सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई पर सख्त टिप्पणी, राज्यों को दिए स्पष्ट निर्देश
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान राज्यों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी संपत्ति को बिना निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनाए ध्वस्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की कि कानून का शासन लोकतंत्र की मूल भावना है और प्रशासनिक कार्रवाई संविधान के दायरे में ही होनी चाहिए। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि नोटिस देना, पक्षकार को सुनवाई का अवसर प्रदान करना तथा वैधानिक प्रक्रिया पूरी करना प्रत्येक प्रशासनिक कार्रवाई की अनिवार्य शर्त है। कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों को निर्देश दिया कि भविष्य में किसी भी ध्वस्तीकरण अभियान से पहले निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि कई स्थानों पर बिना पर्याप्त नोटिस के मकानों और दुकानों पर बुलडोजर चलाया गया, जिससे लोगों के मौलिक अधिकार प्रभावित हुए। इस पर अदालत ने कहा कि यदि किसी निर्माण को अवैध माना जाता है, तब भी कार्रवाई केवल विधि सम्मत प्रक्रिया के अनुसार ही होगी। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला देशभर में चलने वाली प्रशासनिक ध्वस्तीकरण कार्रवाइयों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है। इससे भविष्य में नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित प्राधिकरणों से अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी है तथा निर्देशों का उल्लंघन होने पर उचित कार्रवाई की चेतावनी दी है।
What's Your Reaction?