साझेदारों के लिए रुपये में व्यापार करना अधिक आकर्षक हो सकता है। इससे अमेरिकी डॉलर जैसी विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है।विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अधिक देश और कारोबारी भारतीय रुपये में व्यापारिक भुगतान स्वीकार करते हैं, तो इससे रुपये के अंतरराष्ट्रीय उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही भारतीय कंपनियों के लिए सीमा पार व्यापार में भुगतान के विकल्प भी बढ़ेंगे।

निर्यातकों को मिल सकता है फायदा

नए नियमों से उन भारतीय निर्यातकों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है जो ऐसे देशों के साथ व्यापार करते हैं जहां रुपये में भुगतान की व्यवस्था संभव है। सरकार की कोशिश है कि व्यापारिक प्रक्रियाओं को आसान बनाया जाए और भारतीय मुद्रा को वैश्विक व्यापार में अधिक स्वीकार्य बनाया जाए।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत अपने निर्यात को बढ़ाने और वैश्विक व्यापार में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करने पर जोर दे रहा है। ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 15:41:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>भारतीय रुपया, निर्यात भुगतान, भारत व्यापार, रुपये में व्यापार, निर्यात नियम 2026</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>प्रधानमंत्री ने ‘विकसित भारत 2047’ के लिए युवाओं को दिया नवाचार का मंत्र</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/प्रधानमंत्री-ने-विकसित-भारत-2047-के-लिए-युवाओं-को-दिया-नवाचार-का-मंत्र</link>
        <guid>https://dhakarsamachar.in/प्रधानमंत्री-ने-विकसित-भारत-2047-के-लिए-युवाओं-को-दिया-नवाचार-का-मंत्र</guid>
        <description><![CDATA[ नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के अगले दिन प्रधानमंत्री ने ‘विकसित भारत 2047’ अभियान को आगे बढ़ाते हुए देश के युवाओं से नवाचार और तकनीकी विकास में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि आने वाले दो दशकों में भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने में युवाओं की सबसे बड़ी भूमिका होगी।

प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर निर्माण, डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों को भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों से उद्योगों के साथ मिलकर शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने का आह्वान किया। सरकार का उद्देश्य रोजगार सृजन के साथ आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक आधारित उद्यमिता, अनुसंधान और डिजिटल अवसंरचना पर बढ़ता निवेश भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगा। ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 06:59:24 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>विकसित भारत 2047, प्रधानमंत्री, युवा, स्टार्टअप, Innovation, भारत समाचार</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति ने देशवासियों को एकता और विकास का संदेश दिया</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/स्वतंत्रता-दिवस-पर-राष्ट्रपति-ने-देशवासियों-को-एकता-और-विकास-का-संदेश-दिया</link>
        <guid>https://dhakarsamachar.in/स्वतंत्रता-दिवस-पर-राष्ट्रपति-ने-देशवासियों-को-एकता-और-विकास-का-संदेश-दिया</guid>
        <description><![CDATA[ नई दिल्ली। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में देशवासियों को एकता, संविधान और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता और युवा आबादी है, जो देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

राष्ट्रपति ने शिक्षा, डिजिटल नवाचार, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत जैसे विषयों पर विशेष जोर देते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में भारत को ज्ञान और तकनीक आधारित वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने सैनिकों, किसानों, वैज्ञानिकों और युवाओं के योगदान की सराहना करते हुए सभी नागरिकों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

देशभर में स्वतंत्रता दिवस समारोह उत्साहपूर्वक मनाए गए, जहां सरकारी संस्थानों, विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में ध्वजारोहण तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 06:57:46 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>स्वतंत्रता दिवस 2026, राष्ट्रपति भाषण, राष्ट्र के नाम संदेश, भारत समाचार</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>रक्षा मंत्रालय ने स्वदेशी रक्षा उपकरणों की नई खरीद को दी मंजूरी</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/रक्षा-मंत्रालय-ने-स्वदेशी-रक्षा-उपकरणों-की-नई-खरीद-को-दी-मंजूरी</link>
        <guid>https://dhakarsamachar.in/रक्षा-मंत्रालय-ने-स्वदेशी-रक्षा-उपकरणों-की-नई-खरीद-को-दी-मंजूरी</guid>
        <description><![CDATA[ नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से स्वदेशी रक्षा उपकरणों की नई खरीद को मंजूरी प्रदान की है। इस निर्णय के तहत देश में विकसित आधुनिक ड्रोन, संचार प्रणाली, निगरानी उपकरण और अन्य सैन्य तकनीकों की खरीद को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का कहना है कि यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को मजबूत करेगी तथा रक्षा उत्पादन में घरेलू कंपनियों की भागीदारी बढ़ाएगी।

