मानसून की वापसी शुरू, देश के 43 फीसदी हिस्से में बारिश की कमी

नई दिल्ली, 19 सितंबर 2026। दक्षिण-पश्चिम मानसून ने शनिवार, 19 सितंबर को पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से वापसी शुरू कर दी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार मानसून की वापसी सामान्य समय के करीब है। वहीं, देश के करीब 43 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में अब भी बारिश की कमी दर्ज की गई है। 19 सितंबर तक देशभर में कुल मानसूनी बारिश सामान्य से लगभग 15 प्रतिशत कम रही और संचयी बारिश 695.6 मिलीमीटर दर्ज की गई। पश्चिमी राजस्थान से वापसी की शुरुआत IMD के मुताबिक मानसून वापसी की रेखा शनिवार को राजस्थान के रामगढ़, मोहनगढ़, फलोदी और खाजूवाला क्षेत्रों से गुजर रही थी। आने वाले तीन से चार दिनों में राजस्थान के अन्य हिस्सों के साथ पंजाब और कच्छ-सौराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों से भी मानसून की वापसी की संभावना जताई गई है। आमतौर पर मानसून की वापसी 17 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान से शुरू होती है। इस साल इसकी शुरुआत सामान्य तारीख से कुछ दिन के अंतर के साथ हुई है। कई राज्यों में बारिश की कमी मानसून सीजन के दौरान देश के कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश हुई है। मेघालय में बारिश की कमी 59 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 43 प्रतिशत, अरुणाचल प्रदेश में 41 प्रतिशत और बिहार में 36 प्रतिशत दर्ज की गई है। इसके अलावा गोवा, कर्नाटक, केरल, असम, तमिलनाडु, हरियाणा और तेलंगाना में भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। राजस्थान और पंजाब के लिए भी इस मानसून सीजन के अंत तक बारिश की कमी रहने का अनुमान है। बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव मानसून की वापसी शुरू होने के बीच बंगाल की खाड़ी में एक नया मौसम तंत्र सक्रिय हुआ है। IMD के अनुसार उत्तर अंडमान सागर के ऊपर बना निम्न दबाव क्षेत्र पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकता है। इसके 21 सितंबर के आसपास डिप्रेशन और 22 सितंबर के आसपास डीप डिप्रेशन में बदलने की संभावना जताई गई है। इसके बाद यह दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ सकता है तथा लगभग 23 सितंबर को तट पार करने की संभावना है। कई राज्यों में भारी बारिश का अनुमान नए मौसम तंत्र के प्रभाव से ओडिशा, गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, सिक्किम और तटीय आंध्र प्रदेश में अगले सप्ताह मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। इससे उन इलाकों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं जहां मानसून अभी सक्रिय है। हालांकि बारिश की कमी वाले क्षेत्रों में इसका प्रभाव राज्य और जिले के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। खेती पर भी असर मानसून की बारिश का सीधा संबंध खरीफ फसलों की खेती से है। जिन क्षेत्रों में लंबे समय तक बारिश सामान्य से कम रही है, वहां कृषि गतिविधियों और फसल उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना बनी हुई है। इस साल जून, अगस्त और सितंबर में अब तक बारिश सामान्य से नीचे रही, जबकि जुलाई में देशभर की बारिश सामान्य से करीब एक प्रतिशत अधिक थी। आगे मौसम पर नजर मानसून की वापसी शुरू होने के बावजूद देश के कई हिस्सों में अभी बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी। बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहा निम्न दबाव क्षेत्र अगले कुछ दिनों में मौसम को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल IMD की निगरानी मानसून की आगे की वापसी और बंगाल की खाड़ी में बन रहे मौसम तंत्र की दिशा पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में राज्यों के अनुसार बारिश की स्थिति में बदलाव देखने को मिल सकता है।

Sep 19, 2026 - 23:48
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