EPFO की वेतन सीमा बढ़कर 25 हजार रुपये, 51 लाख से अधिक कर्मचारियों को मिलेगा कवरेज
नई व्यवस्था के तहत 15 हजार से 25 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन पाने वाले कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग अब EPFO की अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में शामिल होगा। इससे संबंधित पात्र कर्मचारियों को लागू नियमों के अनुसार कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (EDLI) जैसी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। EPFO की वेतन सीमा आखिरी बार सितंबर 2014 में बढ़ाई गई थी। उस समय इसे 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया था। सितंबर 2026 में हुई नई वृद्धि के बाद सीमा 25 हजार रुपये हो गई है। सरकार के अनुसार, पिछले वर्षों में वेतन स्तर और औपचारिक रोजगार में बदलाव को देखते हुए यह संशोधन किया गया है। इस फैसले का सबसे सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जिनका वेतन 15 हजार से अधिक लेकिन 25 हजार रुपये प्रतिमाह तक है और जो पहले केवल वेतन सीमा के कारण अनिवार्य EPF कवरेज में नहीं आते थे। हालांकि, किसी कर्मचारी की वास्तविक पात्रता लागू वैधानिक और EPFO नियमों पर निर्भर करेगी। EPFO के तहत मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा में केवल भविष्य निधि बचत ही शामिल नहीं है। लागू प्रावधानों के अनुसार EPF से सेवानिवृत्ति के लिए बचत, EPS से पेंशन संबंधी सुरक्षा और EDLI के माध्यम से बीमा सुरक्षा जुड़ी होती है। नई सीमा के कारण इन योजनाओं की पहुंच पहले की तुलना में अधिक कर्मचारियों तक बढ़ सकती है। सरकार के अनुमान के मुताबिक इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य EPFO कवरेज में आ सकते हैं। वहीं, इस बदलाव से सरकार पर सालाना लगभग 11,339 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आने का अनुमान है। पांच वर्षों में अनुमानित व्यय करीब 56,696 करोड़ रुपये बताया गया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और EPFO को इस फैसले को लागू करने के लिए आवश्यक वैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी हैं। इसका उद्देश्य औपचारिक रोजगार से जुड़े अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में लाना है।
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