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    <title>धाकड़ समाचार &amp; : टेक्नोलॉजी</title>
    <link>https://dhakarsamachar.in/rss/category/Technology</link>
    <description>धाकड़ समाचार &amp; : टेक्नोलॉजी</description>
    <dc:language>HI</dc:language>
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    <dc:rights>Copyright 2026 धाकड़ समाचार    &amp; All Rights Reserved.</dc:rights>
    <item>
        <title>भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार तेज, सेमीकंडक्टर क्षमता पर भी जोर</title>
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        <description><![CDATA[ AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारत में डिजिटल और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की गतिविधियां तेज हुई हैं। डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को रणनीतिक क्षेत्रों में शामिल किया जा रहा है।
24 सितंबर को Microsoft ने तेलंगाना में अपने India South Central data centre region को लाइव किया। यह क्लाउड और AI सेवाओं के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने की दिशा में कदम है।
Economic Affairs Secretary Anuradha Thakur ने भी 24 सितंबर को कहा कि भारत को सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में क्षमता निर्माण की जरूरत है ताकि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच देश की तकनीकी क्षमता मजबूत हो।
सेमीकंडक्टर चिप्स मोबाइल फोन, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और AI सिस्टम समेत कई क्षेत्रों में इस्तेमाल होते हैं। इसलिए इनके उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण बढ़ने के साथ सेमीकंडक्टर की घरेलू मांग भी बढ़ रही है।
मुख्य बिंदु
AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारत में जोर।
Microsoft ने तेलंगाना डेटा सेंटर लाइव किया।
सेमीकंडक्टर को रणनीतिक क्षेत्र बताया गया।
इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में चिप्स की मांग बढ़ रही है।
डेटा सेंटर AI सेवाओं का आधार हैं। ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 23:07:57 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>AI India, Semiconductor India, Data Centre, Electronics Manufacturing, Technology</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Microsoft ने तेलंगाना में नया डेटा सेंटर शुरू किया, AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/microsoft-ने-तेलंगाना-में-नया-डेटा-सेंटर-शुरू-किया-ai-इंफ्रास्ट्रक्चर-पर-फोकस</link>
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        <description><![CDATA[ Microsoft ने तेलंगाना में अपने नए India South Central data centre region को लाइव कर दिया है। यह भारत में कंपनी के क्लाउड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार से जुड़ा कदम है।
डेटा सेंटर क्लाउड कंप्यूटिंग, AI सेवाओं और डिजिटल एप्लीकेशन के संचालन के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा होते हैं। भारत में AI और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ने के साथ डेटा सेंटर की मांग भी बढ़ रही है।
Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार तेलंगाना सरकार 2029 तक लगभग 5 GW डेटा सेंटर क्षमता और करीब 30 अरब डॉलर के AI एवं डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का लक्ष्य लेकर चल रही है।
नए डेटा सेंटर क्षेत्र से Microsoft की क्लाउड सेवाओं की स्थानीय उपलब्धता और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता को बढ़ावा मिल सकता है।
AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा प्रोसेसिंग और स्टोरेज की जरूरत भी बढ़ रही है। ऐसे में बड़े डेटा सेंटर AI आधारित सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करते हैं। ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 22:49:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>Microsoft India, Telangana Data Centre, AI Infrastructure, Cloud Computing, Data Centre</media:keywords>
    </item>
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        <title>Google Photos में आया AI Wardrobe फीचर, तस्वीरों से बनेगा डिजिटल क्लोजेट</title>
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        <description><![CDATA[ Google Photos में 25 सितंबर को कई नए फीचर जोड़े गए। इनमें AI-powered Wardrobe फीचर भी शामिल है, जो यूजर्स की तस्वीरों में दिखाई देने वाले कपड़ों को डिजिटल कलेक्शन में व्यवस्थित करता है।
यूजर अपने फोटो में मौजूद कपड़ों को एक डिजिटल वॉर्डरोब के रूप में देख सकता है। इसके जरिए अलग-अलग कपड़ों को मिलाकर आउटफिट तैयार करने और वर्चुअली देखने की सुविधा दी गई है। यह फीचर भारत समेत अमेरिका और ब्राजील में योग्य Android और iOS यूजर्स के लिए उपलब्ध है।
Google Photos में Moods नाम का नया एडिटिंग फीचर भी जोड़ा गया है। इसके जरिए तस्वीरों पर 35mm फिल्म और 2000s digicam जैसे स्टाइल लागू किए जा सकते हैं।
इसके अलावा ऐप में नए Remix templates और Markup टूल में सुधार किए गए हैं। Markup में संवेदनशील जानकारी को ब्लर करने के लिए redact pen भी जोड़ा गया है।
Google के अनुसार नए फीचर्स का उद्देश्य फोटो लाइब्रेरी को व्यवस्थित करने और तस्वीरों को जल्दी एडिट करने के विकल्प बढ़ाना है। ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 22:10:30 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>Google Photos, AI Wardrobe, Gemini, Artificial Intelligence, Google India</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>बेंगलुरु में Electronica India 2026 शुरू, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पर जोर</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/बेंगलुरु-में-electronica-india-2026-शुरू-इलेक्ट्रॉनिक्स-मैन्युफैक्चरिंग-पर-जोर</link>
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        <description><![CDATA[ भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और उत्पादन तकनीक से जुड़े क्षेत्र को एक मंच देने के उद्देश्य से बेंगलुरु में Electronica India और productronica India 2026 का आयोजन शुरू हुआ।
Bangalore International Exhibition Centre में आयोजित इस कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियां, कंपोनेंट सप्लायर, उत्पादन तकनीक उपलब्ध कराने वाली कंपनियां, खरीदार और उद्योग विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं।
