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    <title>धाकड़ समाचार &amp; : सॉफ्टवेयर</title>
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    <description>धाकड़ समाचार &amp; : सॉफ्टवेयर</description>
    <dc:language>HI</dc:language>
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    <dc:rights>Copyright 2026 धाकड़ समाचार    &amp; All Rights Reserved.</dc:rights>
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        <title>Microsoft ने तेलंगाना में नया डेटा सेंटर शुरू किया, AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस</title>
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        <description><![CDATA[ Microsoft ने तेलंगाना में अपने नए India South Central data centre region को लाइव कर दिया है। यह भारत में कंपनी के क्लाउड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार से जुड़ा कदम है।
डेटा सेंटर क्लाउड कंप्यूटिंग, AI सेवाओं और डिजिटल एप्लीकेशन के संचालन के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा होते हैं। भारत में AI और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ने के साथ डेटा सेंटर की मांग भी बढ़ रही है।
Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार तेलंगाना सरकार 2029 तक लगभग 5 GW डेटा सेंटर क्षमता और करीब 30 अरब डॉलर के AI एवं डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का लक्ष्य लेकर चल रही है।
नए डेटा सेंटर क्षेत्र से Microsoft की क्लाउड सेवाओं की स्थानीय उपलब्धता और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता को बढ़ावा मिल सकता है।
AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा प्रोसेसिंग और स्टोरेज की जरूरत भी बढ़ रही है। ऐसे में बड़े डेटा सेंटर AI आधारित सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करते हैं। ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 22:49:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>Microsoft India, Telangana Data Centre, AI Infrastructure, Cloud Computing, Data Centre</media:keywords>
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        <title>AI डेटा सेंटरों के लिए चार कंपनियों को ₹3,000 करोड़ से अधिक ऋण</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में AI और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। इसी बीच NaBFID ने कम से कम चार डेटा सेंटर परियोजनाओं के लिए ₹3,000 करोड़ से अधिक के ऋण मंजूर किए हैं। प्रत्येक परियोजना के लिए स्वीकृत ऋण की राशि ₹3,000 करोड़ से अधिक बताई गई है।
डेटा सेंटर वे विशेष सुविधाएं हैं जहां बड़ी संख्या में सर्वर, स्टोरेज सिस्टम और नेटवर्क उपकरण संचालित किए जाते हैं। AI मॉडल को प्रशिक्षित करने और चलाने के लिए बड़ी कंप्यूटिंग क्षमता की आवश्यकता होती है। इसलिए AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटरों में निवेश भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
भारत में क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल सेवाओं, ई-कॉमर्स और AI आधारित अनुप्रयोगों के विस्तार के कारण डेटा प्रोसेसिंग की मांग बढ़ रही है। इसके लिए कंपनियों को बड़े पैमाने पर सर्वर और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने की जरूरत पड़ती है।
NaBFID का यह वित्तपोषण इसी बढ़ती पूंजीगत जरूरत के बीच सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, संस्था की ओर से डेटा सेंटर क्षेत्र में बड़े ऋणों को मंजूरी मिलना इस बात का संकेत है कि AI से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर अब बड़े निवेश वाले क्षेत्रों में शामिल हो रहा है।
डेटा सेंटर परियोजनाओं में केवल भवन और सर्वर स्थापित करना ही शामिल नहीं होता। इनके लिए लगातार बिजली आपूर्ति, कूलिंग सिस्टम, नेटवर्क कनेक्टिविटी, बैकअप व्यवस्था और उच्च स्तर की सुरक्षा जैसी सुविधाओं की आवश्यकता होती है। इसलिए ऐसी परियोजनाओं में शुरुआती पूंजीगत निवेश काफी बड़ा हो सकता है।
AI के विस्तार के साथ कंप्यूटिंग क्षमता की मांग और बढ़ने की संभावना है। बड़े भाषा मॉडल, जनरेटिव AI, मशीन लर्निंग, क्लाउड सेवाओं और औद्योगिक AI अनुप्रयोगों के लिए लगातार अधिक डेटा प्रोसेसिंग क्षमता चाहिए। इस कारण भारत में डेटा सेंटर निर्माण को डिजिटल अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
NaBFID ने डेटा सेंटरों के अलावा व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के लिए भी बड़ी मात्रा में पूंजी जुटाने की योजना बनाई है। रिपोर्ट के अनुसार, संस्था लगभग ₹1 लाख करोड़ जुटाने की योजना पर भी काम कर रही है। इसका इस्तेमाल विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के वित्तपोषण में किया जा सकता है।
भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र के विस्तार का असर रोजगार और तकनीकी सेवाओं पर भी पड़ सकता है। निर्माण के दौरान इंजीनियरिंग और इंस्टॉलेशन से जुड़े काम पैदा होते हैं, जबकि संचालन के लिए नेटवर्किंग, आईटी, इलेक्ट्रिकल और कूलिंग सिस्टम से जुड़े विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है।
