भारत के प्रत्यक्ष कर संग्रह में 13 प्रतिशत बढ़ोतरी, ₹12.12 लाख करोड़ पहुंचा आंकड़ा
भारत के सरकारी राजस्व से जुड़ा एक महत्वपूर्ण आंकड़ा सामने आया है। 17 सितंबर 2026 तक देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 13 प्रतिशत बढ़कर ₹12.12 लाख करोड़ पहुंच गया। यह वृद्धि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में दर्ज की गई है। प्रत्यक्ष कर में मुख्य रूप से व्यक्तिगत आयकर और कॉर्पोरेट आयकर जैसे कर शामिल होते हैं। आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह ₹14.32 लाख करोड़ से अधिक रहा। सकल संग्रह में रिफंड को घटाने से शुद्ध कर संग्रह का आंकड़ा प्राप्त होता है। इस साल रिफंड में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जिसके बावजूद शुद्ध संग्रह में दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की गई। कर संग्रह में कॉर्पोरेट टैक्स के साथ-साथ सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT का भी योगदान रहा। शेयर बाजार में होने वाले निर्धारित लेनदेन पर STT लगाया जाता है और बाजार गतिविधियों के बढ़ने या घटने का असर इसके संग्रह पर पड़ सकता है। प्रत्यक्ष कर संग्रह सरकार के वित्तीय प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे केंद्र सरकार को विभिन्न सार्वजनिक खर्चों और विकास से जुड़े कार्यक्रमों के लिए राजस्व उपलब्ध होता है। हालांकि कर संग्रह में वृद्धि को केवल एक कारण से जोड़ना उचित नहीं होता, क्योंकि इसमें आर्थिक गतिविधि, कर अनुपालन, कंपनियों के मुनाफे, व्यक्तिगत आय और बाजार से जुड़े लेनदेन सहित कई कारकों की भूमिका रहती है। इसी अवधि में भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़े अन्य संकेतक भी चर्चा में रहे। Business Standard के अनुसार, सरकार के शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह में वृद्धि के साथ विदेशी मुद्रा भंडार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और अन्य आर्थिक संकेतकों में भी बदलाव दर्ज किए गए हैं। प्रत्यक्ष कर संग्रह में बढ़ोतरी का एक पहलू करदाताओं की संख्या और अनुपालन से भी जुड़ा है। डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ आय और लेनदेन से संबंधित जानकारी के मिलान की क्षमता बढ़ी है। इससे कर प्रशासन को संभावित अंतर की पहचान करने और रिटर्न तथा भुगतान की निगरानी में मदद मिल सकती है। हालांकि, कर संग्रह बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति या हर क्षेत्र पर कर समान रूप से बढ़ा है। कुल आंकड़ा पूरे देश के कर संग्रह को दर्शाता है और इसमें अलग-अलग प्रकार के करदाताओं तथा आर्थिक गतिविधियों का संयुक्त प्रभाव शामिल होता है। आने वाले महीनों में प्रत्यक्ष कर संग्रह का रुझान सरकार की राजस्व स्थिति और वित्तीय योजना के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान कर संग्रह के अंतिम आंकड़े पूरे वर्ष के प्रदर्शन के बाद ही स्पष्ट होंगे।
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