रक्षा अधिकारियों के अनुसार स्वदेशी तकनीक अपनाने से आयात पर निर्भरता कम होगी और सेना को आधुनिक उपकरण तेज़ी से उपलब्ध हो सकेंगे। साथ ही इससे देश के रक्षा उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप क्षेत्र को भी प्रोत्साहन मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 06:56:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>रक्षा मंत्रालय, भारतीय सेना, स्वदेशी हथियार, रक्षा समाचार 2026</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>SBI का पहली तिमाही मुनाफा 13% बढ़ा</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/SBI-का-पहली-तिमाही-मुनाफा-13-बढ़ा</link>
        <guid>https://dhakarsamachar.in/SBI-का-पहली-तिमाही-मुनाफा-13-बढ़ा</guid>
        <description><![CDATA[ भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने वित्त वर्ष 2026–27 की पहली तिमाही (अप्रैल–जून) के नतीजे जारी किए। बैंक का शुद्ध लाभ (Net Profit) बढ़कर ₹21,121 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹19,160 करोड़ से लगभग 10% अधिक है। यह परिणाम बाजार के अनुमान से भी बेहतर रहा। 
The Economic Times
+1

नोट: कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में 13% लिखा गया है, लेकिन आधिकारिक Q1 FY27 परिणामों के अनुसार वृद्धि लगभग 10.2% है। 
Reuters
+1

SBI के प्रमुख आंकड़े

सूचक

	

Q1 FY27

	

YoY बदलाव




शुद्ध लाभ

	

₹21,121 करोड़

	

+10.2%




ब्याज आय (NII)

	

₹46,992 करोड़

	

+15%




सकल NPA

	

1.47%

	

घटा




शुद्ध NPA

	

0.38%

	

घटा

Reuters
+1
मुनाफा बढ़ने की वजह

SBI के बेहतर नतीजों के पीछे मुख्य कारण रहे:

होम, गोल्ड और बिज़नेस लोन में मजबूत बढ़ोतरी

नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में लगभग 15% की वृद्धि

खराब ऋण (NPA) में लगातार सुधार

डिजिटल बैंकिंग और रिटेल लोन से आय में मजबूती

Reuters
+1
ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?

SBI की वित्तीय स्थिति और मजबूत हुई है।

बैंक की लोन देने की क्षमता बढ़ेगी।

फिलहाल होम लोन या FD की ब्याज दरों में इस नतीजे से कोई तत्काल बदलाव नहीं होगा।

मजबूत नतीजों के बाद SBI के शेयर में शुरुआती कारोबार में तेजी देखी गई। ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 09:44:53 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>बिजनेस न्यूज़, भारत, अर्थव्यवस्था</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत की आर्थिक वृद्धि दर पर दबाव, ऊंची तेल कीमतों और कमजोर निवेश से बढ़ी चिंता</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/india-economic-growth-forecast-oil-prices-investment-2026</link>
        <guid>https://dhakarsamachar.in/india-economic-growth-forecast-oil-prices-investment-2026</guid>
        <description><![CDATA[ नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर जारी नवीनतम आर्थिक आकलनों में संकेत मिले हैं कि चालू वित्तीय वर्ष के दौरान आर्थिक वृद्धि दर पर दबाव बना रह सकता है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, निजी निवेश में अपेक्षित तेजी का अभाव और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अनिश्चितताएं भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख चुनौतियों के रूप में सामने आ रही हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग और सरकारी पूंजीगत व्यय अर्थव्यवस्था को सहारा दे सकते हैं।

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का सीधा असर आयात बिल पर पड़ता है। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ती है, जिससे वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। इसका प्रभाव महंगाई दर और उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति पर भी दिखाई दे सकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निजी क्षेत्र का निवेश अभी उम्मीद के अनुरूप गति नहीं पकड़ पाया है। उद्योग जगत नई परियोजनाओं में निवेश को लेकर सतर्क बना हुआ है। यदि निवेश की रफ्तार धीमी रहती है, तो रोजगार सृजन और औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि भी प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि आर्थिक विशेषज्ञ निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियों को महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

