सरकार LIC में 6.5% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में
नई दिल्ली, 10 अगस्त 2026: केंद्र सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC में अपनी 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर ₹31,552 करोड़ जुटा लिए हैं। यह बिक्री Offer for Sale (OFS) के माध्यम से की गई और इसके बाद LIC में सरकार की हिस्सेदारी घटकर लगभग 90 प्रतिशत रह गई है। वहीं कंपनी में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़कर 10 प्रतिशत हो गई है। � यह सरकार के लिए LIC के IPO के बाद पहला बड़ा विनिवेश है। मई 2022 में LIC के IPO के दौरान सरकार ने 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची थी। इस बार की 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री को भारत के सबसे बड़े Offer for Sale में से एक माना जा रहा है। � सरकार ने क्यों बेची LIC की हिस्सेदारी? LIC में हिस्सेदारी बेचने का एक प्रमुख उद्देश्य SEBI के Minimum Public Shareholding (MPS) नियम को पूरा करना था। LIC को 16 मई 2027 तक कम से कम 10 प्रतिशत सार्वजनिक हिस्सेदारी हासिल करनी थी। OFS के बाद यह लक्ष्य समयसीमा से पहले ही पूरा हो गया। � Reuters +1 सरकार की ओर से हिस्सेदारी बेचने का दूसरा उद्देश्य अपने स्वामित्व वाली कंपनियों में सार्वजनिक भागीदारी बढ़ाना और विनिवेश के माध्यम से सरकारी राजस्व जुटाना भी है। कितनी हिस्सेदारी बेची गई? सरकार ने शुरुआत में LIC की 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव रखा था। इसके साथ अतिरिक्त 4 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का Green Shoe Option भी रखा गया था। मजबूत निवेशक मांग के बाद अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने का विकल्प इस्तेमाल किया गया और कुल बिक्री 6.5 प्रतिशत तक पहुंच गई। � NDTV Profit सरकार ने कुल लगभग 82.23 करोड़ LIC शेयर बेचे। बिक्री के लिए शुरुआती Floor Price ₹382 प्रति शेयर तय किया गया था। � सरकार को कितनी रकम मिली? 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री से केंद्र सरकार को कुल ₹31,552 करोड़ प्राप्त हुए। यह राशि सरकार के विनिवेश और परिसंपत्ति मौद्रीकरण से जुड़े राजस्व लक्ष्यों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। � रिपोर्टों के अनुसार, इस एक लेनदेन से सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के Miscellaneous Receipts के अपने बजट अनुमान का लगभग दो-तिहाई हिस्सा हासिल कर लिया। � LIC में अब सरकार की कितनी हिस्सेदारी? OFS से पहले LIC में सार्वजनिक हिस्सेदारी करीब 3.5 प्रतिशत थी। 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री के बाद सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़कर 10 प्रतिशत हो गई है। वहीं केंद्र सरकार की हिस्सेदारी घटकर लगभग 90 प्रतिशत रह गई है। इससे LIC ने SEBI के तय Minimum Public Shareholding के महत्वपूर्ण लक्ष्य को निर्धारित समय से काफी पहले हासिल कर लिया है। � निवेशकों की कैसी रही प्रतिक्रिया? LIC के OFS को निवेशकों की ओर से मजबूत प्रतिक्रिया मिली। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, बिक्री में पर्याप्त मांग देखने को मिली और Offer को oversubscription भी मिला। मजबूत संस्थागत मांग के चलते सरकार ने अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने के विकल्प का इस्तेमाल किया। � LawBeat +1 2022 के IPO के बाद पहली बड़ी बिक्री LIC का शेयर बाजार में IPO मई 2022 में आया था। उस समय केंद्र सरकार ने कंपनी में 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर लगभग ₹21,000 करोड़ जुटाए थे। इसके बाद 2026 की OFS बिक्री सरकार का LIC में पहला बड़ा follow-on divestment रहा। � Reuters सरकार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सौदा? LIC में हिस्सेदारी बिक्री से सरकार को एक तरफ बड़ी रकम प्राप्त हुई है, वहीं दूसरी तरफ कंपनी में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने का नियामकीय लक्ष्य भी पूरा हो गया है। यह सरकार की व्यापक Disinvestment Strategy का भी हिस्सा है, जिसके तहत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में सरकारी हिस्सेदारी को चरणबद्ध तरीके से कम करके बाजार में सार्वजनिक भागीदारी बढ़ाने की कोशिश की जाती है। निष्कर्ष LIC में सरकार की 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री अब पूरी हो चुकी है। OFS के जरिए केंद्र सरकार ने ₹31,552 करोड़ जुटाए और LIC में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़कर 10 प्रतिशत हो गई। सरकार की हिस्सेदारी करीब 90 प्रतिशत रह गई है। यह सौदा LIC के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी ने SEBI के Minimum Public Shareholding लक्ष्य को 16 मई 2027 की समयसीमा से पहले हासिल कर लिया है। � Source: 10 अगस्त 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर।
सरकार LIC में 6.5% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में पर आधारित विस्तृत हिंदी समाचार। यह 12–15 अगस्त 2026 की प्रमुख आर्थिक/बिजनेस खबरों के लिए bulk upload demo content है।
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