आयोजन में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम और उत्पादन से जुड़ी नई तकनीकों को प्रदर्शित किया जा रहा है। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षमता बढ़ने के साथ ऐसे आयोजनों को उद्योग के लिए नए कारोबारी संपर्क और तकनीकी सहयोग का मंच माना जाता है।
कार्यक्रम में भारत के अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियों और उद्योग प्रतिनिधियों की भागीदारी भी है। इससे घरेलू निर्माताओं को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े अवसरों और नई उत्पादन तकनीकों को समझने का मौका मिल सकता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में सेमीकंडक्टर, कंपोनेंट निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की असेंबली जैसे क्षेत्रों में निवेश और उत्पादन बढ़ाने पर भारत लगातार जोर दे रहा है। ऐसे में यह आयोजन उद्योग जगत के लिए महत्वपूर्ण है। ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 00:19:44 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>Electronica India 2026, productronica India, Bengaluru, electronics manufacturing, semiconductor</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>ग्रामीण सड़कों की खराबी अब AI बताएगा, मोबाइल वीडियो से होगी पहचान</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/ग्रामीण-सड़कों-की-खराबी-अब-ai-बताएगा-मोबाइल-वीडियो-से-होगी-पहचान</link>
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        <description><![CDATA[ नई तकनीक का परीक्षण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनी ग्रामीण सड़कों पर किया जा रहा है। इसके लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने AI आधारित रोड-कंडीशन असेसमेंट सिस्टम के ट्रायल को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। यह सिस्टम Centre for Development of Advanced Computing (C-DAC) और National Rural Infrastructure Development Agency (NRIDA) के सहयोग से विकसित किया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में इस तकनीक का फील्ड-वैलिडेशन अभ्यास सितंबर की शुरुआत से शुरू किया गया है। इसमें राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की चयनित Programme Implementation Units को शामिल किया गया है।
पारंपरिक व्यवस्था में सड़क की स्थिति जानने के लिए अधिकारियों द्वारा मौके पर जाकर निरीक्षण किया जाता है और eMARG मोबाइल एप के जरिए जियो-टैग्ड तस्वीरें अपलोड की जाती हैं। नई व्यवस्था में वाहनों पर मौजूद मोबाइल उपकरणों से सड़क के वीडियो रिकॉर्ड किए जा रहे हैं।
AI सिस्टम परीक्षण के दौरान सात तरह की दिखाई देने वाली खराबियों की पहचान करने पर केंद्रित है। इनमें गड्ढे, सड़क की लंबवत और क्षैतिज दरारें, किनारों का टूटना, सतह का धंसना, पैच और वनस्पति से जुड़ी बाधाएं शामिल हैं।
हालांकि AI से मिलने वाले परिणामों को अंतिम फैसला नहीं माना जाएगा। इंजीनियर मौके पर सड़क की खराबियों का भौतिक सत्यापन करेंगे और AI से प्राप्त आकलन के साथ वास्तविक स्थिति की तुलना करेंगे। यानी फिलहाल तकनीक का इस्तेमाल मानव निरीक्षण की जगह लेने के बजाय सड़क रखरखाव से जुड़े फैसलों में सहायता के लिए किया जा रहा है।
इस परीक्षण का उद्देश्य सड़क निरीक्षण को तकनीक आधारित बनाना और खराबियों की पहचान की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करना है। परीक्षण सफल रहने पर ऐसी तकनीक ग्रामीण सड़क रखरखाव की निगरानी में उपयोगी हो सकती है। ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 15:48:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>AI सड़क निरीक्षण, ग्रामीण सड़क, PMGSY, मोबाइल वीडियो, सड़क खराबी, C-DAC, NRIDA</media:keywords>
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    <item>
        <title>AI डेटा सेंटरों के लिए चार कंपनियों को ₹3,000 करोड़ से अधिक ऋण</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/ai-डेटा-सेंटरों-के-लिए-चार-कंपनियों-को-3000-करोड़-से-अधिक-ऋण</link>
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        <description><![CDATA[ भारत में AI और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। इसी बीच NaBFID ने कम से कम चार डेटा सेंटर परियोजनाओं के लिए ₹3,000 करोड़ से अधिक के ऋण मंजूर किए हैं। प्रत्येक परियोजना के लिए स्वीकृत ऋण की राशि ₹3,000 करोड़ से अधिक बताई गई है।
डेटा सेंटर वे विशेष सुविधाएं हैं जहां बड़ी संख्या में सर्वर, स्टोरेज सिस्टम और नेटवर्क उपकरण संचालित किए जाते हैं। AI मॉडल को प्रशिक्षित करने और चलाने के लिए बड़ी कंप्यूटिंग क्षमता की आवश्यकता होती है। इसलिए AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटरों में निवेश भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
भारत में क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल सेवाओं, ई-कॉमर्स और AI आधारित अनुप्रयोगों के विस्तार के कारण डेटा प्रोसेसिंग की मांग बढ़ रही है। इसके लिए कंपनियों को बड़े पैमाने पर सर्वर और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने की जरूरत पड़ती है।
NaBFID का यह वित्तपोषण इसी बढ़ती पूंजीगत जरूरत के बीच सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, संस्था की ओर से डेटा सेंटर क्षेत्र में बड़े ऋणों को मंजूरी मिलना इस बात का संकेत है कि AI से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर अब बड़े निवेश वाले क्षेत्रों में शामिल हो रहा है।
डेटा सेंटर परियोजनाओं में केवल भवन और सर्वर स्थापित करना ही शामिल नहीं होता। इनके लिए लगातार बिजली आपूर्ति, कूलिंग सिस्टम, नेटवर्क कनेक्टिविटी, बैकअप व्यवस्था और उच्च स्तर की सुरक्षा जैसी सुविधाओं की आवश्यकता होती है। इसलिए ऐसी परियोजनाओं में शुरुआती पूंजीगत निवेश काफी बड़ा हो सकता है।
AI के विस्तार के साथ कंप्यूटिंग क्षमता की मांग और बढ़ने की संभावना है। बड़े भाषा मॉडल, जनरेटिव AI, मशीन लर्निंग, क्लाउड सेवाओं और औद्योगिक AI अनुप्रयोगों के लिए लगातार अधिक डेटा प्रोसेसिंग क्षमता चाहिए। इस कारण भारत में डेटा सेंटर निर्माण को डिजिटल अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
NaBFID ने डेटा सेंटरों के अलावा व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के लिए भी बड़ी मात्रा में पूंजी जुटाने की योजना बनाई है। रिपोर्ट के अनुसार, संस्था लगभग ₹1 लाख करोड़ जुटाने की योजना पर भी काम कर रही है। इसका इस्तेमाल विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के वित्तपोषण में किया जा सकता है।
भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र के विस्तार का असर रोजगार और तकनीकी सेवाओं पर भी पड़ सकता है। निर्माण के दौरान इंजीनियरिंग और इंस्टॉलेशन से जुड़े काम पैदा होते हैं, जबकि संचालन के लिए नेटवर्किंग, आईटी, इलेक्ट्रिकल और कूलिंग सिस्टम से जुड़े विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है।
हालांकि, डेटा सेंटरों के तेजी से विस्तार के साथ बिजली और पानी की खपत, ऊर्जा दक्षता तथा पर्यावरणीय प्रभाव जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे। भविष्य में इस क्षेत्र के विकास में ऊर्जा-कुशल तकनीक और नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 15:11:42 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>AI Data Centres, NaBFID, डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भारत टेक्नोलॉजी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण को नई गति, Semicon India 2026 में वैश्विक कंपनियों की भागीदारी</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/भारत-में-सेमीकंडक्टर-निर्माण-को-नई-गति-semicon-india-2026-में-वैश्विक-कंपनियों-की-भागीदारी</link>
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        <description><![CDATA[ भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग को विकसित करने की दिशा में चल रहे प्रयासों के बीच Semicon India 2026 का पांचवां संस्करण 17 से 19 सितंबर तक आयोजित किया गया। तीन दिवसीय सम्मेलन और प्रदर्शनी का विषय “Silicon to Systems: Building the Ecosystem” रखा गया। इसमें सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों, विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं तथा नीति-निर्माताओं ने हिस्सा लिया।
सम्मेलन का मुख्य फोकस केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने पर रहा। इसमें डिजाइन, विनिर्माण, पैकेजिंग, डिस्प्ले तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रतिभा विकास जैसे क्षेत्रों पर चर्चा हुई। विभिन्न सत्रों में उद्योग और सरकार के बीच सहयोग बढ़ाने तथा वैश्विक कंपनियों के साथ तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने के मुद्दे सामने आए।
सम्मेलन से एक दिन पहले प्रमुख वैश्विक चिप कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक राउंडटेबल बैठक भी हुई। इसमें Micron Technology, ASML, Intel और Tata Electronics जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भारत में तकनीकी सहयोग, निवेश और प्रतिभा विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा की।
भारत के लिए सेमीकंडक्टर क्षेत्र इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों में चिप्स की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। स्मार्टफोन, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार उपकरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कई औद्योगिक प्रणालियां सेमीकंडक्टर तकनीक पर निर्भर हैं। घरेलू स्तर पर उत्पादन क्षमता बढ़ने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका बढ़ सकती है।
Semicon India 2026 में डिस्प्ले तकनीक और महिला नेतृत्व जैसे विषयों पर भी विशेष सत्र आयोजित किए गए। इसके अलावा विभिन्न देशों के साथ तकनीकी और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने के लिए छह कंट्री राउंडटेबल आयोजित किए गए। इसका उद्देश्य भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों से जोड़ना और निवेश के नए अवसर विकसित करना था।
भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार का असर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और इससे जुड़े रोजगार क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। चिप निर्माण के साथ-साथ डिजाइन, टेस्टिंग, पैकेजिंग, उपकरण निर्माण और तकनीकी सेवाओं के लिए प्रशिक्षित इंजीनियरों और विशेषज्ञों की मांग बढ़ने की संभावना है।
सम्मेलन के दौरान उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भारत में तेजी से विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का उल्लेख किया। सरकार की ओर से भी निवेश और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। इससे भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण क्षमता को अगले चरण में ले जाने की दिशा में प्रयास जारी रहने का संकेत मिलता है। ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 00:14:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>Semicon India 2026, Semiconductor India, सेमीकंडक्टर, चिप निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, भारत निवेश, टेक्नोलॉजी</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत के सॉफ्टवेयर निर्यात में 8.2% की बढ़ोतरी, 221.4 अरब डॉलर पहुंचा आंकड़ा</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/भारत-के-सॉफ्टवेयर-निर्यात-में-82-की-बढ़ोतरी-2214-अरब-डॉलर-पहुंचा-आंकड़ा</link>
        <guid>https://dhakarsamachar.in/भारत-के-सॉफ्टवेयर-निर्यात-में-82-की-बढ़ोतरी-2214-अरब-डॉलर-पहुंचा-आंकड़ा</guid>
        <description><![CDATA[ नई दिल्ली, 19 सितंबर 2026। भारत के सॉफ्टवेयर और आईटी-सक्षम सेवाओं के निर्यात में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 8.2 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के वार्षिक सर्वेक्षण के अनुसार, इस अवधि में भारत का सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात बढ़कर करीब 221.4 अरब डॉलर हो गया। इससे देश के आईटी और डिजिटल सेवा क्षेत्र की वैश्विक मौजूदगी का पता चलता है।
221.4 अरब डॉलर का निर्यात
RBI के सर्वेक्षण के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की सॉफ्टवेयर सेवाओं के निर्यात में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस सर्वेक्षण में देश की हजारों सॉफ्टवेयर और आईटी सेवा कंपनियों से जुड़ी जानकारी शामिल की गई।
भारत लंबे समय से वैश्विक आईटी और सॉफ्टवेयर सेवा बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। भारतीय कंपनियां अमेरिका, यूरोप और अन्य क्षेत्रों के ग्राहकों को सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, आईटी कंसल्टिंग, बिजनेस प्रोसेस सेवाएं और डिजिटल समाधान उपलब्ध कराती हैं।
हजारों कंपनियां सर्वेक्षण में शामिल
RBI के अनुसार इस वार्षिक सर्वेक्षण के लिए 7,569 सॉफ्टवेयर निर्यात कंपनियों से जानकारी जुटाई गई। इसमें सॉफ्टवेयर सेवाओं के साथ आईटी-सक्षम सेवाओं और अन्य संबंधित गतिविधियों का डेटा शामिल किया गया।
