AI डेटा सेंटरों के लिए चार कंपनियों को ₹3,000 करोड़ से अधिक ऋण

भारत में AI और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। इसी बीच NaBFID ने कम से कम चार डेटा सेंटर परियोजनाओं के लिए ₹3,000 करोड़ से अधिक के ऋण मंजूर किए हैं। प्रत्येक परियोजना के लिए स्वीकृत ऋण की राशि ₹3,000 करोड़ से अधिक बताई गई है। डेटा सेंटर वे विशेष सुविधाएं हैं जहां बड़ी संख्या में सर्वर, स्टोरेज सिस्टम और नेटवर्क उपकरण संचालित किए जाते हैं। AI मॉडल को प्रशिक्षित करने और चलाने के लिए बड़ी कंप्यूटिंग क्षमता की आवश्यकता होती है। इसलिए AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटरों में निवेश भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है। भारत में क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल सेवाओं, ई-कॉमर्स और AI आधारित अनुप्रयोगों के विस्तार के कारण डेटा प्रोसेसिंग की मांग बढ़ रही है। इसके लिए कंपनियों को बड़े पैमाने पर सर्वर और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने की जरूरत पड़ती है। NaBFID का यह वित्तपोषण इसी बढ़ती पूंजीगत जरूरत के बीच सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, संस्था की ओर से डेटा सेंटर क्षेत्र में बड़े ऋणों को मंजूरी मिलना इस बात का संकेत है कि AI से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर अब बड़े निवेश वाले क्षेत्रों में शामिल हो रहा है। डेटा सेंटर परियोजनाओं में केवल भवन और सर्वर स्थापित करना ही शामिल नहीं होता। इनके लिए लगातार बिजली आपूर्ति, कूलिंग सिस्टम, नेटवर्क कनेक्टिविटी, बैकअप व्यवस्था और उच्च स्तर की सुरक्षा जैसी सुविधाओं की आवश्यकता होती है। इसलिए ऐसी परियोजनाओं में शुरुआती पूंजीगत निवेश काफी बड़ा हो सकता है। AI के विस्तार के साथ कंप्यूटिंग क्षमता की मांग और बढ़ने की संभावना है। बड़े भाषा मॉडल, जनरेटिव AI, मशीन लर्निंग, क्लाउड सेवाओं और औद्योगिक AI अनुप्रयोगों के लिए लगातार अधिक डेटा प्रोसेसिंग क्षमता चाहिए। इस कारण भारत में डेटा सेंटर निर्माण को डिजिटल अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। NaBFID ने डेटा सेंटरों के अलावा व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के लिए भी बड़ी मात्रा में पूंजी जुटाने की योजना बनाई है। रिपोर्ट के अनुसार, संस्था लगभग ₹1 लाख करोड़ जुटाने की योजना पर भी काम कर रही है। इसका इस्तेमाल विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के वित्तपोषण में किया जा सकता है। भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र के विस्तार का असर रोजगार और तकनीकी सेवाओं पर भी पड़ सकता है। निर्माण के दौरान इंजीनियरिंग और इंस्टॉलेशन से जुड़े काम पैदा होते हैं, जबकि संचालन के लिए नेटवर्किंग, आईटी, इलेक्ट्रिकल और कूलिंग सिस्टम से जुड़े विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है। हालांकि, डेटा सेंटरों के तेजी से विस्तार के साथ बिजली और पानी की खपत, ऊर्जा दक्षता तथा पर्यावरणीय प्रभाव जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे। भविष्य में इस क्षेत्र के विकास में ऊर्जा-कुशल तकनीक और नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Sep 21, 2026 - 15:11
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AI डेटा सेंटरों के लिए चार कंपनियों को ₹3,000 करोड़ से अधिक ऋण

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