भारत ने अमेरिकी एथेनॉल आयात को लेकर साफ किया रुख, ट्रेड डील में कोई प्रतिबद्धता नहीं
नई दिल्ली, 6 अगस्त 2026: भारत सरकार ने अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ता में अमेरिकी एथेनॉल के बड़े पैमाने पर आयात को लेकर किसी भी तरह की प्रतिबद्धता से इनकार किया है। वाणिज्य मंत्रालय ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि भारत ने अमेरिका से ईंधन एथेनॉल के आयात के संबंध में कोई रियायत या प्रतिबद्धता नहीं दी है। मंत्रालय का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। दोनों देश बाजार पहुंच बढ़ाने और व्यापार बाधाओं को कम करने के लिए समझौते पर चर्चा कर रहे हैं। भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य पेट्रोलियम ईंधन के साथ घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाना है। Reuters के अनुसार, भारत में पेट्रोल के साथ 20% एथेनॉल मिश्रण यानी E20 की नीति लागू है। मौजूदा सरकारी नियम स्थानीय स्तर पर उत्पादित एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाने की अनुमति देते हैं। एथेनॉल ब्लेंडिंग से भारत को पेट्रोलियम आयात पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र से जुड़े कच्चे माल के उपयोग को भी बढ़ावा मिलता है। अमेरिका से आयात को लेकर क्या कहा सरकार ने? वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऐसी खबरें या सुझाव कि भारत अमेरिका से बड़े पैमाने पर ईंधन एथेनॉल आयात करने के लिए अपनी नीति बदलने जा रहा है, भ्रामक हैं। इस बयान से यह साफ होता है कि भारत फिलहाल घरेलू उत्पादन और अपनी मौजूदा एथेनॉल ब्लेंडिंग व्यवस्था पर जोर दे रहा है। भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में क्यों महत्वपूर्ण है मामला? भारत और अमेरिका दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने के लिए एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। इसका उद्देश्य दोनों बाजारों में वस्तुओं की पहुंच बढ़ाना और कुछ व्यापारिक बाधाओं को कम करना है। एथेनॉल का मुद्दा इस बातचीत में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका भी एथेनॉल का बड़ा उत्पादक है। यदि भारत बड़े पैमाने पर आयात की अनुमति देता, तो इसका घरेलू एथेनॉल उत्पादकों पर प्रभाव पड़ सकता था। घरेलू उत्पादकों के लिए महत्व भारत में एथेनॉल का उत्पादन कृषि आधारित कच्चे माल से होता है। ऐसे में घरेलू एथेनॉल उद्योग किसानों, चीनी उद्योग और अन्य कृषि आधारित क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। यदि विदेशी एथेनॉल का बड़े पैमाने पर आयात किया जाता है, तो घरेलू उत्पादकों को कीमत और बाजार हिस्सेदारी के स्तर पर प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। सरकार के मौजूदा बयान से संकेत मिलता है कि घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता दी जा रही है। E20 नीति का उद्देश्य E20 नीति के तहत पेट्रोल में 20% तक एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा गया है। इसका एक उद्देश्य पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा को कम करना है। इसके अलावा एथेनॉल को वैकल्पिक ईंधन के रूप में बढ़ावा देने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को समर्थन देने की कोशिश की जा रही है। अमेरिका के साथ समझौते की स्थिति Reuters के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है। एक अमेरिकी अधिकारी ने जुलाई में कहा था कि दोनों देशों के बीच समझौता तीन से चार महीनों के भीतर हो सकता है। हालांकि अंतिम समझौते की शर्तें और समयसीमा अभी निश्चित नहीं हैं। इसलिए एथेनॉल सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बातचीत आगे भी जारी रह सकती है। निष्कर्ष 6 अगस्त 2026 को भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में अमेरिकी ईंधन एथेनॉल के बड़े पैमाने पर आयात को लेकर भारत ने कोई प्रतिबद्धता नहीं दी है। सरकार ने ऐसे किसी संभावित नीति बदलाव की खबरों को भ्रामक बताया है। भारत फिलहाल घरेलू रूप से उत्पादित एथेनॉल के इस्तेमाल और अपनी E20 ब्लेंडिंग नीति पर जोर दे रहा है।
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