इस तरह के आंकड़े भारत के सेवा क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय व्यापार में योगदान को समझने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। सॉफ्टवेयर निर्यात से देश को विदेशी मुद्रा आय भी प्राप्त होती है और वैश्विक बाजारों में भारतीय तकनीकी कंपनियों की गतिविधियां बढ़ती हैं।
डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग
दुनियाभर में क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसी तकनीकों की मांग बढ़ने के साथ आईटी सेवाओं का बाजार भी बदल रहा है।
भारतीय आईटी कंपनियां इन क्षेत्रों में सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। इसके चलते सॉफ्टवेयर निर्यात केवल पारंपरिक एप्लिकेशन डेवलपमेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक डिजिटल सेवाओं का हिस्सा भी लगातार बढ़ रहा है।
रोजगार के अवसरों पर भी असर
आईटी और सॉफ्टवेयर सेवा क्षेत्र भारत में बड़ी संख्या में इंजीनियरों, प्रोग्रामरों, डेटा विशेषज्ञों, डिजाइनरों और अन्य पेशेवरों को रोजगार देता है। निर्यात कारोबार में वृद्धि से कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट और सेवा कारोबार बढ़ने पर रोजगार के नए अवसर भी बन सकते हैं।
हालांकि रोजगार की वास्तविक वृद्धि कंपनी की मांग, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और नई तकनीकों को अपनाने की गति पर निर्भर करती है।
वैश्विक बाजार में भारत की भूमिका
सॉफ्टवेयर निर्यात में वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब दुनिया भर की कंपनियां डिजिटल तकनीक, क्लाउड और AI आधारित सेवाओं में निवेश बढ़ा रही हैं। भारत के लिए यह क्षेत्र सेवा निर्यात और विदेशी आय का महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है।
RBI के ताजा आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात ने पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। आने वाले समय में AI और अन्य नई तकनीकों के विस्तार के साथ इस क्षेत्र में सेवाओं की प्रकृति और बाजार की मांग में और बदलाव देखने को मिल सकता है। ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 00:00:43 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>भारत सॉफ्टवेयर निर्यात, Software Export India, RBI Survey 2026, IT Services, ITES Export, Indian IT Industry</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण को मिला बड़ा बढ़ावा, नई परियोजनाओं पर सरकार का फोकस</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/भारत-में-सेमीकंडक्टर-निर्माण-को-मिला-बड़ा-बढ़ावा-नई-परियोजनाओं-पर-सरकार-का-फोकस</link>
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        <description><![CDATA[ नई दिल्ली, 28 अगस्त 2026। भारत ने सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए नई परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया है। सरकार का लक्ष्य देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र पर बढ़ा जोर
मोबाइल फोन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा उपकरण, दूरसंचार और आधुनिक औद्योगिक मशीनों में सेमीकंडक्टर चिप का इस्तेमाल होता है। डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ इन चिप्स की मांग लगातार बढ़ रही है।
भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से देश में चिप निर्माण और उससे जुड़े उपकरणों के उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए कंपनियों को प्रोत्साहन और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की नीति अपनाई गई है।
देश में बनेंगी आधुनिक चिप्स
भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए स्थापित की जा रही परियोजनाओं में चिप निर्माण के साथ-साथ पैकेजिंग और परीक्षण जैसी सुविधाओं को भी शामिल किया जा रहा है। इससे भारत में पूरी आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने में मदद मिल सकती है।
सरकार का प्रयास है कि केवल तैयार इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्माण ही नहीं, बल्कि उनके लिए आवश्यक महत्वपूर्ण घटकों का उत्पादन भी देश में हो।
रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद
सेमीकंडक्टर उद्योग में बड़े स्तर पर निवेश से इंजीनियरिंग, अनुसंधान, तकनीकी संचालन और विनिर्माण से जुड़े रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षेत्र में काम करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल, कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल और मटेरियल साइंस जैसे क्षेत्रों के प्रशिक्षित युवाओं की आवश्यकता बढ़ सकती है।
इसके साथ ही विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों में सेमीकंडक्टर डिजाइन और संबंधित तकनीकों पर शोध को बढ़ावा देने की जरूरत भी महसूस की जा रही है।
वैश्विक कंपनियों की नजर भारत पर
दुनिया में सेमीकंडक्टर उत्पादन कुछ चुनिंदा देशों में केंद्रित है। वैश्विक कंपनियां अपनी आपूर्ति श्रृंखला को अलग-अलग देशों में फैलाने की कोशिश कर रही हैं। भारत इस बदलाव का लाभ उठाकर अपने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करना चाहता है।
भारत में बड़ा घरेलू बाजार, कुशल युवा कार्यबल और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन का बढ़ता आधार विदेशी कंपनियों के लिए आकर्षण का कारण बन सकता है।
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा समर्थन
सेमीकंडक्टर निर्माण को ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। घरेलू स्तर पर चिप उत्पादन बढ़ने से इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
विशेष रूप से रक्षा, दूरसंचार और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों के लिए सेमीकंडक्टर की विश्वसनीय आपूर्ति महत्वपूर्ण है।
चुनौतियां भी कम नहीं
भारत के सामने सेमीकंडक्टर उद्योग विकसित करने में कई चुनौतियां हैं। चिप निर्माण के लिए अत्याधुनिक तकनीक, बड़ी पूंजी, प्रशिक्षित मानव संसाधन, स्थिर बिजली आपूर्ति और उच्च गुणवत्ता वाली जल व्यवस्था की आवश्यकता होती है।
इसके अलावा वैश्विक स्तर पर स्थापित कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करना भी एक बड़ी चुनौती होगी। इसलिए केवल फैक्ट्री स्थापित करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि लंबे समय तक तकनीकी क्षमता और अनुसंधान में निवेश करना भी जरूरी होगा।
भारत के लिए बड़ा अवसर
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की बढ़ती सक्रियता देश के इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर रही है। यदि परियोजनाएं निर्धारित समय पर सफलतापूर्वक लागू होती हैं, तो भारत वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है।