हालांकि अर्थव्यवस्था के कई सकारात्मक संकेत भी सामने आ रहे हैं। सरकार द्वारा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर लगातार खर्च किया जा रहा है, जिससे निर्माण, परिवहन और संबंधित क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिल रही है। डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार, सेवा क्षेत्र की मजबूती और घरेलू उपभोग भी भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में स्थिरता आती है और निजी निवेश में सुधार होता है, तो आर्थिक वृद्धि की रफ्तार फिर से मजबूत हो सकती है। साथ ही, मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और स्थिर वित्तीय नीतियां भी विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। हालांकि बदलते वैश्विक आर्थिक हालात, भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता को देखते हुए आने वाले महीनों में आर्थिक नीतियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी।

सरकार ने भी कई अवसरों पर भरोसा जताया है कि मजबूत बुनियादी ढांचा, विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने वाली योजनाएं, डिजिटल नवाचार और घरेलू मांग देश की आर्थिक प्रगति को आगे बढ़ाते रहेंगे। ऐसे में आने वाले महीनों के आर्थिक आंकड़े यह तय करेंगे कि भारत की विकास दर अनुमान के अनुरूप रहती है या उसमें और बदलाव देखने को मिलता है।

Key Highlights
ऊंची वैश्विक तेल कीमतों से भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव।
निजी निवेश में सुस्ती को लेकर चिंता।
महंगाई और आयात बिल बढ़ने की आशंका।
सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से अर्थव्यवस्था को सहारा।
विशेषज्ञों ने दीर्घकालिक सुधार की संभावना जताई। ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 18:15:41 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>ऊंची वैश्विक तेल कीमतों और निजी निवेश में सुस्ती के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि दर पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है। जानिए पूरी रिपोर्ट।</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>IMF ने जताई चिंता, तेल की बढ़ती कीमतें और कमजोर मानसून भारत की आर्थिक वृद्धि पर डाल सकते हैं असर</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/imf-india-growth-risk-oil-prices-weak-monsoon-fy27--Focus-Keyword:</link>
        <guid>https://dhakarsamachar.in/imf-india-growth-risk-oil-prices-weak-monsoon-fy27--Focus-Keyword:</guid>
        <description><![CDATA[ नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। IMF के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतें और सामान्य से कमजोर मानसून वित्त वर्ष 2026-27 में देश की आर्थिक वृद्धि के लिए सबसे बड़े जोखिम साबित हो सकते हैं।

IMF का कहना है कि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका सीधा असर महंगाई, उत्पादन लागत और आर्थिक विकास पर पड़ सकता है। वहीं, कमजोर मानसून का प्रभाव कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग पर भी देखने को मिल सकता है।

रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.4% रखा गया है। हालांकि, IMF का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहीं और मानसून में सुधार हुआ, तो आने वाले वर्षों में आर्थिक गतिविधियों में तेजी देखने को मिल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के लिए महंगाई पर नियंत्रण, ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना और कृषि क्षेत्र को समर्थन देना आने वाले महीनों में अहम रहेगा। आर्थिक जानकारों के अनुसार, वैश्विक बाजार और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि दोनों कारक भारत की विकास दर को प्रभावित कर सकते हैं। ]]></description>
        <enclosure url="http://dhakarsamachar.in/uploads/images/202607/image_870x580_6a5cd52c5d6b4.jpg" length="106129" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 08:32:33 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कहा है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और कमजोर मानसून वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए सबसे बड़े जोखिम बन सकते हैं।</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>मंत्री ने छात्रों से बातचीत का दिया भरोसा, &amp;apos;कॉकरोच मूवमेंट&amp;apos; नेताओं ने किया दावा</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/mantri-ne-chatron-se-baatcheet-ka-diya-bharosa-cockroach-movement-netaon-ka-dava</link>
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        <description><![CDATA[ मंत्री ने छात्रों से बातचीत का दिया भरोसा, &#039;कॉकरोच मूवमेंट&#039; नेताओं ने किया दावा

छात्रों के जारी आंदोलन के बीच &#039;कॉकरोच मूवमेंट&#039; के नेताओं ने दावा किया है कि संबंधित मंत्री ने छात्रों की समस्याओं पर बातचीत करने का भरोसा दिया है। आंदोलन से जुड़े नेताओं के अनुसार, छात्रों की विभिन्न मांगों को लेकर जल्द ही औपचारिक बैठक आयोजित की जा सकती है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं और अब सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत मिले हैं। उनका दावा है कि मंत्री ने छात्रों की बात गंभीरता से सुनने और समाधान निकालने का आश्वासन दिया है।

