भारत की सौर ऊर्जा क्षमता का करीब 7% पूरी क्षमता से नहीं हो पा रहा इस्तेमाल, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर बनी चुनौती

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से विस्तार किया है। देश में सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ रही है और सरकार भी Renewable Energy को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। लेकिन अब एक महत्वपूर्ण चुनौती सामने आई है। 29 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत की लगभग 7% सौर ऊर्जा क्षमता को पीक उत्पादन के घंटों में पूरी क्षमता से इस्तेमाल नहीं किया जा पा रहा है। इसका प्रमुख कारण पर्याप्त ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर का उपलब्ध नहीं होना बताया गया है। इस समस्या का सीधा संबंध देश में बढ़ती Renewable Energy Capacity और उसे बिजली ग्रिड तक पहुंचाने की क्षमता से है। सौर ऊर्जा संयंत्रों से बिजली का उत्पादन मुख्य रूप से दिन के समय होता है और दोपहर के आसपास उत्पादन काफी बढ़ जाता है। ऐसे समय में यदि Transmission Network पर्याप्त मजबूत नहीं हो, तो उपलब्ध बिजली को पूरी तरह ग्रिड में भेजना मुश्किल हो जाता है। बढ़ती सौर क्षमता के साथ बढ़ी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत भारत ने Renewable Energy को अपनी ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना देश के अलग-अलग हिस्सों में तेजी से हुई है। इसका उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाना है। लेकिन केवल Solar Power Plants स्थापित करना पर्याप्त नहीं है। उनसे पैदा होने वाली बिजली को उन क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए जहां उसकी मांग है, मजबूत Transmission Network की जरूरत होती है। खासकर राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में जहां बड़े पैमाने पर Solar Projects स्थापित किए गए हैं, वहां से बिजली को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त ट्रांसमिशन क्षमता आवश्यक है। 7% क्षमता का पूरा इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा? सौर ऊर्जा उत्पादन दिन के दौरान मौसम और सूर्य की रोशनी पर निर्भर करता है। जब धूप तेज होती है, तब Solar Plants बड़ी मात्रा में बिजली पैदा कर सकते हैं। लेकिन यदि उसी समय Transmission Network में पर्याप्त क्षमता उपलब्ध नहीं होती, तो पूरी बिजली को ग्रिड में भेजना संभव नहीं होता। इसे आसान भाषा में ऐसे समझा जा सकता है कि देश के पास बिजली बनाने की क्षमता तो है, लेकिन उस बिजली को वहां तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त "रास्ता" नहीं है। यही कारण है कि उपलब्ध Solar Capacity का एक हिस्सा Peak Generation Hours में पूरी क्षमता से इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। Renewable Energy के लिए Storage भी महत्वपूर्ण इस चुनौती का एक समाधान Energy Storage Systems को बढ़ावा देना भी हो सकता है। Solar Power का उत्पादन मुख्य रूप से दिन में होता है, जबकि बिजली की मांग पूरे दिन बनी रहती है। Battery Energy Storage Systems के जरिए दिन में अतिरिक्त बिजली को स्टोर करके बाद में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि बड़े पैमाने पर Energy Storage Infrastructure विकसित करना महंगा हो सकता है। इसके लिए तकनीकी निवेश, मजबूत Grid Management और बेहतर Planning की जरूरत होगी। Transmission Network को मजबूत करने की आवश्यकता भारत में Renewable Energy Capacity बढ़ने के साथ Transmission Infrastructure पर भी समान गति से निवेश करना जरूरी हो गया है। यदि नई Solar और Wind Capacity लगातार जुड़ती रही लेकिन बिजली को स्थानांतरित करने की क्षमता उसी अनुपात में नहीं बढ़ी, तो भविष्य में ऐसी समस्याएं और बढ़ सकती हैं। इसलिए Energy Sector के विशेषज्ञों के सामने अब केवल यह सवाल नहीं है कि भारत कितनी Renewable Energy Capacity स्थापित कर सकता है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि उस क्षमता से पैदा होने वाली बिजली को कितनी कुशलता से Grid में शामिल किया जा सकता है। राज्यों के बीच बिजली पहुंचाने की चुनौती भारत में Renewable Energy Resources सभी राज्यों में समान रूप से उपलब्ध नहीं हैं। जिन राज्यों में तेज धूप और बड़े भू-भाग उपलब्ध हैं, वहां Solar Projects स्थापित करना अपेक्षाकृत आसान होता है। लेकिन बिजली की बड़ी मांग देश के दूसरे हिस्सों में हो सकती है। इस स्थिति में Inter-State Transmission Network की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। राजस्थान या गुजरात में पैदा हुई अतिरिक्त Solar Power को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने के लिए मजबूत राष्ट्रीय और क्षेत्रीय बिजली ग्रिड की आवश्यकता होती है। भारत के Clean Energy लक्ष्य पर असर भारत ने Renewable Energy को बढ़ावा देकर अपने Clean Energy और Climate Goals की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य रखा है। Solar Energy इस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन यदि स्थापित Solar Capacity का एक हिस्सा नियमित रूप से पूरी क्षमता से इस्तेमाल नहीं हो पाता है, तो इससे निवेश की दक्षता प्रभावित हो सकती है। इसलिए आने वाले वर्षों में Renewable Energy Projects के साथ Transmission और Storage Infrastructure को भी समान प्राथमिकता देना जरूरी होगा। आगे क्या किया जाना चाहिए? भारत के सामने अब तीन प्रमुख जरूरतें दिखाई देती हैं—नई Transmission Lines का निर्माण, Existing Grid को मजबूत करना और Energy Storage Capacity बढ़ाना। इसके साथ ही Renewable Energy Projects की Planning करते समय Transmission Availability को पहले से ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा। इससे ऐसे क्षेत्रों में अत्यधिक क्षमता स्थापित होने से बचा जा सकता है जहां बिजली को Grid तक पहुंचाने की पर्याप्त व्यवस्था अभी मौजूद नहीं है। निष्कर्ष भारत के Renewable Energy Sector के लिए सौर ऊर्जा क्षमता में तेजी से वृद्धि निश्चित रूप से सकारात्मक उपलब्धि है। लेकिन करीब 7% Solar Capacity का Peak Hours में पूरी क्षमता से इस्तेमाल नहीं हो पाना यह दिखाता है कि केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। देश को अब Solar Projects के साथ-साथ Transmission Infrastructure, Grid Moder

Jul 31, 2026 - 10:12
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भारत की सौर ऊर्जा क्षमता का करीब 7% पूरी क्षमता से नहीं हो पा रहा इस्तेमाल, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर बनी चुनौती

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