जौहर विश्वविद्यालय के 48-भवनों को गिराने के नोटिस पर विरोध:वाराणसी में एमआईएम ने राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन,बोले-सरकार अपने संरक्षण में कराए पठन-पाठन

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के महानगर अध्यक्ष मुख्तार अहमद अंसारी के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने सोमवार को दोपहर 1 बजे जिला मुख्यालय पहुंचकर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 48 भवनों को ध्वस्त किए जाने संबंधी रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस को तत्काल वापस लेने की मांग की गई। जनता के सहयोग से बना जौहर विश्वविद्यालय मुख्तार अहमद अंसारी ने कहा - जौहर विश्वविद्यालय एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान है, जिसकी स्थापना सरकारी अनुदान और आम जनता के सहयोग से हुई है। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय में सभी धर्मों, वर्गों और समुदायों के हजारों छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं तथा बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय के भवनों को अवैध बताते हुए उन्हें गिराने की कार्रवाई शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा 48 भवनों को अवैध बताकर जारी किया गया नोटिस विधिसम्मत नहीं है। उनका कहना था कि जिस समय विश्वविद्यालय की स्थापना और भवनों का निर्माण हुआ, उस समय संबंधित क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं था। ऐसे में वर्षों बाद भवनों को अवैध बताकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। राज्य सरकार से मांग की कि जौहर विश्वविद्यालय को संरक्षण प्रदान किया जाये मुख्तार अहमद अंसारी ने कहा - वर्ष 1973 में उत्तर प्रदेश में विकास प्राधिकरणों की स्थापना के बाद प्रदेश में अनेक विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और शैक्षणिक संस्थान बने हैं। यदि भवन निर्माण के लिए नक्शा अथवा अन्य स्वीकृतियां आवश्यक थीं तो सरकार को प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थानों के संबंध में समान नीति अपनानी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के निर्माण की भी निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय के किसी भवन के निर्माण में तकनीकी या प्रशासनिक स्तर पर कोई कमी है तो सरकार को उसे ध्वस्त करने के बजाय नियमानुसार समाधान निकालना चाहिए, क्योंकि यह शिक्षा का केंद्र है और यहां हजारों विद्यार्थियों का भविष्य जुड़ा हुआ है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि जौहर विश्वविद्यालय को संरक्षण प्रदान किया जाए तथा वहां बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था के लिए आवश्यक सहयोग और अनुदान उपलब्ध कराया जाए। एआईएमआईएम पूरे प्रदेश में लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से इस मुद्दे को उठाएगी आगे की रणनीति के संबंध में पूछे जाने पर मुख्तार अहमद अंसारी ने कहा कि एआईएमआईएम पूरे प्रदेश में लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से इस मुद्दे को उठाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी तथा प्रदेश नेतृत्व के निर्देशन में उत्तर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर जनजागरण अभियान, ज्ञापन और शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो संविधान और कानून द्वारा प्रदत्त लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।

Jul 18, 2026 - 13:53
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जौहर विश्वविद्यालय के 48-भवनों को गिराने के नोटिस पर विरोध:वाराणसी में एमआईएम ने राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन,बोले-सरकार अपने संरक्षण में कराए पठन-पाठन
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के महानगर अध्यक्ष मुख्तार अहमद अंसारी के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने सोमवार को दोपहर 1 बजे जिला मुख्यालय पहुंचकर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 48 भवनों को ध्वस्त किए जाने संबंधी रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस को तत्काल वापस लेने की मांग की गई। जनता के सहयोग से बना जौहर विश्वविद्यालय मुख्तार अहमद अंसारी ने कहा - जौहर विश्वविद्यालय एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान है, जिसकी स्थापना सरकारी अनुदान और आम जनता के सहयोग से हुई है। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय में सभी धर्मों, वर्गों और समुदायों के हजारों छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं तथा बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय के भवनों को अवैध बताते हुए उन्हें गिराने की कार्रवाई शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा 48 भवनों को अवैध बताकर जारी किया गया नोटिस विधिसम्मत नहीं है। उनका कहना था कि जिस समय विश्वविद्यालय की स्थापना और भवनों का निर्माण हुआ, उस समय संबंधित क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं था। ऐसे में वर्षों बाद भवनों को अवैध बताकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। राज्य सरकार से मांग की कि जौहर विश्वविद्यालय को संरक्षण प्रदान किया जाये मुख्तार अहमद अंसारी ने कहा - वर्ष 1973 में उत्तर प्रदेश में विकास प्राधिकरणों की स्थापना के बाद प्रदेश में अनेक विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और शैक्षणिक संस्थान बने हैं। यदि भवन निर्माण के लिए नक्शा अथवा अन्य स्वीकृतियां आवश्यक थीं तो सरकार को प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थानों के संबंध में समान नीति अपनानी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के निर्माण की भी निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय के किसी भवन के निर्माण में तकनीकी या प्रशासनिक स्तर पर कोई कमी है तो सरकार को उसे ध्वस्त करने के बजाय नियमानुसार समाधान निकालना चाहिए, क्योंकि यह शिक्षा का केंद्र है और यहां हजारों विद्यार्थियों का भविष्य जुड़ा हुआ है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि जौहर विश्वविद्यालय को संरक्षण प्रदान किया जाए तथा वहां बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था के लिए आवश्यक सहयोग और अनुदान उपलब्ध कराया जाए। एआईएमआईएम पूरे प्रदेश में लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से इस मुद्दे को उठाएगी आगे की रणनीति के संबंध में पूछे जाने पर मुख्तार अहमद अंसारी ने कहा कि एआईएमआईएम पूरे प्रदेश में लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से इस मुद्दे को उठाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी तथा प्रदेश नेतृत्व के निर्देशन में उत्तर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर जनजागरण अभियान, ज्ञापन और शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो संविधान और कानून द्वारा प्रदत्त लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।

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