सरकार का फोकस अब चिप निर्माण के साथ-साथ डिजाइन, पैकेजिंग, परीक्षण और संबंधित उपकरणों के घरेलू उत्पादन पर भी है। इससे आने वाले वर्षों में भारत के तकनीकी विनिर्माण क्षेत्र को नई दिशा मिल सकती है। ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 10:40:46 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>सेमीकंडक्टर इंडिया, चिप निर्माण, सेमीकंडक्टर मिशन, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, आत्मनिर्भर भारत</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण को मिला बड़ा बढ़ावा, नई परियोजनाओं पर सरकार का फोकस</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/भारत-में-सेमीकंडक्टर-निर्माण-को-मिला-बड़ा-बढ़ावा-नई-परियोजनाओं-पर-सरकार-का-फोकस-213</link>
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        <description><![CDATA[ नई दिल्ली, 28 अगस्त 2026। भारत ने सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए नई परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया है। सरकार का लक्ष्य देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र पर बढ़ा जोर
मोबाइल फोन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा उपकरण, दूरसंचार और आधुनिक औद्योगिक मशीनों में सेमीकंडक्टर चिप का इस्तेमाल होता है। डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ इन चिप्स की मांग लगातार बढ़ रही है।
भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से देश में चिप निर्माण और उससे जुड़े उपकरणों के उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए कंपनियों को प्रोत्साहन और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की नीति अपनाई गई है।
देश में बनेंगी आधुनिक चिप्स
भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए स्थापित की जा रही परियोजनाओं में चिप निर्माण के साथ-साथ पैकेजिंग और परीक्षण जैसी सुविधाओं को भी शामिल किया जा रहा है। इससे भारत में पूरी आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने में मदद मिल सकती है।
सरकार का प्रयास है कि केवल तैयार इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्माण ही नहीं, बल्कि उनके लिए आवश्यक महत्वपूर्ण घटकों का उत्पादन भी देश में हो।
रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद
सेमीकंडक्टर उद्योग में बड़े स्तर पर निवेश से इंजीनियरिंग, अनुसंधान, तकनीकी संचालन और विनिर्माण से जुड़े रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षेत्र में काम करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल, कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल और मटेरियल साइंस जैसे क्षेत्रों के प्रशिक्षित युवाओं की आवश्यकता बढ़ सकती है।
इसके साथ ही विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों में सेमीकंडक्टर डिजाइन और संबंधित तकनीकों पर शोध को बढ़ावा देने की जरूरत भी महसूस की जा रही है।
वैश्विक कंपनियों की नजर भारत पर
दुनिया में सेमीकंडक्टर उत्पादन कुछ चुनिंदा देशों में केंद्रित है। वैश्विक कंपनियां अपनी आपूर्ति श्रृंखला को अलग-अलग देशों में फैलाने की कोशिश कर रही हैं। भारत इस बदलाव का लाभ उठाकर अपने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करना चाहता है।
भारत में बड़ा घरेलू बाजार, कुशल युवा कार्यबल और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन का बढ़ता आधार विदेशी कंपनियों के लिए आकर्षण का कारण बन सकता है।
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा समर्थन
सेमीकंडक्टर निर्माण को ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। घरेलू स्तर पर चिप उत्पादन बढ़ने से इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
विशेष रूप से रक्षा, दूरसंचार और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों के लिए सेमीकंडक्टर की विश्वसनीय आपूर्ति महत्वपूर्ण है।
चुनौतियां भी कम नहीं
भारत के सामने सेमीकंडक्टर उद्योग विकसित करने में कई चुनौतियां हैं। चिप निर्माण के लिए अत्याधुनिक तकनीक, बड़ी पूंजी, प्रशिक्षित मानव संसाधन, स्थिर बिजली आपूर्ति और उच्च गुणवत्ता वाली जल व्यवस्था की आवश्यकता होती है।
इसके अलावा वैश्विक स्तर पर स्थापित कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करना भी एक बड़ी चुनौती होगी। इसलिए केवल फैक्ट्री स्थापित करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि लंबे समय तक तकनीकी क्षमता और अनुसंधान में निवेश करना भी जरूरी होगा।
भारत के लिए बड़ा अवसर
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की बढ़ती सक्रियता देश के इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर रही है। यदि परियोजनाएं निर्धारित समय पर सफलतापूर्वक लागू होती हैं, तो भारत वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है।
सरकार का फोकस अब चिप निर्माण के साथ-साथ डिजाइन, पैकेजिंग, परीक्षण और संबंधित उपकरणों के घरेलू उत्पादन पर भी है। इससे आने वाले वर्षों में भारत के तकनीकी विनिर्माण क्षेत्र को नई दिशा मिल सकती है। ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 10:40:46 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>सेमीकंडक्टर इंडिया, चिप निर्माण, सेमीकंडक्टर मिशन, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, आत्मनिर्भर भारत</media:keywords>
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        <title>Air India Boeing 787 के Fuel Control Switch में नहीं मिली खराबी, जांच अभी जारी</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/air-india-boeing-787-fuel-control-switch-no-abnormality-july-2026</link>
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        <description><![CDATA[ नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026: Air India के Boeing 787 विमान से जुड़ी एक महत्वपूर्ण तकनीकी जांच में फिलहाल किसी बड़ी खराबी की पुष्टि नहीं हुई है। भारत सरकार ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि Boeing द्वारा किए गए विस्तृत परीक्षण में विमान के Fuel Control Switch में कोई असामान्यता नहीं पाई गई। यह वही तकनीकी प्रणाली है, जिसे फरवरी 2026 में लंदन से बेंगलुरु आने वाली Air India की एक उड़ान के चालक दल ने जांच के लिए रिपोर्ट किया था।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि Boeing 787 विमान से जुड़ी तकनीकी सुरक्षा को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार निगरानी बढ़ाई गई है। फरवरी में लंदन हीथ्रो से बेंगलुरु आने वाली Air India की उड़ान के बाद पायलट की रिपोर्ट में Fuel Control Switch के व्यवहार को लेकर चिंता जताई गई थी। इसके बाद विमान को ग्राउंड कर दिया गया और मामले की तकनीकी जांच शुरू की गई।

