उत्तर प्रदेश में महिलाओं की डेयरी से बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था, चार लाख महिलाएं जुड़ीं
लखनऊ, 8 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश में महिलाओं की भागीदारी से डेयरी क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। राज्य के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को दूध उत्पादन और उसके संगठित कारोबार से जोड़ने की पहल का असर अब बड़े स्तर पर दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े आंकड़ों के अनुसार करीब 31 जिलों की चार लाख महिलाएं महिला-नेतृत्व वाले डेयरी नेटवर्क का हिस्सा बन चुकी हैं। यह नेटवर्क प्रतिदिन लगभग 12.5 लाख लीटर दूध एकत्र कर रहा है। महिलाओं को मिला रोजगार का नया माध्यम ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी का काम लंबे समय से परिवारों की आय का हिस्सा रहा है, लेकिन अब इसे महिलाओं के लिए व्यवस्थित रोजगार और उद्यमिता के अवसर के रूप में विकसित किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण आजीविका कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को दूध उत्पादन, संग्रह और बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इस पहल से महिलाओं को घर के आसपास ही आय का साधन उपलब्ध हो रहा है। इससे उन्हें परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ अपने स्तर पर वित्तीय निर्णय लेने में भी मदद मिल रही है। 73 हजार से अधिक महिलाएं बनीं 'लखपति दीदी' डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का एक महत्वपूर्ण परिणाम यह है कि 73 हजार से अधिक महिलाएं 'लखपति दीदी' की श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। इसका मतलब है कि इन महिलाओं ने अपनी आजीविका गतिविधियों के जरिए सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक की आय हासिल करने की दिशा में सफलता पाई है। डेयरी को संगठित तरीके से बढ़ावा देने से महिलाओं के लिए केवल दूध बेचने तक सीमित अवसर नहीं रह जाते। पशुपालन, दूध संग्रह, स्थानीय बिक्री और संबंधित गतिविधियों में भी आर्थिक अवसर पैदा होते हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा फायदा डेयरी क्षेत्र की मजबूती का असर केवल महिलाओं की आय तक सीमित नहीं रहता। इससे पशुपालन, चारा, दूध संग्रह, परिवहन और स्थानीय बाजार से जुड़े कई लोगों को भी फायदा मिलता है। ग्रामीण परिवारों के लिए नियमित दूध उत्पादन आय का अपेक्षाकृत स्थिर स्रोत बन सकता है। इससे खेती पर निर्भरता कम करने और परिवार की कुल आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है। स्वयं सहायता समूहों की अहम भूमिका महिलाओं को डेयरी से जोड़ने में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका महत्वपूर्ण है। समूह के माध्यम से महिलाएं एक-दूसरे से जुड़कर संसाधनों और अनुभवों को साझा करती हैं। इससे छोटे स्तर पर शुरू की गई गतिविधियों को बड़े नेटवर्क से जोड़ने में आसानी होती है। सरकार की ग्रामीण आजीविका योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को केवल सहायता देना नहीं बल्कि उन्हें स्थायी आय के साधनों से जोड़ना है। डेयरी क्षेत्र में यह मॉडल तेजी से विस्तार करता दिखाई दे रहा है। आगे और विस्तार की उम्मीद उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े दूध उत्पादक राज्यों में शामिल है। ऐसे में डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिल सकती है। आने वाले समय में बेहतर पशुपालन तकनीक, दूध की गुणवत्ता, बाजार तक पहुंच और प्रशिक्षण जैसी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाता है तो महिलाओं की आय में और वृद्धि की संभावना है। महिलाओं के नेतृत्व में विकसित हो रहा यह डेयरी नेटवर्क उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता का नया मॉडल तैयार कर रहा है। चार लाख महिलाओं की भागीदारी और प्रतिदिन 12.5 लाख लीटर दूध संग्रह का आंकड़ा बताता है कि डेयरी अब केवल पारंपरिक पशुपालन नहीं रह गया है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए संगठित आर्थिक गतिविधि का रूप ले रहा है।
What's Your Reaction?