अल नीनो तेजी से होगा मजबूत, 2027 तक बढ़ सकता है अत्यधिक गर्मी, बाढ़ और सूखे का खतरा
जिनेवा, 3 सितंबर 2026 | दुनिया के मौसम पर नजर रखने वाली प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था ने चेतावनी दी है कि अल नीनो की स्थिति अब स्थापित हो चुकी है और आने वाले महीनों में यह काफी मजबूत हो सकती है। इसके प्रभाव से वर्षा और तापमान के सामान्य पैटर्न में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इससे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बाढ़, सूखा, अत्यधिक गर्मी और अन्य मौसम संबंधी घटनाओं का खतरा बढ़ने की आशंका है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अल नीनो केवल प्रशांत महासागर के तापमान में होने वाला बदलाव नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर पड़ सकता है। समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी वातावरण के सामान्य परिसंचरण को प्रभावित करती है और इसके परिणामस्वरूप अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश और तापमान का पैटर्न बदल सकता है। 3 सितंबर 2026 को जारी नए मौसम अपडेट में बताया गया कि वर्तमान अल नीनो आने वाले महीनों में और मजबूत होने की संभावना रखता है। इसके प्रभाव 2026 के बाकी हिस्से और 2027 की शुरुआत तक महसूस किए जा सकते हैं। हालांकि इसका असर हर देश और क्षेत्र में एक जैसा नहीं होगा। क्या है अल नीनो? अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो मुख्य रूप से भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान के सामान्य से अधिक गर्म होने से जुड़ी होती है। प्रशांत महासागर पृथ्वी के सबसे बड़े महासागरों में से एक है और इसके तापमान में होने वाले बड़े बदलाव वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण को प्रभावित कर सकते हैं। समुद्र का गर्म पानी हवा और बादलों के बनने की प्रक्रिया को बदलता है, जिसका प्रभाव हजारों किलोमीटर दूर स्थित क्षेत्रों के मौसम पर भी पड़ सकता है। अल नीनो के दौरान कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है, जबकि कुछ दूसरे क्षेत्रों में सूखे की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी कारण वैज्ञानिक इसे वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण जलवायु घटनाओं में शामिल करते हैं। इस बार क्यों महत्वपूर्ण है अल नीनो? इस बार अल नीनो को लेकर चिंता इसलिए बढ़ी है क्योंकि वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह आने वाले महीनों में बहुत मजबूत स्थिति में पहुंच सकता है। यदि समुद्र की सतह का तापमान लंबे समय तक सामान्य से काफी अधिक रहता है, तो इसका असर वायुमंडलीय परिसंचरण पर भी मजबूत हो सकता है। इसके कारण कई देशों में तापमान और वर्षा के सामान्य पैटर्न में बदलाव आने की संभावना रहती है। इसका मतलब यह नहीं है कि दुनिया के हर हिस्से में एक ही तरह का मौसम देखने को मिलेगा। कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी बढ़ सकती है, तो कुछ जगहों पर भारी बारिश या बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। वहीं कुछ अन्य क्षेत्रों में लंबे समय तक सामान्य से कम बारिश हो सकती है। अत्यधिक गर्मी का बढ़ सकता है खतरा अल नीनो की मजबूत स्थिति के दौरान वैश्विक तापमान पर भी असर पड़ सकता है। पहले से बढ़ते वैश्विक तापमान के बीच एक मजबूत अल नीनो स्थिति अत्यधिक गर्मी की घटनाओं को और गंभीर बना सकती है। शहरों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इसका प्रभाव अधिक महसूस हो सकता है। लंबे समय तक सामान्य से अधिक तापमान रहने पर बिजली की मांग बढ़ सकती है क्योंकि लोग कूलिंग और एयर-कंडीशनिंग का अधिक इस्तेमाल करते हैं। अत्यधिक गर्मी का असर कृषि, जल संसाधन, ऊर्जा और दैनिक जीवन पर भी पड़ सकता है। खासकर ऐसे क्षेत्रों में जहां पहले से ही गर्मी और पानी की समस्या मौजूद है, वहां स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है। बाढ़ का भी बढ़ सकता है खतरा अल नीनो का एक महत्वपूर्ण प्रभाव वर्षा के वितरण में बदलाव हो सकता है। कुछ क्षेत्रों में सामान्य से बहुत अधिक बारिश होने की संभावना बढ़ सकती है। कम समय में अत्यधिक बारिश होने पर नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है और शहरी इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में भारी वर्षा से भूस्खलन का खतरा भी बढ़ सकता है। हालांकि किसी विशेष क्षेत्र में बाढ़ सीधे केवल अल नीनो के कारण होगी, ऐसा कहना सही नहीं होगा। स्थानीय मौसम प्रणालियां, मानसून, समुद्री परिस्थितियां और अन्य जलवायु कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फिर भी अल नीनो जैसे बड़े वैश्विक जलवायु पैटर्न मौसम की परिस्थितियों को प्रभावित कर सकते हैं और इसलिए वैज्ञानिक इसके विकास पर लगातार नजर रखते हैं। कुछ क्षेत्रों में सूखे की आशंका जहां एक ओर कुछ हिस्सों में अत्यधिक बारिश हो सकती है, वहीं दुनिया के कुछ दूसरे क्षेत्रों में सूखे का खतरा बढ़ सकता है। कम बारिश का सीधा असर कृषि और जल संसाधनों पर पड़ सकता है। यदि लंबे समय तक वर्षा सामान्य से कम रहती है तो जलाशयों और नदियों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। कृषि क्षेत्र में बारिश की कमी से फसलों की पैदावार प्रभावित होने की संभावना रहती है। इससे किसानों की आय के साथ-साथ खाद्य आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है। इसी कारण सरकारें और मौसम विभाग अल नीनो जैसी जलवायु घटनाओं के पूर्वानुमान को गंभीरता से लेते हैं। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? भारत के लिए अल नीनो का अध्ययन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था मानसून पर काफी निर्भर करती है। हालांकि अल नीनो और भारतीय मानसून के बीच संबंध हर साल बिल्कुल एक जैसा नहीं होता, लेकिन ऐतिहासिक रूप से मजबूत अल नीनो परिस्थितियों को भारतीय मानसून में बदलाव से जोड़ा जाता रहा है। भारत में वर्षा का वितरण कृषि उत्पादन, जलाशयों, बिजली उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। इसलिए 2026-27 के मौसम के लिए अल नीनो की स्थिति पर मौसम वैज्ञानिकों की निगरानी महत्वपूर्ण बनी रहेगी। यदि किसी क्षेत्र में बारिश कम होती है तो सिंचाई की जरूरत बढ़ सकती है। वहीं दूसरी ओर किसी क्षेत्र में अत्यधिक बारिश होने पर फसलों को नुकसान और बाढ़ की समस्या पैदा हो सकती है।
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