फरवरी में क्या हुआ था?

2 फरवरी 2026 को Air India का Boeing 787-8 विमान, जो लंदन हीथ्रो से बेंगलुरु की उड़ान पर था, अपनी यात्रा पूरी करने के बाद जांच के दायरे में आया। विमान के Pilot Defect Report में बाएं Fuel Control Switch से संबंधित समस्या दर्ज की गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, स्विच को हल्का दबाने पर उसके RUN से CUTOFF स्थिति में जाने और चयनित स्थिति में सकारात्मक रूप से लॉक न होने की शिकायत दर्ज की गई थी। इस रिपोर्ट के बाद विमान को आगे की जांच के लिए ग्राउंड किया गया।

इसके बाद Air India ने Boeing की निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार Fuel Control Switch की जांच और functional testing कराई। यह प्रक्रिया DGCA के अधिकारियों की मौजूदगी में की गई थी। प्रारंभिक निरीक्षण के बाद OEM यानी Original Equipment Manufacturer की ओर से स्विच को mechanically functioning as designed बताया गया था।

Boeing की विस्तृत जांच में क्या सामने आया?

अब सरकार ने संसद में बताया है कि Boeing द्वारा किए गए विस्तृत परीक्षण में Fuel Control Switch में कोई abnormality नहीं मिली। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे मामले की जांच समाप्त हो गई है।

नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने संसद के उच्च सदन में बताया कि विमान के पूरे thrust control module की अतिरिक्त जांच Boeing की सुविधा में अभी जारी है। यानी संबंधित तकनीकी प्रणाली के दूसरे हिस्सों का भी परीक्षण किया जा रहा है।

इससे स्पष्ट है कि जांच एजेंसियां केवल एक स्विच के परीक्षण तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि पूरे सिस्टम को तकनीकी रूप से जांच रही हैं।

DGCA की भूमिका

इस पूरे मामले में DGCA यानी Directorate General of Civil Aviation की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। फरवरी की घटना के बाद नियामक ने विमान की continued airworthiness सुनिश्चित करने के लिए आगे की जांच के निर्देश दिए थे।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, Boeing 787-8 विमान की Fuel Control Switch प्रणाली की OEM स्तर पर जांच DGCA अधिकारियों की निगरानी में की गई थी। जांच के परिणामों के आधार पर स्विच को serviceable माना गया था, लेकिन DGCA ने आगे की जांच के लिए OEM facility पर निरीक्षण जारी रखने का निर्णय लिया।

विमान यात्रियों के लिए इसका क्या मतलब है?

किसी विमान के तकनीकी हिस्से में शिकायत दर्ज होने के बाद उसकी जांच किया जाना विमानन क्षेत्र की सामान्य सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है। इस मामले में भी शिकायत सामने आने के बाद विमान को जांच के लिए रोका गया और संबंधित तकनीकी प्रणाली का निरीक्षण किया गया।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार Fuel Control Switch में कोई असामान्यता नहीं मिली है। हालांकि पूरी thrust control module की जांच जारी होने के कारण अंतिम निष्कर्ष आने तक पूरे मामले को पूरी तरह समाप्त मानना उचित नहीं होगा।

जांच अभी क्यों महत्वपूर्ण है?

विमानन सुरक्षा में किसी भी तकनीकी शिकायत को गंभीरता से लिया जाता है, खासकर तब जब वह इंजन नियंत्रण या ईंधन प्रणाली से संबंधित हो। यही कारण है कि संबंधित एजेंसियां केवल शिकायत किए गए हिस्से को देखने के बजाय पूरे सिस्टम की जांच कर रही हैं।

सरकार द्वारा संसद में दी गई जानकारी से यह भी स्पष्ट होता है कि तकनीकी जांच अभी जारी है और आगे की रिपोर्ट के आधार पर ही अंतिम तस्वीर सामने आएगी। Boeing की सुविधा में thrust control module की जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

निष्कर्ष

Air India के Boeing 787 विमान से जुड़े Fuel Control Switch मामले में फिलहाल कोई तकनीकी असामान्यता नहीं मिली है। फरवरी में लंदन-बेंगलुरु उड़ान के बाद पायलट की रिपोर्ट के आधार पर शुरू हुई जांच में Boeing ने संबंधित स्विच की विस्तृत जांच की। हालांकि विमान के पूरे thrust control module की अतिरिक्त तकनीकी जांच अभी जारी है।

