जुलाई में सामान्य रही मानसूनी बारिश, एल नीनो की आशंकाओं के बावजूद सामान्य से बेहद करीब दर्ज हुई वर्षा

देशभर में मानसून को लेकर पिछले कई महीनों से जताई जा रही चिंताओं के बीच जुलाई 2026 के अंत में राहत भरी तस्वीर सामने आई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई महीने के दौरान देश में हुई कुल वर्षा सामान्य के बेहद करीब रही। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 30 जुलाई तक भारत में 270.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत 271.9 मिमी है। यानी पूरे महीने की बारिश सामान्य श्रेणी में रही। इस वर्ष मौसम विशेषज्ञों ने पहले ही संभावना जताई थी कि एल नीनो (El Niño) के प्रभाव के कारण जुलाई में वर्षा सामान्य से कम रह सकती है। हालांकि वास्तविक आंकड़ों ने इस अनुमान को काफी हद तक गलत साबित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार भारतीय मानसून केवल एल नीनो से प्रभावित नहीं हुआ, बल्कि हिंद महासागर की मौसमी परिस्थितियों और अन्य वैश्विक जलवायु कारकों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। क्या होता है एल नीनो? एल नीनो प्रशांत महासागर के सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने की एक प्राकृतिक जलवायु घटना है। सामान्यतः इसके प्रभाव से भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है और कई राज्यों में वर्षा की कमी देखने को मिलती है। इसी कारण इस वर्ष भी मौसम विशेषज्ञों ने औसत से कम बारिश की आशंका जताई थी। लेकिन जुलाई के आंकड़ों ने दिखाया कि केवल एल नीनो के आधार पर मानसून का सटीक अनुमान लगाना अब पहले जितना आसान नहीं रह गया है। जलवायु परिवर्तन का बढ़ता प्रभाव मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भारतीय मानसून का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पहले जहां एल नीनो और ला नीना जैसी घटनाएं मानसून की दिशा तय करने में प्रमुख भूमिका निभाती थीं, वहीं अब कई अन्य वैश्विक और क्षेत्रीय कारक भी वर्षा को प्रभावित कर रहे हैं। इसी वजह से पारंपरिक मौसम मॉडल भविष्यवाणी करने में पहले की तुलना में कम सटीक साबित हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में मौसम पूर्वानुमान तैयार करते समय केवल एल नीनो पर निर्भर रहने के बजाय समुद्री तापमान, वायुमंडलीय दबाव, हिंद महासागर की परिस्थितियां और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को भी समान महत्व देना होगा। किसानों के लिए राहत सामान्य श्रेणी की वर्षा किसानों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। खरीफ फसलों की बुवाई के लिए जुलाई का महीना सबसे महत्वपूर्ण होता है। पर्याप्त वर्षा होने से धान, मक्का, सोयाबीन, दालें और अन्य खरीफ फसलों को लाभ मिलने की संभावना बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगस्त में भी संतुलित वर्षा जारी रहती है तो इस वर्ष कृषि उत्पादन बेहतर रह सकता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि पूरे देश में वर्षा का वितरण समान नहीं रहा। कुछ राज्यों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई, जबकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी वर्षा की कमी बनी हुई है। इसलिए स्थानीय स्तर पर किसानों को मौसम विभाग की सलाह के अनुसार कृषि कार्य करने की आवश्यकता होगी। मौसम विभाग की सलाह भारतीय मौसम विभाग लगातार राज्यों को मौसम संबंधी अपडेट जारी कर रहा है। जिन क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना है वहां लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, जबकि वर्षा की कमी वाले क्षेत्रों के लिए भी नियमित निगरानी की जा रही है। मौसम विभाग का कहना है कि मानसून की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता अनुसार नए पूर्वानुमान जारी किए जाएंगे। निष्कर्ष जुलाई 2026 का मानसून भारत के लिए राहत लेकर आया है। एल नीनो की आशंकाओं के बावजूद देश में कुल वर्षा सामान्य स्तर के लगभग बराबर दर्ज की गई, जिससे किसानों, जल संसाधन प्रबंधन और कृषि क्षेत्र को सकारात्मक संकेत मिले हैं। हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि बदलते जलवायु परिदृश्य को देखते हुए भविष्य में मौसम पूर्वानुमान के तरीकों में सुधार और अधिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता होगी।

Jul 31, 2026 - 09:28
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