70 लाख की हाई-टेक सुरक्षा अब ‘भगवान भरोसे’, सिम रिचार्ज न होने से 40 गांवों की निगरानी ठप!‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ फेल: 70 लाख की हाई-टेक सुरक्षा अब ‘भगवान भरोसे’, सिम रिचार्ज न होने से 40 गांवों की निगरानी ठप!
वाराणसी (चोलापुर): अपराध पर लगाम लगाने और ग्रामीण सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए शुरू किया गया ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ अपनी ही प्रशासनिक लापरवाही का शिकार हो गया है। चोलापुर विकास खंड के 40 गांवों में 70 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च कर लगाए गए 282 सीसीटीवी कैमरे मात्र दो महीने में ही ‘शो-पीस’ बनकर रह गए हैं। क्या है पूरा मामला? 2024 में शुरू की गई इस हाई-टेक निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य चोरी, लूट और हत्या जैसी आपराधिक घटनाओं पर नकेल कसना था। लेकिन, सिस्टम के मुख्य आधार यानी इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए जरूरी ‘सिम रिचार्ज’ न होने के कारण पूरा तंत्र धराशायी हो गया है। आज स्थिति यह है कि गांव के मुख्य चौराहों, स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा पर फिर से ग्रहण लग गया है। अधिकारियों की चुप्पी, ग्रामीणों में आक्रोश ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जब रखरखाव और सिम रिचार्ज की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं थी, तो जनता के करोड़ों रुपये की धनराशि से इन कैमरों को लगवाने का क्या औचित्य था? मामले पर अधिकारियों के पल्ला झाड़ने वाले जवाब सामने आए हैं: आलोक सिन्हा (जिला पंचायत राज अधिकारी): "मुझे कैमरे की जानकारी नहीं है, प्रधान और सचिव बेहतर बता सकते हैं। कार्रवाई की जाएगी।" शिवनरायण सिंह (खंड विकास अधिकारी, चोलापुर): "संभव है कि सिम रिचार्ज न होने के कारण कैमरे बंद हुए हों। मामले की जांच कराई जाएगी।" इलाके की सुरक्षा खतरे में कैथी, उगापुर, श्रीकंठपुर, बर्थरा, परानापुर, कौवापुर, गौरा उपरवार, चौबेपुर, सिंगलपुर, बहादुरपुर, मुनारी, नियारडीह, उधोरामपुर, हरदासीपुर, बाबतपुर, रामपुर, रजला, सिंहपुर और लखनपुर सहित कुल 40 ग्राम पंचायतों के लोग अब बिना इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा के रहने को मजबूर हैं। प्रत्येक कैमरे और पोल पर करीब 24,866 रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन देखरेख के अभाव में यह सरकारी निवेश अब महज कबाड़ में तब्दील हो चुका है। सवाल वही है—क्या वाकई विकास की योजनाओं का दम इसी तरह सरकारी उपेक्षा के कारण निकलता रहेगा ??
वाराणसी (चोलापुर): अपराध पर लगाम लगाने और ग्रामीण सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए शुरू किया गया ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ अपनी ही प्रशासनिक लापरवाही का शिकार हो गया है। चोलापुर विकास खंड के 40 गांवों में 70 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च कर लगाए गए 282 सीसीटीवी कैमरे मात्र दो महीने में ही ‘शो-पीस’ बनकर रह गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
2024 में शुरू की गई इस हाई-टेक निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य चोरी, लूट और हत्या जैसी आपराधिक घटनाओं पर नकेल कसना था। लेकिन, सिस्टम के मुख्य आधार यानी इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए जरूरी ‘सिम रिचार्ज’ न होने के कारण पूरा तंत्र धराशायी हो गया है। आज स्थिति यह है कि गांव के मुख्य चौराहों, स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा पर फिर से ग्रहण लग गया है।
अधिकारियों की चुप्पी, ग्रामीणों में आक्रोश
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जब रखरखाव और सिम रिचार्ज की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं थी, तो जनता के करोड़ों रुपये की धनराशि से इन कैमरों को लगवाने का क्या औचित्य था?
मामले पर अधिकारियों के पल्ला झाड़ने वाले जवाब सामने आए हैं:
आलोक सिन्हा (जिला पंचायत राज अधिकारी): "मुझे कैमरे की जानकारी नहीं है, प्रधान और सचिव बेहतर बता सकते हैं। कार्रवाई की जाएगी।"
शिवनरायण सिंह (खंड विकास अधिकारी, चोलापुर): "संभव है कि सिम रिचार्ज न होने के कारण कैमरे बंद हुए हों। मामले की जांच कराई जाएगी।"
इलाके की सुरक्षा खतरे में
कैथी, उगापुर, श्रीकंठपुर, बर्थरा, परानापुर, कौवापुर, गौरा उपरवार, चौबेपुर, सिंगलपुर, बहादुरपुर, मुनारी, नियारडीह, उधोरामपुर, हरदासीपुर, बाबतपुर, रामपुर, रजला, सिंहपुर और लखनपुर सहित कुल 40 ग्राम पंचायतों के लोग अब बिना इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा के रहने को मजबूर हैं। प्रत्येक कैमरे और पोल पर करीब 24,866 रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन देखरेख के अभाव में यह सरकारी निवेश अब महज कबाड़ में तब्दील हो चुका है।
सवाल वही है—क्या वाकई विकास की योजनाओं का दम इसी तरह सरकारी उपेक्षा के कारण निकलता रहेगा ??
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