RBI ने रुपये को संभालने के लिए बाजार में किया हस्तक्षेप, डॉलर के मुकाबले 95.30 पर बंद हुआ रुपया
मुंबई, 10 अगस्त 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सोमवार को विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये को सहारा देने के लिए हस्तक्षेप किया। कारोबारियों के अनुसार, केंद्रीय बैंक की संभावित डॉलर बिक्री ने रुपये में नई बिकवाली को सीमित करने में मदद की। दिन के कारोबार के अंत में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.30 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.2075 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। रुपये पर एक तरफ कच्चे तेल की मजबूत कीमतों का दबाव बना हुआ था, वहीं दूसरी तरफ RBI की संभावित बाजार कार्रवाई ने मुद्रा में तेज गिरावट को रोकने में मदद की। कारोबारियों का मानना है कि केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप से बाजार में रुपये के खिलाफ नई शॉर्ट पोजीशन लेने वाले कारोबारियों में भी सावधानी बढ़ी है। रुपये पर क्यों बना दबाव? अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती भारतीय रुपये के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। जब तेल महंगा होता है तो तेल आयात करने के लिए अधिक डॉलर की जरूरत पड़ती है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ सकती है और रुपये पर दबाव आ सकता है। 10 अगस्त के कारोबार में भी तेल की कीमतों में मजबूती रुपये के लिए नकारात्मक कारक रही। हालांकि RBI के संभावित हस्तक्षेप ने इस दबाव को कुछ हद तक संतुलित किया। RBI का हस्तक्षेप क्या होता है? जब विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये पर बहुत ज्यादा दबाव आता है, तो RBI बाजार में डॉलर की खरीद या बिक्री के जरिए उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने की कोशिश कर सकता है। यदि RBI डॉलर बेचता है, तो बाजार में डॉलर की उपलब्धता बढ़ सकती है और रुपये में अचानक गिरावट को रोकने में मदद मिल सकती है। इसका उद्देश्य किसी एक निश्चित विनिमय दर को स्थायी रूप से तय करना जरूरी नहीं होता, बल्कि बाजार में अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करना भी हो सकता है। कारोबारियों ने क्या बताया? Reuters से बातचीत में चार कारोबारियों ने कहा कि RBI ने सोमवार को विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये को समर्थन देने के लिए हस्तक्षेप किया होने की संभावना है। इससे बाजार में यह धारणा मजबूत हुई कि केंद्रीय बैंक रुपये में बहुत तेज गिरावट को रोकने के लिए सक्रिय है। हालांकि RBI की ओर से इस विशेष कारोबारी सत्र में हस्तक्षेप की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी। इसलिए इसे रिपोर्ट में “संभावित हस्तक्षेप” के रूप में ही प्रस्तुत करना उचित है। रुपये की स्थिति सोमवार को रुपया मामूली कमजोर होकर 95.30 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह पिछले बंद स्तर 95.2075 की तुलना में हल्की गिरावट थी। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में दबाव मौजूद होने के बावजूद मुद्रा में कोई बहुत बड़ी दैनिक गिरावट नहीं हुई। विदेशी मुद्रा बाजार पर असर RBI के संभावित हस्तक्षेप का एक महत्वपूर्ण असर बाजार की धारणा पर पड़ता है। यदि कारोबारियों को लगता है कि केंद्रीय बैंक अत्यधिक गिरावट की स्थिति में बाजार में सक्रिय हो सकता है, तो वे रुपये के खिलाफ बड़ी शॉर्ट पोजीशन लेने में सावधानी बरत सकते हैं। Reuters के अनुसार, RBI की संभावित कार्रवाई ने रुपये के खिलाफ नई शॉर्ट पोजीशन को हतोत्साहित करने में मदद की। आगे किन कारकों पर रहेगी नजर? आने वाले दिनों में रुपये की दिशा कई घरेलू और वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें सबसे महत्वपूर्ण कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी डॉलर की वैश्विक स्थिति, विदेशी निवेश का प्रवाह और RBI की मुद्रा बाजार नीति शामिल हैं। यदि तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो रुपये पर दबाव जारी रह सकता है। वहीं विदेशी पूंजी का मजबूत प्रवाह रुपये को कुछ समर्थन दे सकता है। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्व रुपये की विनिमय दर का असर आयात और निर्यात दोनों पर पड़ता है। कमजोर रुपया भारत के लिए कच्चे तेल और अन्य आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ा सकता है। दूसरी ओर, कुछ निर्यातकों को कमजोर रुपये से प्रतिस्पर्धात्मक फायदा मिल सकता है। इसी वजह से RBI के लिए मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखना व्यापक आर्थिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। निष्कर्ष 10 अगस्त 2026 को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.30 पर बंद हुआ। कारोबारियों के अनुसार RBI ने रुपये को समर्थन देने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप किया, जबकि मजबूत तेल कीमतों ने मुद्रा पर दबाव बनाए रखा। RBI की संभावित कार्रवाई से रुपये में तेज गिरावट को सीमित करने और बाजार में शॉर्ट पोजीशन को हतोत्साहित करने में मदद मिली।
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