हालांकि, मंत्री की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि या बैठक की तारीख को लेकर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में सभी की नजरें संभावित वार्ता और उसके परिणाम पर टिकी हुई हैं।

छात्र नेताओं ने कहा कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन की आगामी रणनीति पर विचार जारी रहेगा। यदि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत होती है, तो इससे गतिरोध समाप्त होने की संभावना बढ़ सकती है। ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 08:18:47 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>कॉकरोच मूवमेंट, मंत्री-छात्र बातचीत, छात्र आंदोलन</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>VDA और IIT BHU के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता, 115 कॉलेजों में छात्रों को सिखाया जाएगा &amp;apos;शहरी नियोजन&amp;apos; का पाठ</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/vda-iit-bhu-mou-urban-planning-varanasi-colleges</link>
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        <description><![CDATA[ वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) यानी IIT BHU के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य काशी और आसपास के क्षेत्रों को सुव्यवस्थित, टिकाऊ (Sustainable) और आधुनिक मानकों के अनुरूप विकसित करना है। इस पहल के तहत क्षेत्र के 115 से अधिक कॉलेजों के युवाओं को शहरी नियोजन (Urban Planning) और स्मार्ट सिटी विकास से जोड़ा जाएगा।
युवाओं को अर्बन प्लानिंग से जोड़ने की अनोखी पहल
इस एमओयू के तहत VDA और IIT BHU मिलकर एक विशेष जागरूकता व प्रशिक्षण अभियान चलाएंगे। पूर्वांचल के लगभग 115 डिग्री और तकनीकी कॉलेजों में कार्यशालाओं (Workshops), सेमिनार और इंटरैक्टिव सत्रों का आयोजन किया जाएगा।
छात्रों को मिलेगी व्यावहारिक सीख: छात्रों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि ट्रैफिक मैनेजमेंट, जीआईएस (GIS) मैपिंग, ग्रीन बिल्डिंग तकनीक और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे व्यावहारिक विषयों की जानकारी दी जाएगी।
भविष्य के प्लानर्स तैयार करना: इसका मकसद युवाओं में शहर के विकास के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाना और उन्हें अर्बन डेवलपमेंट के नए कॉन्सेप्ट्स से अवगत कराना है।
काशी के विकास को मिलेगी नई गति
VDA अधिकारियों के अनुसार, IIT BHU के विशेषज्ञ शोधकर्ताओं और प्रोफेसरों की तकनीकी दक्षता का उपयोग वाराणसी के मास्टर प्लान को बेहतर ढंग से लागू करने में किया जाएगा।
प्रमुख बिंदु:
स्मार्ट और टिकाऊ विकास: IIT BHU की तकनीकी टीम वाराणसी के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में VDA का मार्गदर्शन करेगी।
इंटर्नशिप के अवसर: इस पहल के तहत चुनिंदा मेधावी छात्रों को VDA की लाइव अर्बन प्लानिंग परियोजनाओं में इंटर्नशिप और काम करने का मौका भी मिल सकता है। ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 18:11:52 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>वाराणसी शहरी नियोजन (Varanasi Urban Planning), वीडीए वाराणसी खबर (VDA Varanasi News), IIT BHU अर्बन प्लानिंग (IIT BHU Urban Planning)</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>ए.आर. रहमान, हंस जिमर और कुमार विश्वास की त्रिवेणी: त्रेता युग की अलौकिक अनुभूति कराएगा &amp;apos;Ramayana&amp;apos; का यह नया गीत</title>
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        <description><![CDATA[ नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही महाकाव्य फिल्म &#039;रामायण&#039; अपनी घोषणा के बाद से ही सुर्खियों में है। लेकिन अब इसके संगीत को लेकर जो अपडेट आया है, उसने देश-दुनिया के दर्शकों की उत्सुकता को चरम पर पहुंचा दिया है। भारतीय संगीत के जादूगर ए.आर. रहमान, हॉलीवुड के दिग्गज हंस जिमर और अपनी ओजस्वी वाणी व लेखनी के लिए मशहूर डॉ. कुमार विश्वास की तिकड़ी मिलकर एक ऐसा अलौकिक गीत तैयार कर रही है, जो भारतीय सिनेमा में संगीत का नया इतिहास रचेगा।
वैश्विक संगीत का अनूठा संगम: रहमान और हंस जिमर
यह पहला मौका है जब ऑस्कर पुरस्कार विजेता ए.आर. रहमान और हॉलीवुड की &#039;ड्यून&#039; (Dune) व &#039;इंटरस्टेलर&#039; (Interstellar) जैसी फिल्मों में संगीत देने वाले ऑस्कर विजेता हंस जिमर एक साथ काम कर रहे हैं।
