प्रधानमंत्री मोदी ने की नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा की समीक्षा
नई दिल्ली, 29 अगस्त 2026। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बीच भारत सरकार ने वहां फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और राहत कार्यों की स्थिति की समीक्षा तेज कर दी है। नेपाल के प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक, पर्यटक और तीर्थयात्री मौजूद थे, जिसके कारण भारत के लिए उनकी सुरक्षित निकासी और परिजनों तक सही जानकारी पहुंचाना प्राथमिकता बन गया है। भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने पर जोर नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई इलाकों में संपर्क व्यवस्था प्रभावित हुई है। सड़कें क्षतिग्रस्त होने और कुछ क्षेत्रों में मोबाइल तथा इंटरनेट सेवाओं में बाधा के कारण लोगों से संपर्क करने में परेशानी आ रही है। भारत सरकार ने नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिकों की स्थिति की जानकारी जुटाने के लिए नेपाली प्रशासन और भारतीय मिशन के साथ समन्वय बढ़ाया है। जिन लोगों का संपर्क अपने परिवारों से टूट गया है, उनकी जानकारी अलग-अलग माध्यमों से जुटाई जा रही है। तीर्थयात्रियों पर विशेष ध्यान नेपाल में भारतीय नागरिकों की संख्या अधिक होने का एक कारण धार्मिक और पर्यटन यात्राएं भी हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा, पशुपतिनाथ मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले कई भारतीय नागरिक नेपाल के रास्ते से आते-जाते हैं। आपदा के दौरान ऐसे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर परिवारों में चिंता बढ़ गई। सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद भारतीय नागरिकों को स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। राहत और बचाव अभियान जारी नेपाल में नेपाली सेना, पुलिस और स्थानीय राहत दल प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटे हुए हैं। कई स्थानों पर सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत दलों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है। जहां सड़क मार्ग से पहुंचना संभव नहीं है, वहां वैकल्पिक माध्यमों से लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। भोजन, पानी, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान प्रभावित लोगों तक पहुंचाना राहत अभियान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। भारत की ओर से लगातार समन्वय भारत और नेपाल के बीच भौगोलिक और सामाजिक संबंधों को देखते हुए दोनों देशों के अधिकारियों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है। भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ नेपाल के राहत प्रयासों में भी सहयोग कर रहा है। आपदा के बाद भारत की ओर से राहत सामग्री उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए हैं। जरूरत के अनुसार आगे भी सहायता भेजे जाने की संभावना है। परिवारों को सही जानकारी देने की चुनौती ऐसी आपदा के दौरान सोशल मीडिया पर कई तरह की अपुष्ट सूचनाएं तेजी से फैलती हैं। इससे प्रभावित लोगों के परिवारों में चिंता और बढ़ सकती है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक माध्यमों से प्राप्त जानकारी पर भरोसा करें। लापता लोगों के बारे में सही जानकारी जुटाने में समय लग सकता है, क्योंकि कई प्रभावित क्षेत्र अभी भी राहत टीमों की पहुंच से बाहर हैं। सीमा क्षेत्रों में भी निगरानी नेपाल से सटे भारतीय राज्यों में भी प्रशासन को सतर्क किया गया है। सीमा क्षेत्रों में आने-जाने वाले लोगों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। नेपाल से भारत लौटने वाले भारतीय नागरिकों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए संबंधित एजेंसियां समन्वय कर रही हैं। सीमा पर प्राकृतिक आपदा के कारण यातायात और आवागमन प्रभावित होने की स्थिति में लोगों को वैकल्पिक रास्तों और सुरक्षित मार्गों की जानकारी उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है। आपदा ने बढ़ाई क्षेत्रीय तैयारी की जरूरत नेपाल की हालिया प्राकृतिक आपदा ने हिमालयी क्षेत्र में आपदा प्रबंधन की चुनौतियों को एक बार फिर सामने ला दिया है। पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़, भूस्खलन और तेज बारिश के कारण लोगों को सुरक्षित निकालना मैदानी इलाकों की तुलना में काफी कठिन होता है। भारत और नेपाल दोनों के लिए भविष्य में सीमा पार आपदा चेतावनी और सूचना साझा करने की व्यवस्था को और मजबूत करना उपयोगी हो सकता है। आगे भी जारी रहेगा राहत अभियान फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जिन लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है, उनकी जानकारी जुटाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भारत सरकार की प्राथमिकता अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के साथ-साथ नेपाल के राहत प्रयासों में आवश्यक सहयोग देना है। स्थिति सामान्य होने तक दोनों देशों के अधिकारियों के बीच समन्वय जारी रहने की उम्मीद है।
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