इसलिए वर्तमान स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि Fuel Control Switch में कोई abnormality नहीं पाई गई है, लेकिन संबंधित तकनीकी जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। आगे की जांच और आधिकारिक निष्कर्ष के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी। ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 09:46:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>Air India Boeing 787, Fuel Control Switch, Air India News 2026, Boeing 787 News, DGCA News, Aviation News India, Air India Flight, विमान सुरक्षा</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत में साइबर ठगी के मामले बढ़े, सरकार ने लोगों को ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर किया अलर्ट</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/india-cyber-fraud-cases-rise-government-online-safety-alert</link>
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        <description><![CDATA[ नई दिल्ली। देश में बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर सरकार ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के नए तरीके भी सामने आ रहे हैं, जिनमें फर्जी कॉल, नकली वेबसाइट, ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी और बैंकिंग फ्रॉड शामिल हैं।

सरकार और साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और अपनी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। विशेषज्ञों के अनुसार, साइबर अपराधी लोगों को भरोसे में लेने के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं।

साइबर सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान के विस्तार के साथ ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। लोगों को मजबूत पासवर्ड रखने, दो-स्तरीय सुरक्षा (Two-Factor Authentication) का इस्तेमाल करने और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत शिकायत करने की सलाह दी गई है।

बैंकिंग सेक्टर भी ग्राहकों को लगातार जागरूक कर रहा है कि बैंक कभी भी फोन या मैसेज के जरिए गोपनीय जानकारी नहीं मांगते। किसी भी संदिग्ध लेनदेन की स्थिति में तुरंत संबंधित बैंक और साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सुरक्षा अब हर व्यक्ति की जिम्मेदारी बन गई है। सावधानी और जागरूकता के जरिए ऑनलाइन ठगी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 09:25:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>भारत में साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने लोगों से ऑनलाइन लेनदेन में सावधानी बरतने और डिजिटल सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की है।</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ी, ऑटो कंपनियां नए मॉडल लॉन्च करने की तैयारी में</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/india-electric-vehicle-demand-growth-auto-companies-new-models</link>
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        <description><![CDATA[ नई दिल्ली। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती लागत, पर्यावरण को लेकर बढ़ती जागरूकता और सरकार की नीतियों के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है।

ऑटोमोबाइल कंपनियां अब इलेक्ट्रिक कार, बाइक और स्कूटर के नए मॉडल बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं। कंपनियों का फोकस बेहतर बैटरी क्षमता, ज्यादा रेंज और कम चार्जिंग समय वाले वाहनों पर है ताकि ग्राहकों को बेहतर विकल्प मिल सकें।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को बढ़ावा देने में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार अहम भूमिका निभाएगा। देश के कई शहरों में चार्जिंग स्टेशन बढ़ाए जा रहे हैं, जिससे लोगों का भरोसा EV की ओर बढ़ रहा है।

सरकार भी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं के जरिए कंपनियों और ग्राहकों को प्रोत्साहित कर रही है। इसका उद्देश्य प्रदूषण कम करना और ऊर्जा आयात पर निर्भरता घटाना है।

ऑटो सेक्टर के जानकारों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी और बढ़ सकती है। खासतौर पर दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।

हालांकि, बैटरी की कीमत, चार्जिंग नेटवर्क और वाहन की शुरुआती लागत अभी भी इस क्षेत्र की बड़ी चुनौतियां हैं। कंपनियां इन समस्याओं को दूर करने के लिए नई तकनीक और किफायती मॉडल पर काम कर रही हैं। ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 09:20:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऑटो कंपनियां नए EV मॉडल लॉन्च कर बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी कर रही हैं।</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत में डिजिटल पेमेंट का बढ़ता दबदबा, UPI लेनदेन ने बनाया नया रिकॉर्ड</title>
        <link>https://dhakarsamachar.in/india-upi-digital-payment-growth-new-record</link>
        <guid>https://dhakarsamachar.in/india-upi-digital-payment-growth-new-record</guid>
        <description><![CDATA[ नई दिल्ली। भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए होने वाले लेनदेन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबार तक, डिजिटल पेमेंट अब देश की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुका है।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में UPI के इस्तेमाल में कई गुना वृद्धि हुई है। स्मार्टफोन और इंटरनेट की बढ़ती पहुंच ने डिजिटल भुगतान को आम लोगों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

सरकार का कहना है कि डिजिटल पेमेंट व्यवस्था से लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ी है और लोगों को बैंकिंग सेवाओं तक आसान पहुंच मिली है। UPI की मदद से लोग बिना नकद पैसे के कुछ ही सेकंड में भुगतान कर पा रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली प्रणालियों में शामिल हो गई है। छोटे व्यापारियों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी QR कोड आधारित भुगतान का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।

फिनटेक कंपनियां भी डिजिटल भुगतान के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आने वाले समय में सरकार और बैंकिंग सेक्टर का फोकस डिजिटल सुरक्षा, साइबर फ्रॉड रोकने और ग्रामीण इलाकों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर रहेगा।

UPI की सफलता को भारत के डिजिटल परिवर्तन की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है और इससे देश की कैशलेस अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है। ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 08:47:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Piyush Raghuwanshi</dc:creator>
        <media:keywords>भारत में डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। UPI लेनदेन में लगातार वृद्धि से देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।</media:keywords>
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