भारतीय और पश्चिमी संगीत का मिलन: हंस जिमर का सिम्फोनिक और ग्रैंड बैकग्राउंड स्कोर, रहमान की रूहानी और भारतीय शास्त्रीय धुनों के साथ मिलकर इस फिल्म को एक वैश्विक स्तर प्रदान करेगा।
दिव्य ध्वनि की रचना: दोनों संगीतकारों ने इस गीत की धुन को कुछ इस तरह तराशा है कि यह पौराणिक काल की दिव्यता, भव्यता और आध्यात्मिक गहराई को जीवंत कर सके।
डॉ. कुमार विश्वास के शब्दों का जादू
रामकथा और हिंदी साहित्य के मर्मज्ञ डॉ. कुमार विश्वास ने इस महागाथा के लिए गीत के बोल लिखे हैं। रामकाव्य पर उनकी गहरी पकड़ और ओजपूर्ण शब्दों के चयन के चलते इस गीत से काफी उम्मीदें हैं।
त्रेता युग का अहसास: सूत्रों के अनुसार, कुमार विश्वास के लिखे शब्द और रहमान-जिमर की धुनें जब एक साथ गूंजेंगी, तो यह श्रोताओं को आधुनिक दुनिया से दूर सीधे &#039;त्रेता युग&#039; के माहौल और भगवान राम की पावन भूमि का अनुभव कराएंगी। ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 17:59:47 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>कुमार विश्वास रामायण सॉन्ग (Kumar Vishwas Ramayana Song), ए आर रहमान हंस जिमर रामायण (AR Rahman Hans Zimmer Ramayana), नितेश तिवारी रामायण म्यूजिक (Nitesh Tiwari Ramayana Music)</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>अफवाहों पर दिल्ली पुलिस का पूर्णविराम: प्रदर्शन में मौत के दावे खारिज, हिरासत में लिए गए सभी लोग रिहा</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/delhi-police-statement-protest-death-claims-fake-news-released</link>
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        <description><![CDATA[ राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए विरोध-प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर फैली भ्रम की स्थिति पर दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा कारणों से प्रिवेंटिव डिटेंशन (रोकथाम हिरासत) में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दिया गया है। इसके साथ ही, सोशल मीडिया पर प्रदर्शन के दौरान किसी की मौत होने या भारी हिंसा के दावों को सिरे से खारिज करते हुए &#039;फेक न्यूज&#039; करार दिया गया है।
मौत और हिंसा के दावे पूरी तरह फर्जी: दिल्ली पुलिस व PIB Fact Check
प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर एक लड़की की मौत होने और पेलेट गन के इस्तेमाल से दर्जनों लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की खबरें वायरल होने लगी थीं।
PIB Fact Check का बयान: सरकार की आधिकारिक तथ्य-जांच एजेंसी ने कहा कि प्रदर्शन में किसी भी मौत का दावा पूरी तरह झूठा, भ्रामक और मनगढ़ंत है।
दिल्ली पुलिस की चेतावनी: पुलिस ने आधिकारिक &#039;Fake News Alert&#039; जारी करते हुए कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केवल मानक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। पुलिस ने चेतावनी दी है कि माहौल खराब करने के उद्देश्य से अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारी हुए रिहा
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिन नेताओं व प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था, उन्हें कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद छोड़ दिया गया है। रिहाई की पुष्टि होने के बाद प्रदर्शनकारी संगठनों ने भी पुलिस मुख्यालय (PHQ) के बाहर प्रस्तावित अपना घेराव व धरना रद्द कर दिया है।
सुरक्षा बल मुस्तैद, शांति बनाए रखने की अपील
दिल्ली पुलिस ने बताया कि जंतर-मंतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में निषेधाज्ञा (धारा 163 BNSS) लागू थी। बैरिकेड्स तोड़ने और प्रतिबंधित क्षेत्र की ओर बढ़ने की कोशिश के दौरान हुई हल्की झड़प में कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। पुलिस ने आम जनता से सोशल मीडिया पर चल रही बिना पुष्टि वाली खबरों पर विश्वास न करने और शांति बनाए रखने की अपील की है। ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 17:35:28 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>हिरासत में लिए गए लोग रिहा (Detained People Released), दिल्ली प्रदर्शन फेक न्यूज (Delhi Protest Fake News), PIB Fact Check Delhi Protest</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>सोनम वांगचुक सफदरजंग अस्पताल से हुए डिस्चार्ज, हाईकोर्ट के आदेश पर बेहतर इलाज के लिए मेदांता शिफ्ट</title>
