भारत में नए निवेश को बढ़ावा देने के लिए Bilateral Investment Treaty मॉडल की समीक्षा, सरकार जल्द ले सकती है फैसला

नई दिल्ली, 7 अगस्त 2026: भारत सरकार विदेशी निवेश को आकर्षित करने और निवेशकों के लिए देश को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से अपने Bilateral Investment Treaty (BIT) मॉडल की समीक्षा कर रही है। वित्त मंत्रालय की आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने बताया कि सरकार मौजूदा मॉडल में मौजूद उन प्रावधानों की पहचान कर रही है जिन्हें विदेशी निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल बनाने की जरूरत हो सकती है। सरकार की यह समीक्षा ऐसे समय हो रही है जब भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI के शुद्ध प्रवाह में कमी देखने को मिली है। वित्त वर्ष मार्च 2026 में समाप्त होने वाले वर्ष में भारत का शुद्ध FDI प्रवाह केवल 7.7 अरब डॉलर रहा, जो कुछ अन्य प्रमुख एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम था। सरकार अब निवेश व्यवस्था में सुधार करके विदेशी कंपनियों के लिए भारत में निवेश करना आसान बनाने की दिशा में काम कर रही है। क्या होता है Bilateral Investment Treaty? Bilateral Investment Treaty यानी BIT दो देशों के बीच किया जाने वाला एक समझौता है, जिसका उद्देश्य एक-दूसरे के देश में निवेश करने वाली कंपनियों और निवेशकों को कुछ कानूनी सुरक्षा प्रदान करना होता है। ऐसे समझौतों में निवेश की सुरक्षा, सरकारी कार्रवाई से जुड़े विवादों और निवेशकों के कानूनी अधिकारों जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। भारत ने अलग-अलग देशों के साथ ऐसे समझौते किए हैं, लेकिन वर्तमान मॉडल में कुछ प्रावधानों को लेकर विदेशी निवेशकों ने चिंता जताई है। मौजूदा नियम में क्या समस्या है? भारत के मौजूदा BIT मॉडल के तहत विदेशी निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय Arbitration यानी मध्यस्थता का रास्ता अपनाने से पहले भारत में उपलब्ध घरेलू कानूनी उपायों का इस्तेमाल करना पड़ता है। Reuters के अनुसार, एक महत्वपूर्ण प्रावधान के तहत निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय Arbitration तक पहुंचने से पहले पांच वर्ष तक घरेलू कानूनी विकल्पों को आजमाना पड़ सकता है। विदेशी निवेशकों और कुछ उद्योग संगठनों का मानना है कि इतनी लंबी प्रक्रिया निवेश संबंधी विवादों के समाधान को धीमा कर सकती है। इससे भारत में बड़े विदेशी निवेश के फैसलों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है। सरकार क्यों कर रही है समीक्षा? सरकार का मुख्य उद्देश्य भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है। भारत में बड़ी अर्थव्यवस्था, विशाल घरेलू बाजार और तेजी से बढ़ते बुनियादी ढांचे के कारण विदेशी कंपनियों के लिए निवेश की काफी संभावनाएं हैं। लेकिन निवेशक केवल बाजार के आकार को नहीं देखते। वे कानूनी सुरक्षा, विवाद समाधान की प्रक्रिया, टैक्स व्यवस्था और नीतिगत स्थिरता जैसे कई पहलुओं पर भी विचार करते हैं। इसीलिए सरकार BIT मॉडल को बदलने या उसमें सुधार करने के विकल्पों पर विचार कर रही है। उद्योग जगत भी चाहता है तेज विवाद समाधान भारत के उद्योग संगठनों ने भी निवेश विवादों के समाधान को तेज करने की मांग की है। उनका मानना है कि विदेशी कंपनियों को निवेश संबंधी विवादों में स्पष्ट और समयबद्ध कानूनी प्रक्रिया मिलनी चाहिए। यदि विवादों का समाधान लंबे समय तक चलता है, तो इससे निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। सरकार इसी तरह की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए मौजूदा BIT मॉडल की समीक्षा कर रही है। भारत का FDI प्रदर्शन भारत लंबे समय से विदेशी निवेश को आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण स्रोत मानता रहा है। विदेशी कंपनियों से आने वाला निवेश नई फैक्ट्रियां स्थापित करने, तकनीक लाने और रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद कर सकता है। हालांकि हालिया आंकड़ों में भारत का Net FDI कमजोर रहा है। Reuters के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में शुद्ध FDI प्रवाह 7.7 अरब डॉलर रहा। इसकी तुलना में वियतनाम और इंडोनेशिया जैसी अर्थव्यवस्थाएं विदेशी निवेश आकर्षित करने में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। कुछ नए समझौते भी हुए भारत ने हाल के समय में इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ नए Bilateral Investment Treaties किए हैं। इससे पता चलता है कि सरकार निवेश संबंधी समझौतों को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय उन्हें नए आर्थिक माहौल के अनुसार बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अब सरकार व्यापक स्तर पर अपने मॉडल की समीक्षा कर रही है ताकि भविष्य में अन्य देशों के साथ होने वाले निवेश समझौतों में ज्यादा प्रभावी और संतुलित व्यवस्था बनाई जा सके। कैबिनेट जल्द ले सकता है फैसला वित्त मंत्रालय की अधिकारी के अनुसार, BIT मॉडल में संभावित बदलावों को लेकर विभिन्न पक्षों से विचार-विमर्श चल रहा है। सरकार उन प्रावधानों की पहचान कर रही है जिन्हें विदेशी निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल बनाया जा सकता है। मामले पर अंतिम फैसला केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा लिया जा सकता है। हालांकि बदलावों की सटीक समयसीमा और अंतिम प्रावधान अभी तय नहीं हुए हैं। निष्कर्ष 7 अगस्त 2026 को सामने आई जानकारी के अनुसार, भारत सरकार अपने Bilateral Investment Treaty मॉडल की समीक्षा कर रही है। इसका उद्देश्य विदेशी निवेशकों के लिए भारत में निवेश का माहौल बेहतर बनाना और निवेश विवादों के समाधान को अधिक प्रभावी बनाना है। भारत के शुद्ध FDI प्रवाह में हालिया कमजोरी के बीच यह समीक्षा महत्वपूर्ण है। यदि सरकार निवेश सुरक्षा और विवाद समाधान से जुड़े नियमों में संतुलित सुधार करती है, तो इससे भविष्य में विदेशी पूंजी आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।

Aug 8, 2026 - 17:51
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