भारत पॉलीसिलिकॉन PLI योजना लाएगा
सोलर पैनल निर्माण में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम भारत सरकार देश को सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक नई पॉलीसिलिकॉन प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना लाने पर विचार कर रही है। इस प्रस्तावित योजना का उद्देश्य भारत में पॉलीसिलिकॉन का घरेलू उत्पादन शुरू करना, चीन से आयात पर निर्भरता कम करना और सोलर उद्योग के लिए एक मजबूत सप्लाई चेन तैयार करना है। वर्तमान में भारत सोलर मॉड्यूल और सोलर सेल का उत्पादन तो बड़े पैमाने पर कर रहा है, लेकिन इनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाला सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल पॉलीसिलिकॉन लगभग पूरी तरह विदेशों से आयात किया जाता है। ऐसे में सरकार इस कमी को दूर करने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना तैयार कर रही है। पॉलीसिलिकॉन एक अत्यधिक शुद्ध सिलिकॉन पदार्थ है, जिसे सोलर पैनलों का आधार माना जाता है। सबसे पहले पॉलीसिलिकॉन से इंगट (Ingot) बनाए जाते हैं, फिर उनसे वेफर (Wafer) तैयार होते हैं। इन वेफरों से सोलर सेल बनते हैं और अंत में इन्हीं सोलर सेल को जोड़कर फोटोवोल्टिक (PV) मॉड्यूल यानी सोलर पैनल तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा पॉलीसिलिकॉन का उपयोग सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और माइक्रोचिप निर्माण में भी होता है, इसलिए यह केवल ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं बल्कि रणनीतिक उद्योगों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार की प्रस्तावित PLI योजना मौजूदा सोलर प्रोत्साहन योजनाओं से अलग होगी। अभी तक सरकार मुख्य रूप से सोलर सेल और मॉड्यूल निर्माण को बढ़ावा देती रही है, लेकिन नई योजना का फोकस सप्लाई चेन के शुरुआती चरण पर रहेगा। इसके तहत भारत में 10 गीगावॉट से अधिक पॉलीसिलिकॉन उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। घरेलू कंपनियों को उत्पादन आधारित वित्तीय प्रोत्साहन, निवेश सहायता और आधुनिक निर्माण तकनीक अपनाने के लिए सहयोग दिया जाएगा, ताकि देश में पूरी सोलर वैल्यू चेन विकसित हो सके। इस योजना की आवश्यकता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। देश में सोलर ऊर्जा की मांग लगातार तेज़ी से बढ़ रही है और बड़े पैमाने पर सोलर पार्क, रूफटॉप सोलर परियोजनाएं तथा औद्योगिक सोलर प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। हालांकि अंतिम उत्पाद भारत में बन रहे हैं, लेकिन कच्चे माल के लिए विदेशी देशों पर निर्भरता लागत और आपूर्ति दोनों के लिहाज से जोखिम पैदा करती है। यदि वैश्विक स्तर पर सप्लाई बाधित होती है या आयात महंगा हो जाता है, तो भारतीय सोलर उद्योग पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। नई PLI योजना लागू होने से देश में हजारों करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई जा रही है। इससे पॉलीसिलिकॉन रिफाइनिंग, केमिकल प्रोसेसिंग, वेफर निर्माण, सोलर उपकरण उत्पादन और संबंधित विनिर्माण उद्योगों में नए कारखाने स्थापित हो सकते हैं। साथ ही बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ने से सोलर पैनलों की लागत धीरे-धीरे कम होगी और भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगी। आम उपभोक्ताओं के लिए इस योजना का तत्काल प्रभाव बिजली बिल पर दिखाई नहीं देगा, लेकिन लंबे समय में इसका बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। यदि सोलर उपकरणों का निर्माण पूरी तरह भारत में होने लगेगा, तो आयात लागत घटेगी, परियोजनाएं सस्ती होंगी और रूफटॉप सोलर अपनाना अधिक किफायती बन सकता है। साथ ही यह पहल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी, हरित ऊर्जा को बढ़ावा देगी और देश को स्वच्छ ऊर्जा निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
भारत पॉलीसिलिकॉन PLI योजना लाएगा पर आधारित विस्तृत हिंदी समाचार। यह 12–15 अगस्त 2026 की प्रमुख आर्थिक/बिजनेस खबरों के लिए bulk upload demo content है।
What's Your Reaction?