हालांकि, डेटा सेंटरों के तेजी से विस्तार के साथ बिजली और पानी की खपत, ऊर्जा दक्षता तथा पर्यावरणीय प्रभाव जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे। भविष्य में इस क्षेत्र के विकास में ऊर्जा-कुशल तकनीक और नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 15:11:42 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>AI Data Centres, NaBFID, डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भारत टेक्नोलॉजी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश</media:keywords>
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        <title>भारत के सॉफ्टवेयर निर्यात में 8.2% की बढ़ोतरी, 221.4 अरब डॉलर पहुंचा आंकड़ा</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/भारत-के-सॉफ्टवेयर-निर्यात-में-82-की-बढ़ोतरी-2214-अरब-डॉलर-पहुंचा-आंकड़ा</link>
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        <description><![CDATA[ नई दिल्ली, 19 सितंबर 2026। भारत के सॉफ्टवेयर और आईटी-सक्षम सेवाओं के निर्यात में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 8.2 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के वार्षिक सर्वेक्षण के अनुसार, इस अवधि में भारत का सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात बढ़कर करीब 221.4 अरब डॉलर हो गया। इससे देश के आईटी और डिजिटल सेवा क्षेत्र की वैश्विक मौजूदगी का पता चलता है।
221.4 अरब डॉलर का निर्यात
RBI के सर्वेक्षण के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की सॉफ्टवेयर सेवाओं के निर्यात में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस सर्वेक्षण में देश की हजारों सॉफ्टवेयर और आईटी सेवा कंपनियों से जुड़ी जानकारी शामिल की गई।
भारत लंबे समय से वैश्विक आईटी और सॉफ्टवेयर सेवा बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। भारतीय कंपनियां अमेरिका, यूरोप और अन्य क्षेत्रों के ग्राहकों को सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, आईटी कंसल्टिंग, बिजनेस प्रोसेस सेवाएं और डिजिटल समाधान उपलब्ध कराती हैं।
हजारों कंपनियां सर्वेक्षण में शामिल
RBI के अनुसार इस वार्षिक सर्वेक्षण के लिए 7,569 सॉफ्टवेयर निर्यात कंपनियों से जानकारी जुटाई गई। इसमें सॉफ्टवेयर सेवाओं के साथ आईटी-सक्षम सेवाओं और अन्य संबंधित गतिविधियों का डेटा शामिल किया गया।
इस तरह के आंकड़े भारत के सेवा क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय व्यापार में योगदान को समझने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। सॉफ्टवेयर निर्यात से देश को विदेशी मुद्रा आय भी प्राप्त होती है और वैश्विक बाजारों में भारतीय तकनीकी कंपनियों की गतिविधियां बढ़ती हैं।
डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग
दुनियाभर में क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसी तकनीकों की मांग बढ़ने के साथ आईटी सेवाओं का बाजार भी बदल रहा है।
भारतीय आईटी कंपनियां इन क्षेत्रों में सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। इसके चलते सॉफ्टवेयर निर्यात केवल पारंपरिक एप्लिकेशन डेवलपमेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक डिजिटल सेवाओं का हिस्सा भी लगातार बढ़ रहा है।
रोजगार के अवसरों पर भी असर
आईटी और सॉफ्टवेयर सेवा क्षेत्र भारत में बड़ी संख्या में इंजीनियरों, प्रोग्रामरों, डेटा विशेषज्ञों, डिजाइनरों और अन्य पेशेवरों को रोजगार देता है। निर्यात कारोबार में वृद्धि से कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट और सेवा कारोबार बढ़ने पर रोजगार के नए अवसर भी बन सकते हैं।
हालांकि रोजगार की वास्तविक वृद्धि कंपनी की मांग, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और नई तकनीकों को अपनाने की गति पर निर्भर करती है।
वैश्विक बाजार में भारत की भूमिका
सॉफ्टवेयर निर्यात में वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब दुनिया भर की कंपनियां डिजिटल तकनीक, क्लाउड और AI आधारित सेवाओं में निवेश बढ़ा रही हैं। भारत के लिए यह क्षेत्र सेवा निर्यात और विदेशी आय का महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है।
RBI के ताजा आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात ने पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। आने वाले समय में AI और अन्य नई तकनीकों के विस्तार के साथ इस क्षेत्र में सेवाओं की प्रकृति और बाजार की मांग में और बदलाव देखने को मिल सकता है। ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 00:00:43 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>भारत सॉफ्टवेयर निर्यात, Software Export India, RBI Survey 2026, IT Services, ITES Export, Indian IT Industry</media:keywords>
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