IMF ने जताई चिंता, तेल की बढ़ती कीमतें और कमजोर मानसून भारत की आर्थिक वृद्धि पर डाल सकते हैं असर
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। IMF के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतें और सामान्य से कमजोर मानसून वित्त वर्ष 2026-27 में देश की आर्थिक वृद्धि के लिए सबसे बड़े जोखिम साबित हो सकते हैं। IMF का कहना है कि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका सीधा असर महंगाई, उत्पादन लागत और आर्थिक विकास पर पड़ सकता है। वहीं, कमजोर मानसून का प्रभाव कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग पर भी देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.4% रखा गया है। हालांकि, IMF का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहीं और मानसून में सुधार हुआ, तो आने वाले वर्षों में आर्थिक गतिविधियों में तेजी देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के लिए महंगाई पर नियंत्रण, ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना और कृषि क्षेत्र को समर्थन देना आने वाले महीनों में अहम रहेगा। आर्थिक जानकारों के अनुसार, वैश्विक बाजार और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि दोनों कारक भारत की विकास दर को प्रभावित कर सकते हैं।
What's Your Reaction?