भारत में चीनी की कीमतों पर लगाम के लिए एथेनॉल नीति में बदलाव पर विचार, गन्ने के इस्तेमाल पर रोक संभव

मुंबई/नई दिल्ली, 11 अगस्त 2026: भारत सरकार चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और घरेलू चीनी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एथेनॉल उत्पादन में गन्ने के इस्तेमाल को सीमित करने के विकल्प पर विचार कर रही है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार अक्टूबर से शुरू होने वाले नए सीजन में एथेनॉल के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले गन्ने की मात्रा पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है। यह संभावित कदम ऐसे समय सामने आया है जब देश में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के आसपास पहुंच गई हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में बारिश की स्थिति को लेकर भी चिंता बनी हुई है। कम बारिश से अगले साल गन्ने और चीनी के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। सरकार क्यों कर रही है विचार? भारत में गन्ने का इस्तेमाल मुख्य रूप से चीनी और एथेनॉल दोनों के उत्पादन में होता है। पिछले वर्षों में सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने के लिए एथेनॉल उत्पादन को प्रोत्साहित किया है। लेकिन यदि गन्ने की उपलब्धता कम होती है और उसका एक बड़ा हिस्सा एथेनॉल उत्पादन में चला जाता है, तो चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध कच्चा माल कम हो सकता है। इससे बाजार में चीनी की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसी वजह से सरकार अब दोनों क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाने पर विचार कर रही है। चीनी उत्पादन पर बारिश का असर महाराष्ट्र और कर्नाटक भारत के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य हैं। Reuters के अनुसार, इन राज्यों में कम बारिश को लेकर चिंता बढ़ी है। गन्ने की खेती के लिए पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है। यदि मानसून कमजोर रहता है, तो गन्ने की पैदावार प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर चीनी मिलों को मिलने वाले गन्ने की मात्रा और आने वाले सीजन के चीनी उत्पादन पर पड़ सकता है। एथेनॉल ब्लेंडिंग भी महत्वपूर्ण भारत ने पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति को तेजी से आगे बढ़ाया है। इसका उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना और किसानों से जुड़े कृषि उत्पादों के लिए अतिरिक्त बाजार तैयार करना है। इसलिए सरकार के सामने चुनौती यह है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग के लक्ष्य को बनाए रखते हुए घरेलू चीनी की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए। चीनी की कीमतों पर दबाव घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी से सरकार और उद्योग जगत की चिंता बढ़ी है। यदि उत्पादन में कमी आती है तो कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है। गन्ने के इस्तेमाल को एथेनॉल और चीनी के बीच नियंत्रित करने से सरकार बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश कर सकती है। किसानों पर क्या असर हो सकता है? गन्ने से जुड़े किसानों के लिए चीनी मिलों और एथेनॉल उत्पादकों की मांग महत्वपूर्ण होती है। नीति में बदलाव से गन्ने की खरीद और उसके इस्तेमाल का पैटर्न बदल सकता है। हालांकि अभी सरकार ने अंतिम फैसला नहीं लिया है। इसलिए किसानों पर संभावित प्रभाव के बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा। क्या E20 नीति प्रभावित होगी? एथेनॉल के इस्तेमाल को सीमित करने पर यह सवाल उठ सकता है कि इसका असर भारत के पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य पर पड़ेगा या नहीं। सरकार को एक तरफ घरेलू ईंधन नीति के लक्ष्यों को आगे बढ़ाना है और दूसरी तरफ चीनी की घरेलू मांग तथा कीमतों को नियंत्रित रखना है। इसलिए आने वाले सीजन के लिए एथेनॉल आवंटन और गन्ने के इस्तेमाल से जुड़े फैसले महत्वपूर्ण होंगे। आगे क्या होगा? Reuters के अनुसार, इस मामले में सरकार के भीतर विचार-विमर्श चल रहा है और अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। संभावित नियम अक्टूबर से शुरू होने वाले नए गन्ना सीजन के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। सरकार का अंतिम फैसला चीनी उत्पादन के अनुमान, गन्ने की उपलब्धता, एथेनॉल की जरूरत और बाजार में चीनी की कीमतों जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा। निष्कर्ष 11 अगस्त 2026 को सामने आई Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार चीनी की बढ़ती कीमतों और संभावित उत्पादन कमी को देखते हुए एथेनॉल उत्पादन में गन्ने के इस्तेमाल को सीमित करने पर विचार कर रही है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश से अगले सीजन के गन्ने और चीनी उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है। हालांकि अभी इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

Aug 12, 2026 - 17:26
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भारत में चीनी की कीमतों पर लगाम के लिए एथेनॉल नीति में बदलाव पर विचार, गन्ने के इस्तेमाल पर रोक संभव

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