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        <description><![CDATA[ लगातार अनशन के कारण बिगड़ते स्वास्थ्य के बीच जाने-माने पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। दिल्ली हाईकोर्ट के कड़े रुख और केंद्र सरकार की सहमति के बाद उन्हें आगे के इलाज के लिए गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किया गया है।
जंतर-मंतर से सफदरजंग तक का घटनाक्रम
सोनम वांगचुक NEET-UG परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और सुधार की मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल (अनशन) पर बैठे थे। अनशन के 21वें दिन स्वास्थ्य बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले आई थी। हालांकि, परिजनों का आरोप था कि अस्पताल में उन्हें परिजनों से मिलने नहीं दिया जा रहा था और उनकी इच्छा के विरुद्ध वहां रखा गया था।
पत्नी ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि सफदरजंग अस्पताल में वांगचुक को अवैध हिरासत जैसी स्थिति में रखा गया है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए मांग की कि वांगचुक को उनके मनपसंद अस्पताल (मेदांता) में इलाज कराने का अधिकार दिया जाए।
हाईकोर्ट का अहम आदेश और केंद्र की सहमति
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार को उन्हें मेदांता शिफ्ट करने पर कोई आपत्ति नहीं है।
तमाम पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने निर्देश जारी किए:
तत्काल शिफ्टिंग: सफदरजंग अस्पताल वांगचुक को तुरंत मेदांता हस्तांतरित करे।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम: मेदांता अस्पताल के निदेशक को वांगचुक की स्थिति की निगरानी के लिए एक विशेष मेडिकल पैनल गठित करने का निर्देश दिया गया।
पारिवारिक पहुंच: परिजनों को डॉक्टरों के प्रोटोकॉल के दायरे में रहकर वांगचुक से मिलने की अनुमति दी गई।
स्वास्थ्य अपडेट: लंबे समय तक भूख हड़ताल पर रहने के कारण सोनम वांगचुक के शरीर में पोटैशियम का स्तर कम पाया गया है। फिलहाल मेदांता के डॉक्टरों की एक समर्पित टीम उनके स्वास्थ्य सुधार पर लगातार नजर बनाए हुए है। ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 17:12:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>सोनम वांगचुक हेल्थ अपडेट (Sonam Wangchuk Health Update) सफदरजंग से मेदांता शिफ्ट सोनम वांगचुक (Safdarjung to Medanta shift Sonam Wangchuk) दिल्ली हाईकोर्ट सोनम वांगचुक आदेश (Delhi High Court Sonam Wangchuk Order) सोनम वांगचुक भूख हड़ताल (Sonam Wangchuk hunger strike)</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>आफत की बारिश: जम्मू&amp;कश्मीर में फ्लैश फ्लड से 10 लोगों की मौत, अमरनाथ यात्रा रुकी, हिमाचल में रेड अलर्ट के बाद स्कूल बंद</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/jammu-kashmir-flash-floods-amarnath-yatra-paused-himachal-rain-alert</link>
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        <description><![CDATA[ देश के पहाड़ी और मैदानी राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश अब आफत बन चुकी है। जम्मू-कश्मीर में मूसलाधार बारिश के बाद आई अचानक बाढ़ (Flash Floods) के कारण कम से कम 10 लोगों के मारे जाने की आशंका है, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं। बिगड़ते मौसम और जलभराव को देखते हुए अमरनाथ यात्रा को भी अस्थाई रूप से रोक दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य के हालातों का जायजा लिया और केंद्र की तरफ से हर संभव मदद का भरोसा दिया है।  
दूसरी तरफ, हिमाचल प्रदेश में भी मौसम विभाग द्वारा रेड अलर्ट जारी किए जाने के बाद कांगड़ा जिले के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों को अगले दो दिनों के लिए बंद करने का आदेश दिया गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में शारदा नदी में 1 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नदी उफान पर है और वहाँ भी कक्षा 1 से 8 तक के स्कूल बंद कर दिए गए हैं। ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 16:05:59 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>जम्मू कश्मीर बाढ़ 10 मौत, अमरनाथ यात्रा रुकी बारिश, हिमाचल कांगड़ा स्कूल बंद मौसम, heavy rain alert updates hindi</media:keywords>
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