यूपी के लाखों आउटसोर्स और संविदा कर्मियों के लिए बड़ी खुशखबरी: 'उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम' को हरी झंडी, बिचौलियों से मिलेगी मुक्ति
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के लाखों आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों के हित में एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट ने 'उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम लिमिटेड' के गठन और इसके सुचारू संचालन के लिए 20 करोड़ रुपये के ब्याज मुक्त ऋण (Interest-free loan) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार के इस कदम से अब आउटसोर्स कर्मचारियों का शोषण समाप्त होगा, वेतन में पारदर्शिता आएगी और सीधे उनके खातों में समय पर मानदेय पहुंचेगा। क्या है 'उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम' और कैसे मिलेगा फायदा? कंपनीज एक्ट के तहत गठित हो रहा यह निगम एक नॉन-प्रॉफिट (पब्लिक लिमिटेड) संस्थान के रूप में काम करेगा। इसके गठन के बाद विभिन्न सरकारी विभागों में निजी एजेंसियों और बिचौलियों की मनमानी व धांधली पर पूरी तरह लगाम लगेगी। 1. हर महीने 1 से 5 तारीख तक सीधे खाते में आएगा वेतन: अब तक आउटसोर्सिंग एजेंसियों द्वारा कर्मचारियों का वेतन महीनों रोके रखने की शिकायतें आती थीं। नई व्यवस्था में हर महीने की 1 से 5 तारीख के भीतर तय मानदेय सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। 2. EPF और ESI सुविधाओं का सीधा लाभ: प्राइवेट सर्विस प्रोवाइडर के बजाय अब भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) का अंशदान सीधे कर्मचारियों के खाते/कार्ड में जमा होगा। इससे कर्मचारियों को मुफ्त इलाज, 180 दिन का मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) और पेंशन जैसी सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी। 3. तय मानदेय और जॉब सिक्योरिटी: निगम के जरिए जुड़ने वाले कर्मियों का न्यूनतम मानदेय 16,000 से 20,000 रुपये प्रतिमाह तक निर्धारित किया गया है। इसके अलावा शुरुआती नियुक्ति 3 वर्ष की अवधि के लिए होगी और GeM (जेम) पोर्टल के जरिए पारदर्शी तरीके से पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। संचालन के लिए 20 करोड़ का फंड योगी कैबिनेट ने इस निगम को मजबूती से खड़ा करने के लिए 20 करोड़ रुपये का बजट शून्य ब्याज दर पर स्वीकृत किया है। शुरुआती 5 वर्षों तक इस ऋण को चुकाने की बाध्यता नहीं होगी, जिसके बाद निगम 10 वर्षों में 2-2 करोड़ रुपये करके इसे वापस लौटाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का रुख: "आउटसोर्सिंग कर्मियों का किसी भी स्तर पर शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह निर्णय राज्य में श्रम गरिमा, पारदर्शिता और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।
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